The Vvaan Rating: दीपक कुमार मिश्रा के निर्देशन में बनी फिल्म 'वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट' में सिद्धार्थ मल्होत्रा, तमन्ना भाटिया, अनूप सोनी, सुनील ग्रोवर, श्वेता तिवारी और मनीष पॉल मुख्य भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। 2 घंटे 11 मिनट के रनटाइम वाली इस फिल्म को नवभारत की ओर से 3.5 स्टार्स की रेटिंग दी गई है। इसके पीछे की वजह और इसकी कहानी में क्या खास है, तो आइए पढ़ते हैं इसका पूरा रिव्यू।
बॉलीवुड में जब भी किसी फिल्म में प्रेम कहानी, रहस्य, रोमांच और भारतीय लोककथाओं का मिश्रण देखने को मिलता है, तो दर्शकों की दिलचस्पी अपने आप बढ़ जाती है। सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया स्टारर ‘द वन’ भी इसी तरह की एक अलग दुनिया रचने की कोशिश करती है। फिल्म 25 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है और इसमें भारतीय लोककथा, रहस्य, रोमांस, एडवेंचर और सुपरनैचुरल तत्वों को एक साथ पिरोया गया है।
मुंबई की जिंदगी जी रहा ऋषि तब अपने अतीत और पुश्तैनी जड़ों की ओर लौटने को मजबूर होता है, जब जमीन से जुड़ा एक मामला उसे अपनी पत्नी ममता के साथ देवांचल गांव ले आता है। ऋषि के लिए यह सफर शुरुआत में सिर्फ एक पारिवारिक मसले को सुलझाने तक सीमित होता है, लेकिन गांव पहुंचते ही उसे उस जंगल से जुड़ी एक रहस्यमयी लोककथा के बारे में पता चलता है, जिसे लोग वन देवी का पवित्र स्थान मानते हैं।
गांव में एक सख्त मान्यता है कि अंधेरा होने के बाद जंगल में जाना खतरे से खाली नहीं है। लेकिन जब ऋषि इस चेतावनी को नजरअंदाज कर रात में जंगल में प्रवेश करता है, तो उसकी मुलाकात ऐसे रहस्य से होती है, जो उसकी सोच और पूरी कहानी को बदलकर रख देता है।
फिल्म की खासियत यह है कि यह अपने रहस्य को एक साथ दर्शकों के सामने नहीं खोलती। पहले वन देवी की कहानी और उनसे जुड़ी लोक मान्यताओं को स्थापित किया जाता है और फिर धीरे-धीरे उस खौफनाक अलौकिक शक्ति की मौजूदगी सामने आती है, जो इस जंगल की दुनिया में कहीं गहराई से मौजूद है। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, अलग-अलग घटनाएं एक-दूसरे से जुड़ती जाती हैं और रहस्य की परतें धीरे-धीरे खुलती हैं।
सिद्धार्थ मल्होत्रा के लिए यह किरदार उनकी पिछली कुछ फिल्मों से अलग नजर आता है। सिद्धार्थ ने किरदार के एक्शन और इमोशनल दोनों पहलुओं को अच्छे तरीके से संभाला है। खासकर फिल्म के गंभीर और रहस्यमयी हिस्सों में उनका अभिनय प्रभावी लगता है।
तमन्ना भाटिया फिल्म में सिर्फ ग्लैमर या रोमांटिक एंगल तक सीमित नहीं रहतीं। उनके किरदार की कहानी में अपनी अहम भूमिका है। सिद्धार्थ के साथ उनकी केमिस्ट्री भी फिल्म को एक अलग रंग देती है। तमन्ना ने अपने किरदार में भावनात्मक गहराई लाने की कोशिश की है और कई दृश्यों में वह सहज नजर आती हैं।
निर्देशक ने फिल्म के लिए एक अलग विजुअल वर्ल्ड तैयार करने की कोशिश की है। जंगल, अंधेरा, रहस्यमयी माहौल और लोककथाओं से जुड़े दृश्य फिल्म को एक अलग पहचान देते हैं।
फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर भी रहस्य और रोमांच को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। खासकर जंगल से जुड़े दृश्यों में साउंड और विजुअल्स मिलकर माहौल बनाने में सफल रहते हैं।
फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष उसका कॉन्सेप्ट है, लेकिन यही जगह कुछ हिस्सों में इसकी कमजोरी भी बन जाती है। लोककथा, रोमांस, एक्शन, रहस्य और सुपरनैचुरल एलिमेंट्स को एक साथ संतुलित करना आसान नहीं था। कुछ दृश्यों में कहानी जरूरत से ज्यादा एक्सपोजिशन पर निर्भर नजर आती है और सेकंड हाफ में गति थोड़ी असमान महसूस होती है।
फिर भी फिल्म की कोशिश साफ नजर आती है कि दर्शकों को बॉलीवुड की सामान्य प्रेम या एक्शन कहानी से अलग कुछ दिया जाए।
फिल्म ‘द वन’ की सबसे बड़ी खूबी इसका अलग विषय और भारतीय लोककथा से जुड़ा संसार है। सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया ने अपने-अपने किरदारों के साथ न्याय किया है, जबकि फिल्म का विजुअल ट्रीटमेंट और रहस्यमयी माहौल इसे सामान्य बॉलीवुड फिल्मों से अलग बनाता है और ये साल की बेहतरीन फिल्मों में से एक बनकर उभरती है।
अगर आपको लोककथाओं, रहस्य, रोमांस, एडवेंचर और सुपरनैचुरल कहानियों में दिलचस्पी है, तो वन आपको एक अलग सिनेमाई अनुभव दे सकती है।