बंगाल फाइल्स मूवी रिव्यू: सिमरत कौर की दमदार परफॉर्मेंस, झकझोर कर रख देगी इतिहास की ये कहानी 
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The Bengal Files Review: झकझोरने वाली है 'द बंगाल फाइल्स फिल्म की कहानी

The Bengal Files: विवेक अग्निहोत्री की बहुचर्चित फिल्म द बंगाल फाइल्स रिलीज हो चुकी है। फिल्म को देखने का आप अगर प्लान बना रहे हैं तो सिनेमा घर जाने से पहले इस रिव्यू को जरूर पढ़ लें।

अनिल सिंह

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Film Review: मिथुन चक्रवर्ती और पल्लवी जोशी समेत अनुपम खेर, पुनीत इस्सर, नमाशी चक्रवर्ती और सिमरत कौर जैसे कलाकारों से सजी विवेक अग्निहोत्री की ऐतिहासिक घटना पर आधारित फिल्म द बंगाल फाइल्स रिलीज हो चुकी है। फिल्म में कलाकारों की एक्टिंग आपका दिल जीत सकती है, लेकिन डायरेक्शन में कमजोरी साफ नजर आ रही है। वहीं फिल्म का रन टाइम भी दर्शकों को बोर कर सकता है। 

फिल्म ऐतिहासिक घटना पर आधारित है जिसमें पश्चिम बंगाल में हुए नरसंहार को दिखाया गया है। कुछ दृश्य ऐसे हैं जो आपको हिला कर रख सकते हैं। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि यह फिल्म कमजोर दिल वालों के लिए नहीं है। 

द बंगाल फाइल्स की कहानी 

हर शुक्रवार नई फिल्में आती-जाती रहती हैं, लेकिन कभी-कभी कोई ऐसा सिनेमाई अनुभव सामने आता है जो दिल-दिमाग को झकझोर देता है। द बंगाल फाइल्स (#TheBengalFiles) बंगाल के सबसे बड़े मानव नरसंहार की सच्चाई को सामने लाती है। निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री ने इसे 100 वर्षीय महिला भारती बनर्जी की आंखों से दिखाया है, जिसे पल्लवी जोशी ने निभाया है। कहानी में भय, दर्द और इतिहास का वह काला सच झलकता है, जिसे अब तक पर्दे पर उतनी गंभीरता से नहीं दिखाया गया था। हालांकि, फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी लंबाई है – करीब 3 घंटे 20 मिनट का रन टाइम दर्शकों की धैर्य परीक्षा लेता है और कई जगहों पर फिल्म खिंची हुई लगती है।

डायरेक्शन और सिनेमैटोग्राफी: फिल्म की सिनेमैटोग्राफी जबरदस्त है, जबकि डायरेक्शन में कुछ चीजों का अभाव देखने को मिलता है, फिल्म बहुत ज्यादा लंबी हो गई है और इस वजह से दर्शकों पर इसका असर कम हो सकता है। इसे छोटा करके और दिलचस्प बनाया जा सकता था। 

एक्टिंग: फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसका अभिनय है। पल्लवी जोशी का भारती बनर्जी के रूप में अभिनय बेहद प्रभावशाली है और दर्शक उनके दर्द से खुद को जोड़ पाते हैं। मिथुन चक्रवर्ती और अनुपम खेर अपनी परिपक्व अदाकारी से कहानी को गहराई देते हैं। पुनीत इस्सर और नमाशी चक्रवर्ती का काम भी सच्चाई के करीब लगता है। सिमरत कौर और बाकी कलाकारों ने भी अपने हिस्से को ईमानदारी से निभाया है। यह कहना गलत नहीं होगा कि कलाकारों की परफॉर्मेंस ही फिल्म को भावनात्मक रूप से मजबूत बनाती है।

फाइनल टेक: द बंगाल फाइल्स एक हार्ड-हिटिंग फिल्म है जो दर्शकों को बंगाल के अनसुने इतिहास से रूबरू कराती है। इसकी प्रस्तुति और कलाकारों की मेहनत सराहनीय है, लेकिन जरूरत से ज्यादा लंबा रन टाइम फिल्म के असर को थोड़ा कम कर देता है। यदि कहानी को और संक्षिप्त रूप में दिखाया जाता तो यह और ज्यादा प्रभावी हो सकती थी।

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