सोनाक्षी सिन्हा का सफलता मंत्र: गलतियां करने से नहीं डरती, असली सीख तभी मिलती है 
मनोरंजन

'जटाधरा' एक्ट्रेस सोनाक्षी सिन्हा ने किया खुलासा, पैन-इंडिया फिल्मों से बढ़ता है कलाकारों का अनुभव

Sonakshi Sinha ने कहा कि गलतियां करने से ही इंसान सीखता है। उन्होंने पैन-इंडिया फिल्मों में काम के अनुभव को सीखने का मौका बताया और कहा कि यही विविधता भारतीय सिनेमा की खूबसूरती है।

अनिल सिंह

StartFragment

Sonakshi Sinha Jatadhara: एक्ट्रेस सोनाक्षी सिन्हा (Sonakshi Sinha) और सुधीर बाबू स्टारर फिल्म 'जटाधरा' तेलुगू और हिंदी भाषाओं में रिलीज हो चुकी है और दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। इस फिल्म में अहम किरदार निभा रहीं सोनाक्षी सिन्हा ने हाल ही में अपने पेशेवर अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि उनके लिए सीखने की प्रक्रिया, गलतियां करने और अपने प्रोफेशन को समझने का क्या महत्व है।

आईएएनएस से बातचीत के दौरान, सोनाक्षी सिन्हा ने स्पष्ट किया कि वह गलतियों से बिल्कुल नहीं डरती हैं। उन्होंने कहा कि इंसान की असली सीख उसी समय होती है, जब वह गलती करता है। उन्होंने इस बात को एक उदाहरण से समझाया, जैसे एक बच्चा चलना सीखते समय कई बार गिरता है, ठीक वैसे ही जीवन में भी गिरना और संभलना सीखने का एक अभिन्न हिस्सा है।

सीखना ही सफलता की कुंजी

सोनाक्षी सिन्हा ने सफलता की कुंजी निरंतर सीखने की प्रक्रिया को बताया। उन्होंने कहा, "अगर कोई सोचने लगे कि उसे सब कुछ आता है, तो वही उसकी सबसे बड़ी भूल होती है। इसी कारण इंसान को हमेशा सीखने की प्रक्रिया में रहना चाहिए, चाहे वह किसी भी प्रोफेशन में क्यों न हो।"

एक्टिंग को एक ऐसा पेशा बताते हुए उन्होंने कहा कि यहां हर दिन कुछ नया सीखने को मिलता रहता है। हर सीन, हर किरदार और हर टीम मेंबर कुछ न कुछ सिखाता है, जो आपके हुनर को निखारता है।

पैन-इंडिया फिल्मों का दौर

सोनाक्षी ने भारतीय सिनेमा में चल रहे पैन-इंडिया फिल्मों के ट्रेंड को कलाकारों के लिए एक शानदार अवसर बताया। उन्होंने कहा कि यह ट्रेंड नया नहीं है, बल्कि इसकी शुरुआत पहले ही रजनीकांत और कमल हासन जैसी दिग्गज हस्तियों की फिल्मों से हो चुकी थी। वहीं, 'बाहुबली' जैसी फिल्मों ने इस अवधारणा को नई ऊंचाइयां दीं। यह बहुभाषी सिनेमा कलाकारों को व्यापक दर्शकों तक पहुंचने का मौका देता है।

भाषाओं और संस्कृति से बढ़ता है अनुभव

तेलुगू सिनेमा में डेब्यू कर रहीं सोनाक्षी सिन्हा से जब पूछा गया कि क्या अलग-अलग भाषाओं और दर्शकों को ध्यान में रखकर काम करना दबाव भरा था, तो उन्होंने इसे सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा, "मुझे कोई दबाव महसूस नहीं हुआ। बल्कि, इसे मैंने एक सीखने के मौके के तौर पर लिया।"

उन्होंने आगे कहा कि जब आप देश के अलग-अलग हिस्सों के कलाकारों, भाषाओं और संस्कृतियों के साथ काम करते हैं, तो आपका दृष्टिकोण और अनुभव दोनों आगे बढ़ते हैं। हर व्यक्ति की अपनी कहानी होती है और उनसे कुछ नया जानने को मिलता है। उन्होंने ज़ोर दिया कि यही विविधता भारतीय सिनेमा की असली खूबसूरती है।

EndFragment

आज की ताजा खबर 16 अगस्त LIVE: वाराणसी एयरपोर्ट पर चली गोलियां; बंगाल में आशीष बनर्जी ने की आत्महत्या

मेरे पास हथियार है...वाराणसी से मुंबई जा रही फ्लाइट में चली गोलियां, 2 एयरपोर्ट स्क्रीनर को किया घायल

वंदे मातरम पर छिड़ा सियासी संग्राम: बंकिम चंद्र के वंशज ने सोनिया गांधी से क्यों मांगी माफी? जानें पूरा विवाद

भारत की मेजबानी में 12वीं BRICS बैठक, दिल्ली में जुटे सदस्य देश, क्लाइमेट चेंज से निपटने का बनेगा एक्शन प्लान

Farmers Protest: दिल्ली कूच पर निकले किसान, खनौरी बॉर्डर सील; सड़क पर पत्थर-कंटेनर लगाकर रोका रास्ता- VIDEO