शिवाजी गणेशन (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
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शिवाजी गणेशन ने 7 साल की उम्र में छोड़ा घर, थिएटर से शुरू हुआ सफर, एक फिल्म में निभाए 9 किरदार

Sivaji Ganesan Career: शिवाजी गणेशन भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेताओं में शामिल रहे हैं। 1 अक्टूबर 1928 को जन्मे शिवाजी ने 7 साल की उम्र में थिएटर से सफर शुरू किया। नवरथी में उन्होंने 9 किरदार निभाए।

सोनाली झा

Sivaji Ganesan Birth Anniversary Special Story: तमिल सिनेमा के दिग्गज अभिनेता शिवाजी गणेशन का नाम भारतीय सिनेमा के उन कलाकारों में लिया जाता है, जिन्होंने अपनी दमदार अदाकारी से अभिनय की अलग मिसाल कायम की। मंच से अपने करियर की शुरुआत करने वाले शिवाजी गणेशन ने फिल्मों में भी शानदार मुकाम हासिल किया। उन्होंने अपने लंबे करियर में 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और कई यादगार किरदार निभाए।

शिवाजी गणेशन का जन्म 1 अक्टूबर 1928 को हुआ था। वह अपने माता-पिता की चौथी संतान थे। बचपन से ही उन्हें अभिनय और नाटक में गहरी दिलचस्पी थी। यही वजह थी कि महज 7 साल की उम्र में उन्होंने घर छोड़ दिया और एक थिएटर ग्रुप से जुड़ गए। इसके बाद कई वर्षों तक उन्होंने थिएटर में काम किया और अभिनय की बारीकियां सीखीं। मंच पर उनके अभिनय ने उन्हें आगे चलकर फिल्मों में पहचान बनाने में मदद की।

पराशक्ति से मिली बड़ी पहचान

शिवाजी गणेशन ने 24 साल की उम्र में फिल्म 'पराशक्ति' से सिनेमाई सफर शुरू किया। साल 1952 में रिलीज हुई इस फिल्म ने उन्हें रातोंरात लोकप्रिय बना दिया। फिल्म में उनके अभिनय को दर्शकों ने खूब पसंद किया। बताया जाता है कि 'पराशक्ति' लंबे समय तक सिनेमाघरों में दर्शकों की पसंद बनी रही और विदेशों में भी इसे खूब देखा गया।

एक फिल्म में निभाए 9 अलग-अलग किरदार

शिवाजी गणेशन के करियर की सबसे खास उपलब्धियों में उनकी 100वीं फिल्म 'नवरथी' भी शामिल है। इस फिल्म में उन्होंने एक-दो नहीं, बल्कि 9 अलग-अलग किरदार निभाए थे। उनके अभिनय की रेंज का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने हर किरदार को अलग अंदाज में पर्दे पर पेश किया। यह फिल्म उनके शानदार अभिनय करियर में एक खास पड़ाव मानी जाती है।

शिवाजी गणेशन

पद्मश्री से दादा साहेब फाल्के पुरस्कार तक

शिवाजी गणेशन को उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने पद्मश्री और पद्मभूषण से सम्मानित किया। उन्हें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार भी मिला। इसके अलावा फ्रांस सरकार ने उन्हें 1995 में अपने प्रतिष्ठित सम्मान शेवेलियर ऑफ द नेशनल ऑर्डर ऑफ द लीजन ऑफ ऑनर से सम्मानित किया था।

विदेशों में भी मिला सम्मान

साल 1962 में शिवाजी गणेशन भारत के सांस्कृतिक प्रतिनिधि के तौर पर अमेरिका गए थे। अपनी इस यात्रा के दौरान उन्हें विशेष सम्मान मिला और नियाग्रा फॉल्स के मानद मेयर के रूप में भी सम्मानित किया गया। उन्होंने राजनीति में भी कदम रखा और अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े रहे। 21 जुलाई 2001 को 72 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया।

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