रवींद्र संगीत से लेकर बॉलीवुड तक का सुनहरा सफर, पद्म श्री और पद्म भूषण ठुकराने का किस्सा आज भी है अनसुना

Hemant Kumar Biography: दिग्गज सिंगर हेमंत कुमार ने इंजीनियरिंग छोड़कर संगीत को अपना करियर बनाया। बिना बीन के नागिन फिल्म की धुन रचकर इतिहास रचा और बाद में पद्म पुरस्कार भी विनम्रता से ठुकरा दिया।
Hemant Kumar Death Anniversary
हेमंत कुमार(फाइल फोटो)
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Hemant Kumar Death Anniversary: हिंदी और बंगाली फिल्म सिनेमा में अपनी जादुई आवाज और संगीत से लाखों दिलों को जीतने वाले हेमंत कुमार की जिंदगी किसी मिसाल से कम नहीं रही। अपनी गंभीर और शांत आवाज से सदाबहार गाने देने वाले इस महान कलाकार ने हमेशा अपने सिद्धांतों और संगीत की मौलिकता को सबसे ऊपर रखा। जीवन में मिले कई बड़े सम्मानों से परे, उन्होंने सादगी और स्वाभिमान के साथ अपनी राह खुद बनाई।

इंजीनियरिंग छोड़ कर म्यूजिक में बनाया करियर

16 जून 1920 को वाराणसी में जन्मे हेमंत कुमार का पालन-पोषण कोलकाता में हुआ था। उन्होंने प्रतिष्ठित जादवपुर यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई में दाखिला लिया था। हालांकि संगीत के प्रति उनके जुनून ने उन्हें पढ़ाई बीच में छोड़ने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने 1933 में ऑल इंडिया रेडियो से अपनी म्यूजिक जर्नी की शुरुआत की और जल्द ही अपनी गायकी से सभी को प्रभावित करना शुरू कर दिया।

बिना बीन के बनाई नागिन की धुन

मुंबई के सिनेमाई जगत में प्लेबैक सिंगिग के साथ-साथ उन्होंने एक म्यूजिक डायरेक्टर के रूप में भी अपनी गहरी छाप छोड़ी। साल 1954 में आई हिंदी फिल्म नागिन का संगीत उन्होंने ही तैयार किया था। इस फिल्म के गाने 2 सालों तक लगातार संगीत चार्ट्स में शीर्ष पर बने रहे। इस शानदार सफलता के लिए 1955 में उन्हें प्रतिष्ठित फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का पुरस्कार दिया गया। इसी साल बंगाली फिल्म शाप मोचन से एक्टर उत्तम कुमार के साथ उनकी जोड़ी शुरू हुई, जो आगे चलकर बंगाली सिनेमा की सबसे सफल सिंगर और एक्टर की जोड़ी बनी।

Hemant Kumar Biography
हेमंत कुमार(फाइल फोटो)

सबसे बड़े नागरिक सम्मान ठुकराने की वजह

हेमंत कुमार को जब भारत सरकार की ओर से पद्म श्री और बाद में पद्म भूषण अवॉर्ड देने की पेशकश की गई, तो उन्होंने इन पुरस्कारों को बहुत ही विनम्रता से लेने से मना कर दिया था। उनका मानना था कि यह अवॉर्ड उन्हें तब दिया जा रहा था जब उनसे काफी जूनियर कलाकारों और उनके पूर्व सहायकों को यह पहले ही मिल चुका था। उनका मानना था कि सम्मान सही समय पर मिलना चाहिए, देरी से मिलने वाले सम्मान की अहमियत खत्म हो जाती है।

1 दशक तक छाया रहा संगीत का जादू

1950 के दशक में उनका करियर अपने चरम पर पहुंच गया था। इस दौरान उन्होंने कई हिंदी और बंगाली फिल्मों के लिए कालजयी गीत गाए। उनकी गायकी से प्रभावित होकर संगीतकार सलिल चौधरी और स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने उन्हें भगवान की वाणी तक कहा था। उन्होंने बंगाली में हरानो सुर, नील आकाशेर नीचे, सप्तपदी जैसी फिल्मों और हिंदी में जागृति, एक ही रास्ता, बीस साल बाद और खामोशी जैसी फिल्मों में अपना अमर संगीत देकर भारतीय सिनेमा को समृद्ध किया।

Hemant Kumar Death Anniversary
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सादगी भरा जीवन और अनोखी संगीतमय विरासत

हेमंत कुमार न केवल एक बेहतरीन सिंगर और म्यूजिक डायरेक्टर थे, बल्कि उन्होंने 20 साल बाद, कोहरा और खामोशी जैसी यादगार फिल्मों का निर्माण भी किया। वह हमेशा साधारण धोती-कुर्ता पहनते थे और ग्लैमर की दुनिया में रहकर भी बेहद सादगी पसंद इंसान बने रहे। 26 सितंबर 1989 को इस दुनिया को अलविदा कहने वाले हेमंत दा की आवाज और उनका संगीत आज भी भारतीय संगीत प्रेमियों के दिलों में पूरी तरह जिंदा है।

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