रणधीर कपूर (फोटो- सोशल मीडिया)  
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Birthday Special: पहली ही फिल्म में पिता-दादा को किया डायरेक्ट, फिर भी नहीं चमका रणधीर कपूर का करियर

Randhir Kapoor Career: रणधीर कपूर ने बचपन से ही फिल्मों में कदम रखा। ‘कल आज और कल’ से डायरेक्टर और लीड अभिनेता के रूप में डेब्यू किया। हालांकि कपूर परिवार की विरासत में उनका नाम हमेशा याद रहेगा।

सोनाली झा

Randhir Kapoor Birthday: 15 फरवरी 1947 को मुंबई में जन्मे रणधीर कपूर आज 79 साल के हो गए हैं। कपूर खानदान की तीसरी पीढ़ी से ताल्लुक रखने वाले रणधीर ने बचपन में ही फिल्मों में कदम रख दिया था। उन्होंने 1955 में आई फिल्म श्री 420 में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट काम किया। दिग्गज अभिनेता राज कपूर के बेटे और पृथ्वीराज कपूर के पोते रणधीर से इंडस्ट्री को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन वह अपने पिता और भाई ऋषि कपूर जैसी ऊंचाइयों तक नहीं पहुंच पाए।

1971 में रणधीर कपूर ने फिल्म 'कल आज और कल' से बतौर लीड एक्टर और डायरेक्टर डेब्यू किया। खास बात यह थी कि इस फिल्म में उनके साथ पिता राज कपूर और दादा पृथ्वीराज कपूर भी नजर आए। फिल्म को औसत सफलता मिली, लेकिन इसी के सेट पर रणधीर और बबीता की लव स्टोरी शुरू हुई। इसके बाद 1972 में उनकी ‘जवानी दीवानी’ और ‘रामपुर का लक्ष्मण’ जैसी फिल्में हिट रहीं। 70 के दशक में उन्होंने कई मल्टीस्टारर फिल्मों में काम किया और अपनी पहचान बनाई।

सपोर्टिंग रोल मिलने लगे तो छोड़ी एक्टिंग

1981 के बाद रणधीर कपूर का करियर ढलान पर आने लगा। फिल्में फ्लॉप होने लगीं और उन्हें लीड रोल की जगह साइड रोल ऑफर होने लगे। इससे आहत होकर उन्होंने लगभग 10 साल तक एक्टिंग से दूरी बना ली। 1990 के दशक में उन्होंने डायरेक्शन और प्रोडक्शन की ओर रुख किया और ‘हिना’, ‘प्रेम ग्रंथ’ और ‘आ अब लौट चलें’ जैसी फिल्में बनाई। हालांकि, एक अभिनेता के तौर पर उनका करियर कभी स्थिर नहीं हो पाया।

निजी जीवन में हुई उथल-पुथल

फिल्मी करियर में आई गिरावट का असर उनकी निजी जिंदगी पर भी पड़ा। पत्नी बबीता से अलगाव के बाद उन्हें बेटियों करिश्मा कपूर और करीना कपूर की परवरिश की जिम्मेदारी उठानी पड़ी। एक समय ऐसा भी आया जब स्कूल फीस भरना तक मुश्किल हो गया था। 43 साल लंबे करियर में रणधीर कपूर को कोई बड़ा अवॉर्ड नहीं मिला। उन्हें सिर्फ फिल्मफेयर में ‘कसमें वादे’ के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नॉमिनेशन मिला था। आज भले ही रणधीर कपूर स्टारडम की ऊंचाइयों पर नहीं पहुंचे, लेकिन हिंदी सिनेमा में उनका योगदान और कपूर परिवार की विरासत का हिस्सा होने के नाते उनका नाम हमेशा याद किया जाएगा।

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