Highlights
रावण और जटायु के युद्ध वाले सीन पर 6.5 साल काम हुआ।
पुष्पक विमान के फाइनल लुक देने के लिए 40-50 डिजाइन तैयार किए गए।
विमान के डिजाइन पर करीब 2 साल की मेहनत लगी।
रणबीर कपूर ने VFX कलाकारों की मेहनत को AI कहकर खारिज करने पर चिंता जताई।
Nitesh Tiwari Ramayana Controversy: फिल्म इंडस्ट्री में जब भी किसी बड़े प्रोजेक्ट की चर्चा होती है, तो दर्शकों के मन में भव्यता और शानदार सीन्स की एक तस्वीर उभरकर सामने आ जाती है। इन दिनों डायरेक्टर नितेश तिवारी की फिल्म 'रामायण' अपनी बड़ी स्टारकास्ट और बेहतरीन वीएफएक्स के कारण लगातार सुर्खियों में बनी हुई है।
इस प्रोजेक्ट को लेकर सिनेमा प्रेमियों के बीच क्रेज है, क्योंकि फिल्म मेकर्स इसकी हर एक बारीकी पर बेहद गहराई से काम कर रहे हैं। हाल ही में फिल्म के डायरेक्शन से जुड़े कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं जो यह बताते हैं कि इस ऐतिहासिक गाथा को बड़े पर्दे पर उतारने के लिए कितनी कड़ी मेहनत और लंबा वक्त लगा है।
किसी भी फिल्म के एक्शन सीक्वेंस उसकी कहानी में जान फूंकने का काम करते हैं, लेकिन जब बात पौराणिक कथाओं पर आधारित सीन्स की हो तो चुनौती और भी बड़ी हो जाती है। फिल्म के एक अहम हिस्से यानी रावण और जटायु के बीच होने वाले जबरदस्त युद्ध को फिल्माने और तैयार करने में मेकर्स को लगभग 6.5 साल का लंबा समय लगा है।
इस एक सिंगल एक्शन सीक्वेंस को परफेक्ट बनाने के लिए कलाकारों के साथ लंबी बातचीत से लेकर डिजिटल वीएफएक्स तक की प्रक्रिया को बेहद बारीकी से अंजाम दिया गया है, जिसमें हजारों कलाकारों ने दिन-रात काम किया है।
फिल्म रामायण में रावण के उड़ने वाले पुष्पक विमान को तैयार करने में ही करीब 2 साल का समय लग गया। मेकर्स ने इस वाहन के शुरुआती दौर में लगभग 40 से 50 अलग-अलग डिज़ाइन तैयार किए थे।
विमान के फाइनल लुक पर पहुंचने से पहले किए गए इन बदलावों का असर सीधे तौर पर एक्शन सीक्वेंस की शूटिंग पर भी पड़ा, जिसके चलते टीम को कई हिस्सों में रिशूट करना पड़ा ताकि सीन में पूरी प्रामाणिकता नजर आ सके।
आज के दौर में जब किसी फिल्म के ट्रेलर या टीज़र में भारी वीएफएक्स का इस्तेमाल किया जाता है, तो दर्शकों का एक ग्रुप अक्सर उसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बताकर खारिज कर देता है। फिल्म रामायण में भगवान राम की भूमिका निभा रहे एक्टर रणबीर कपूर ने इस सोच पर गहरी चिंता जताई है।
उनका मानना है कि दर्शकों द्वारा कलाकारों की महीनों की मेहनत और खून-पसीने को एक झटके में एआई का नाम दे देना बेहद निराशाजनक है। एक सिंगल फ्रेम को जीवंत बनाने और उसमें परफेक्शन लाने के लिए हजारों वीएफएक्स आर्टिस्ट अपने रात-दिन लगा देते हैं।