नसीम बानो (फोटो-सोर्स,सोशल मीडिया) 
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हिंदी सिनेमा की पहली सुपरस्टार कहलाईं ये एक्ट्रेस, 30 दशक तक फिल्मों में अदाकारा ने किया राज

1930 के दौर में हिंदी सिनेमा में कई बदलाव हुए और नए चेहरों ने एक अलग पहचान बनाई। इसमें से नसीम बानो का नाम भी शामिल था, जिन्हें लोग प्यार से ब्यूटी क्वीन और परी कहकर बुलाने लगे थे और उन्होंने सालों तक सिनेमा पर राज किया।

स्नेहा मौर्या

मुंबई: 1930 का दशक भारतीय सिनेमा के लिए बेहद खास रहा। इस दौर में एक से बढ़कर एक अदाकाराएं बॉलीवुड में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रही थीं। उसी दौर में एक बेहद खूबसूरत चेहरा फिल्म इंडस्ट्री में उभरा, जिसे लोगों ने ब्यूटी क्वीन, परी और ग्रेसफुल दीवा जैसे नामों से नवाजा। यह अदाकारा थीं नसीम बानो, जो आगे चलकर दिलीप कुमार की सास और सायरा बानो की मां बनीं।

दरअसल, नसीम बानो का असली नाम रोशन आरा बेगम था और वह 1916 में पुरानी दिल्ली में जन्मी थी। उनके पिता एक गवर्नमेंट ऑफिसर थे और मां शमशाद बेगम, एक जानी-मानी गायिका और तवायफ थीं। नसीम बचपन से ही फिल्मों में काम करने का सपना देखती थीं, लेकिन उनकी मां चाहती थीं कि बेटी पढ़-लिखकर डॉक्टर बने। अभिनय के प्रति नसीम का जुनून इतना गहरा था कि उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में आने के लिए अपनी मां के विरोध के बावजूद भूख हड़ताल तक कर दी थी।

इस फिल्म से नसीम बानो ने शुरू किया था करियर

नसीम बानो ने 1935 में फिल्म 'खून का खून' जो शेक्सपियर के "हैमलेट" पर आधारित थी से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने 'तलाक', 'मीठा जहर', 'खान बहादुर' जैसी कई फिल्में कीं, लेकिन उन्हें असली पहचान 1939 में आई फिल्म 'पुकार' से मिली, जिसमें उन्होंने नूर जहां का किरदार निभाया था।

इस फिल्म की सफलता के बाद नसीम बानो हिंदी सिनेमा की हाइएस्ट पेड एक्ट्रेसेस में शामिल हो गईं। उनके सौंदर्य और अभिनय की चर्चा पूरे देश में होने लगी। उन्होंने 'मैं हारी', 'अनोखी अदा', 'दूर चलें', 'शीश महल' जैसी कई हिट फिल्मों में काम किया। उनकी आखिरी फिल्म 'Chaddian Di Doli' साल 1966 में रिलीज हुई।

फिल्मों की पहली महिला सुपरस्टार थी

नसीम बानो को अक्सर भारत की पहली महिला सुपरस्टार कहा जाता है। उनका स्टारडम उस समय भी कायम रहा जब भारतीय सिनेमा अपने शुरुआती पड़ाव पर था। बाद में उनकी बेटी सायरा बानो ने भी फिल्मों में कदम रखा और खूब शोहरत बटोरी। दिलचस्प बात यह है कि जैसे नसीम की मां ने उन्हें फिल्मों में आने से रोका था, वैसे ही नसीम ने भी शुरुआत में सायरा को फिल्म इंडस्ट्री से दूर रखने की कोशिश की थी। लेकिन वक्त के साथ सायरा ने अपनी जगह बना ही ली।

नसीम बानो न केवल एक खूबसूरत अदाकारा थीं, बल्कि अपने समय की एक प्रगतिशील महिला भी थीं, जिन्होंने समाज की बंदिशों को तोड़ते हुए अपना नाम इतिहास में दर्ज कराया।

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