Nana Patekar on Reservation: फिल्मों में अपने दमदार एक्टिंग और बेबाक अंदाज से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले एक्टर नाना पाटेकर रियल लाइफ में भी एक अलग मिसाल पेश करते हैं। पर्दे की चकाचौंध और मुंबई के शोर-शराबे से दूर वे बेहद सादगी भरा जीवन जीना पसंद करते हैं।
हाल ही में उन्होंने अपनी पर्सनल लाइफ, नैतिक मूल्यों और सामाजिक दायित्वों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर खुलकर बात की। उनकी बातों में पुरानी पीढ़ी से मिले मजबूत संस्कारों की झलक साफ दिखाई देती है। इसके साथ ही समाज के पिछड़े और जरूरतमंद वर्गों को सही दिशा दिखाने को लेकर उनका दृष्टिकोण काफी साफ और प्रभावकारी नजर आता है।
सामाजिक व्यवस्था और उत्थान से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर बात करते हुए नाना पाटेकर ने एक अहम विचार सामने रखा। उनका मानना है कि किसी भी प्रकार के आरक्षण और सहायता का आधार केवल जातिगत नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें आर्थिक स्थिति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यदि समाज के आर्थिक रूप से कमजोर और पिछड़े लोगों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आगे बढ़ने के सही मौका मिल जाएं, तो वे अपनी क्षमता के बल पर अपनी अलग पहचान बना सकते हैं। सही अवसर मिलने पर हर व्यक्ति आत्मनिर्भर बनकर समाज में सम्मानजनक स्थान हासिल कर सकता है।
बदलते समय के साथ समाज में आ रहे बदलावों पर चिंता जताते हुए उन्होंने पुरानी पीढ़ी से मिले संस्कारों को जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बताया। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर उन बुनियादी सिद्धांतों को भूल जाते हैं जो इंसान को सही राह दिखाते हैं। जनसेवा के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता को सिद्ध करते हुए उन्होंने उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की और साइबर अपराध जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा की। इस मुहिम के तहत लोगों को जागरूक करने के लिए उन्होंने किसी भी तरह की फीस लेने से साफ मना कर दिया और इसे अपना सामाजिक कर्तव्य माना।
विश्वनाथ पाटेकर यानी नाना पाटेकर की दिनचर्या और सोच पूरी तरह जमीन से जुड़ी हुई है। उन्हें बड़ी पार्टियों और लाइमलाइट के स्थान पर शांत माहौल में समय बिताना पसंद है। यह सादगी और सेवा भाव सिर्फ उन तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका पूरा परिवार इसी सोच पर आगे बढ़ रहा है।
उनका बेटा इस समय जम्मू-कश्मीर के दूरदराज इलाकों में ऐसे छोटे बच्चों की मदद में जुटा है जो सुनने की समस्या के कारण बोल नहीं पाते। सही समय पर चिकित्सीय सहायता और आवश्यक ऑपरेशन उपलब्ध कराकर उन बच्चों के जीवन को नया उजाला देने की कोशिश की जा रही है। नाना पाटेकर का पूरा जीवन यही मैसेज देता है कि असली पहचान सिर्फ सफलता या नाम से नहीं बनती, बल्कि समाज के प्रति आपकी सोच और निस्वार्थ कर्मों से तय होती है।