Nana Patekar NAAM Foundation initiatives: भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली और सशक्त एक्टर्स में शामिल नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे। 75 साल की उम्र में गोवा में अंतिम सांस लेने के बाद पुणे के डोनजे गांव में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार पूरा हुआ।
उनके जाने से न केवल फिल्म इंडस्ट्री बल्कि उन हजारों-लाखों लोगों में शोक की लहर है, जिनकी जिंदगी नाना की सामाजिक पहलों के जरिए बदली थी। उनके निधन के फौरन बाद उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने पिता के विचारों, सामाजिक कार्यों और आगे की योजनाओं पर अपनी बात रखी है।
अंतिम संस्कार के बाद मल्हार पाटेकर ने बताया कि नाना साहब ने अपने जिंदगी के आखिरी पड़ाव में ही सभी लोगों को उनकी विशिष्ट जिम्मेदारियां सौंप दी थीं। उन्होंने कहा कि नाना साहब अपने सामाजिक और मानवीय कार्यों के बदौलत हमेशा लोगों के दिलों में अमर रहेंगे।
नाना की सोच हमेशा मानवता की बेहतरी और दुनिया को सही रास्ता दिखाने की थी। उन्होंने जाने से पहले यह सुनिश्चित कर दिया था कि जो सामाजिक अभियान उन्होंने शुरू किए थे, वे आगे भी बिना किसी रुकावट के लगातार चलते रहें।
नाना पाटेकर केवल बड़े पर्दे तक सीमित नहीं थे, बल्कि उन्होंने समाज के सबसे गरीब और जरूरतमंद तबके के लिए लगातार काम किया। इंसान के जीवन में पानी, अच्छी शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य की अहमियत को समझते हुए उन्होंने 'नाम फाउंडेशन' के बैनर तले बड़ी पहल शुरू की थी।
महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त इलाकों से लेकर कश्मीर और उत्तर भारत के दूरदराज क्षेत्रों तक उनकी फाउंडेशन जल संरक्षण, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर एक्टिव थी। उनके बेटे ने साफ किया कि इन सभी योजनाओं को पूरे समर्पण के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।
मल्हार पाटेकर ने राज्य के मुख्यमंत्री के साथ मराठवाड़ा और अन्य क्षेत्रों में चल रहे जल संरक्षण के कामों पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री ने नाम फाउंडेशन की सराहना करते हुए कहा कि संस्था मुख्य कार्यकारी अधिकारी गणेश थोरात के मार्गदर्शन में बेहतरीन काम कर रही है।
सरकार ने भरोसा दिलाया है कि नाना साहब जिन सामाजिक संकल्पों को और मजबूती से लागू करना चाहते थे, उन्हें हर हाल में साकार किया जाएगा। राज्य सरकार और फाउंडेशन मिलकर नाना के इस मानवतावादी मिशन को देश भर में जारी रखेंगे।