सुधीर मिश्रा और मनोज बाजपेयी  (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
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मनोज बाजपेयी पहली बार बनेंगे महात्मा गांधी, सुधीर मिश्रा की फिल्म बताएगी आजादी के समय की अनकही कहानी

Manoj Bajpayee Upcoming Film: मनोज बाजपेयी पहली बार महात्मा गांधी का किरदार निभाने जा रहे हैं। सुधीर मिश्रा की इस अनटाइटल्ड फिल्म की कहानी आजादी के दौर में गांधीजी के जीवन के 21 दिनों पर आधारित होगी।

सोनाली झा

Manoj Bajpayee Mahatma Gandhi Biopic: बॉलीवुड के बेहतरीन अभिनेताओं में शुमार मनोज बाजपेयी अपने करियर में पहली बार महात्मा गांधी का किरदार निभाने जा रहे हैं। फिल्ममेकर सुधीर मिश्रा ने अपनी आने वाली फिल्म को लेकर यह जानकारी साझा की है। फिलहाल फिल्म का आधिकारिक टाइटल तय नहीं हुआ है, लेकिन इसकी कहानी भारत की आजादी के दौर के एक बेहद महत्वपूर्ण और कम चर्चित अध्याय पर आधारित होगी।

फिल्म में महात्मा गांधी के जीवन के 21 दिनों को केंद्र में रखकर उस समय की घटनाओं और उनके व्यक्तिगत संघर्षों को दिखाया जाएगा। सुधीर मिश्रा की यह फिल्म भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के उस दौर को दिखाएगी, जब देश आजादी की ओर तेजी से बढ़ रहा था। निर्देशक के मुताबिक, कहानी सिर्फ इतिहास की बड़ी घटनाओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन घटनाओं के पीछे छिपे गांधीजी के विचारों और उनके मानवीय पक्ष को भी सामने लाने की कोशिश करेगी।

आजादी के दौर के 21 दिनों की कहानी

सुधीर मिश्रा ने बताया कि यह कहानी इतिहास के एक जरूरी, लेकिन कम चर्चित अध्याय पर ध्यान केंद्रित करती है। फिल्म में गांधीजी के जीवन के उन 21 दिनों को दिखाया जाएगा, जो उस समय के राजनीतिक और सामाजिक माहौल को समझने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। फिल्म की सबसे बड़ी खासियत मनोज बाजपेयी का महात्मा गांधी के रूप में नजर आना है।

मनोज बाजपेयी का करियर

मनोज बाजपेयी ने अपने लंबे फिल्मी करियर में कई चुनौतीपूर्ण और अलग-अलग तरह के किरदार निभाए हैं, लेकिन यह भूमिका उनके लिए बिल्कुल अलग होगी। फिल्म में गांधीजी को सिर्फ एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व के तौर पर नहीं, बल्कि एक इंसान के रूप में भी दिखाने की कोशिश की जाएगी। उनके फैसलों, सोच और उस दौर में खुद को नए सिरे से समझने की प्रक्रिया को कहानी का अहम हिस्सा बनाया गया है।

दिल्ली से दूर जाने का फैसला क्यों लिया था

सुधीर मिश्रा के मुताबिक, उस समय दिल्ली सत्ता और राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन रही थी। ऐसे दौर में गांधीजी ने वहां से दूर जाने का अप्रत्याशित फैसला लिया था। निर्देशक का कहना है कि यह कदम पीछे हटना नहीं था, बल्कि गांधीजी के लिए खुद को एक नए रूप में देखने और समझने की प्रक्रिया थी। फिल्म इसी फैसले के पीछे की सोच और परिस्थितियों को करीब से समझने की कोशिश करेगी।

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