Ranbir Kapoor And Uncle Kunal Kapoor (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)  
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शाकाहारी लोग नस्लवादी होते हैं! रणबीर कपूर के अंकल कुणाल कपूर ने दिया अजीब सा तर्क

Kunal Kapoor: शशि कपूर के बेटे कुणाल कपूर ने पूजा भट्ट के पॉडकास्ट पर कहा कि शाकाहारी लोग नस्लवादी होते हैं, क्योंकि वे अपने घर में मांसाहारी भोजन परोसने से इनकार करते हैं।

अनिल सिंह

Kunal Kapoor On Vegetarian: दिग्गज कपूर परिवार से ताल्लुक रखने वाले अभिनेता और फिल्ममेकर कुणाल कपूर (दिवंगत अभिनेता शशि कपूर के बेटे) ने हाल ही में अपने एक बेबाक बयान से सनसनी फैला दी है। कुणाल कपूर ने खुले तौर पर कहा है कि वह शाकाहारी (Vegetarians) लोगों को नस्लवादी (Racist) मानते हैं और उन्हें तिरस्कार की नजर से देखते हैं।

उन्होंने यह अजीबोगरीब तर्क अभिनेत्री पूजा भट्ट के पॉडकास्ट पर बातचीत के दौरान दिया। बता दें कि पूजा भट्ट, आलिया भट्ट की बड़ी बहन हैं, जिनकी शादी कुणाल कपूर के भतीजे रणबीर कपूर से हुई है।

मांसाहारी भोजन न परोसने पर दिया तर्क

कुणाल कपूर ने अपने इस विवादास्पद बयान के पीछे का तर्क खाने-पीने की आदतों से जोड़ा। उनका कहना था कि जब वह अपने घर आने वाले शाकाहारी मेहमानों को शाकाहारी खाना परोसते हैं, तो शाकाहारी लोग अपने घर में उन्हें मांसाहारी खाना क्यों नहीं परोसते।

पूजा भट्ट द्वारा शाकाहारी फ्रांसीसी खाने का जिक्र किए जाने पर कुणाल ने उन्हें सीधे तौर पर पूछा, "तो क्या मैं नस्लवादी हूं?"

तर्क को सुनकर पूजा भट्ट हँसने लगीं

इस पर कुणाल कपूर ने जवाब दिया, "हां, तुम हो, क्योंकि तुम मुझे मांसाहारी खाने से इनकार करती हो। मेरे यहां शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह का खाना मिलता है। लेकिन जब मैं किसी शाकाहारी के घर जाता हूं, तो वो मुझे मांसाहारी खाना नहीं देता। लेकिन अपने घर में, मैं उसे दावत देता हूं। मैं उसे शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह का खाना देता हूं।" इस तर्क को सुनकर पूजा भट्ट हँसने लगीं।

कपूर परिवार और खाने का शौक

कुणाल कपूर का यह बयान उस परिवार से आता है जो खाने-पीने का बहुत शौकीन माना जाता है। कपूर परिवार का खासकर पाया (जानवरों के पैरों से बना सूप) के प्रति प्यार जगजाहिर है। नेटफ्लिक्स इंडिया पर आई डॉक्यूमेंट्री 'डाइनिंग विद द कपूर' में भी उनके भतीजे अरमान जैन ने इस पारिवारिक शौक को दिखाया था।

इंडो-अमेरिकन फिल्म से की थी करियर की शुरुआत

कुणाल कपूर ने अपने करियर की शुरुआत 1972 में आई इंडो-अमेरिकन फिल्म 'सिद्धार्थ' से की थी। उन्होंने श्याम बेनेगल की 'जुनून' और गोविंद निहलानी की 'विजेता' जैसी फिल्मों में भी काम किया है।

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