KSBKBT Spoiler: छोटे पर्दे का सबसे फेमस शो 'क्यूंकी सास भी कभी बहू थी' की कहानी इन दिनों हाई-वोल्टेज ड्रामे से गुजर रही है। वीरानी परिवार के अंदर चल रही आपसी रंजिश और गद्दी की लड़ाई अब एक ऐसे मोड़ पर आ गई है, जहां रिश्तों की मर्यादा दांव पर लग गई है। हाल ही के एपिसोड में कुछ ऐसा हुआ है जिसने न केवल पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि फैंस के भी दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया है।
'क्यूंकी सास भी कभी बहू थी' की कहानी के नए मोड़ की शुरुआत तुलसी विरानी के एक सराहनीय प्रयास से होती है। तुलसी विरानी अपनी बहू वैष्णवी को उसके पति पार्थ के बर्ताव और मिजाज के बारे में गहराई से समझाती हैं। तुलसी बड़े ही अच्छे से स्वीकार करती हैं कि पार्थ बचपन से ही बेहद प्यार और ऐशो-आराम के माहौल में पला है। तुलसी विरानी की बात वैष्णवी के दिल को छू जाती है और वह मुस्कुराकर पार्थ को मना लेती है।
'क्यूंकी सास भी कभी बहू थी' में तुलसी के सामने पार्थ रोते हुए अपना सारा दर्द उड़ेल देता है। पार्थ कहता है कि रेओ को पावर ऑफ अटॉर्नी मिलने की वजह से नंदिनी चाची घर में कितनी घुटन और बेबसी महसूस कर रही हैं। अपनी इस लाचारी पर अफसोस जताते हुए पार्थ यहां तक कह देता है कि काश वह अंश की मौत के समय वहां मौजूद होता। तुलसी पार्थ से कहती हैं कि उस वक्त वहां वे खुद मौजूद थीं और अंश को किसी और ने नहीं बल्कि उन्होंने खुद अपने हाथों से मारा था। तुलसी पार्थ से आगे कहती है, कि यह बेकाबू गुस्सा और नफरत सिर्फ वैष्णवी के साथ उसके खूबसूरत रिश्ते को पूरी तरह बर्बाद कर देगी, इसलिए उसे इस समय संयम से काम लेना चाहिए।
'क्यूंकी सास भी कभी बहू थी' में जब तुलसी विरानी गौतम को हमेशा के लिए बाहर जाने से रोक रही होती हैं, ठीक उसी पल वहां करण की एंट्री हो जाती है। करण को इतने समय बाद अचानक अपने सामने पाकर पार्थ, नंदिनी, समैरा और रेओ के चेहरों पर एक पल के लिए खुशी की लहर दौड़ जाती है। सीरियल में आगे करण बिना किसी लाग-लपेट के साफ-साफ कहता है कि रेओ का नया कारोबार का आइडिया कंपनी के बेहतर भविष्य के लिए बहुत शानदार है, इसलिए रियो इस जिम्मेदारी का पूरा हकदार है।
'क्यूंकी सास भी कभी बहू थी' सीरियल में करण की मुंह से रेओ की तारीफ सुनते ही नंदिनी का पारा चढ़ जाता है। गुस्से से लाल हुई नंदिनी विरानी यहीं नहीं रुकतीं, बल्कि वे पूरे विरानी परिवार के सामने एक ऐसा खौफनाक सच बयां कर देती हैं जिससे वहां मौजूद हर सदस्य के पैरों तले जमीन खिसक जाती है। वे चिल्लाते हुए कहती हैं कि यह पूरा आलीशान शांति निकेतन और वीरानी खानदान सिर्फ और सिर्फ इसलिए शान से चल रहा है क्योंकि करण हर महीने अपनी जेब से मोटी रकम भेजता है और कारोबार में होने वाले भारी नुकसान की भरपाई करता है।