अगस्त्य नंदा और वरुण धवन (सोर्स: सोशल मीडिया) 
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Ikkis के लिए अगस्त्य नंदा नहीं थे पहली पसंद, वरुण धवन को किया गया रिप्लेस, डायरेक्टर ने खोला राज

Agastya Nanda Film: इक्कीस के लिए अगस्त्य नंदा पहली पसंद नहीं थे। निर्देशक श्रीराम राघवन ने खुलासा किया कि पहले वरुण धवन को कास्ट किया गया था, लेकिन उम्र को ध्यान में रखते हुए अगस्त्य को चुना गया।

सोनाली झा

Agastya Nanda replaced Varun Dhawan: अमिताभ बच्चन के नाती अगस्त्य नंदा अपनी पहली थिएट्रिकल रिलीज इक्कीस के साथ बड़े पर्दे पर कदम रखने जा रहे हैं। यह फिल्म 1 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होगी और इसे लेकर दर्शकों में खासा उत्साह है। हालांकि, हाल ही में सामने आए एक खुलासे ने सबका ध्यान खींचा है कि इस फिल्म के लिए अगस्त्य नंदा मेकर्स की पहली पसंद नहीं थे। शुरुआत में इस वॉर ड्रामा के लिए वरुण धवन को कास्ट किया गया था।

फिल्म के निर्देशक श्रीराम राघवन ने हाल ही में एक इंटरव्यू में इस बदलाव के पीछे की असली वजह बताई। उन्होंने कहा कि जब वरुण धवन को कहानी सुनाई गई थी, तो वह इस प्रोजेक्ट को लेकर काफी उत्साहित थे और फिल्म की शुरुआती स्क्रिप्टिंग भी उनके साथ शुरू हुई थी। लेकिन इसी दौरान कोविड-19 महामारी आ गई, जिसके चलते फिल्म की प्लानिंग और टाइमलाइन में बड़ा बदलाव करना पड़ा।

इक्कीस की कहानी

श्रीराम राघवन के मुताबिक, स्क्रिप्ट पर दोबारा काम करते समय उन्हें यह एहसास हुआ कि कहानी में उम्र एक बेहद अहम फैक्टर है। इक्कीस भारतीय सेना के वीर शहीद अरुण खेत्रपाल के जीवन पर आधारित है, जिन्होंने मात्र 21 साल की उम्र में परमवीर चक्र प्राप्त किया था। निर्देशक ने बताया कि फिल्म के कई सीन में अरुण खेत्रपाल को 19 साल के युवा के रूप में दिखाया गया है, और ऐसे किरदार के लिए एक ऐसे चेहरे की जरूरत थी, जो उम्र और मासूमियत दोनों में फिट बैठे।

श्रीराम राघवन ने कही ये बात

श्रीराम राघवन ने साफ कहा कि अब वह दौर नहीं रहा जब 40 साल का अभिनेता किशोर उम्र के किरदार निभा सके। इक्कीस की कहानी को प्रामाणिक बनाने के लिए उन्हें एक नए और युवा कलाकार की तलाश थी। ऐसे में अगस्त्य नंदा एक स्वाभाविक विकल्प बनकर सामने आए, क्योंकि कास्टिंग के समय उनकी उम्र करीब 21 साल थी।

लड़के के आदमी बनने की कहानी है इक्कीस

डायरेक्टर ने आगे कहा कि इक्कीस सिर्फ एक वॉर फिल्म नहीं, बल्कि एक लड़के के आदमी बनने की कहानी है। उन्होंने बताया कि अरुण खेत्रपाल ने अपने जीवन के आखिरी दो घंटों में जो साहस दिखाया, उसी ने उन्हें एक सच्चा नायक बनाया। श्रीराम के मुताबिक, वह चाहते थे कि किरदार में सेवा की भावना, मासूमियत और नतीजों को समझने की ईमानदार झलक नजर आए, जो उन्हें अगस्त्य नंदा की आंखों में दिखी।

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