धड़क 2 की बॉक्स ऑफिस पर दमदार शुरुआत 
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Dhadak 2 Collection: धड़क 2 की बॉक्स ऑफिस पर दमदार शुरुआत, जानें फिल्म की कमाई

Dhadak 2 1st Day Collection: धड़क 2 ने पहले दिन 4.31 करोड़ रुपये की दमदार कमाई की है। सिद्धांत चतुर्वेदी और तृप्ति डिमरी की जोड़ी वाली यह फिल्म सामाजिक भेदभाव और सच्चे प्रेम पर आधारित है।

सोनाली झा

Dhadak 2 Box Office Collection: सिद्धांत चतुर्वेदी और तृप्ति डिमरी स्टारर फिल्म ‘धड़क 2’ ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार शुरुआत की है। सामाजिक भेदभाव और सच्चे प्रेम पर आधारित इस संवेदनशील फिल्म ने पहले ही दिन 4.31 करोड़ रुपये की कमाई करके इंडस्ट्री का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। निर्देशिका शाज़िया इक़बाल की यह फिल्म सिर्फ एक रोमांटिक ड्रामा नहीं है, बल्कि इसमें जातिगत असमानता, सामाजिक भेदभाव और प्यार की सच्चाई को मजबूती से दिखाया गया है।

फिल्म की कहानी और संदेश को क्रिटिक्स और दर्शकों दोनों से सराहना मिल रही है। जहां एक ओर बॉक्स ऑफिस पर कई बड़ी फिल्में एक-दूसरे से टकरा रही हैं, वहीं 'धड़क 2' ने अपनी अलग पहचान बनाकर सभी को चौंका दिया है। फिल्म को मिल रही पॉजिटिव माउथ पब्लिसिटी और सोशल मीडिया पर मजबूत वर्ड ऑफ माउथ इसे सप्ताहांत पर और बेहतर प्रदर्शन की दिशा में ले जा रहे हैं।

सिद्धांत और तृप्ति की केमिस्ट्री

ट्रेड एनालिस्ट्स का मानना है कि सिद्धांत और तृप्ति की केमिस्ट्री, गंभीर सामाजिक मुद्दे और शानदार निर्देशन इस फिल्म की सफलता के बड़े कारण हैं। कई सिनेमाघरों में वीकेंड के लिए एडवांस बुकिंग तेज़ हो चुकी है। अब देखना यह है कि यह फिल्म अपने पहले हफ्ते में 10 करोड़ से ऊपर की कमाई कर पाती है या नहीं। फिलहाल, शुरुआती आंकड़े फिल्म की स्थिर ग्रोथ का संकेत दे रहे हैं और इसे एक क्रिटिकली और कमर्शियली सक्सेसफुल फिल्म बनने का दावा किया जा रहा है।

धड़क 2 की कहानी

धड़क 2 की शुरुआत भोपाल के भीम नगर में रहने वाले नीलेश यानी सिद्धांत चतुर्वेदी से होती है, जो अपनी मां का सपना पूरा करने के लिए नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में दाखिला लेता है। एक शादी में ढोल बजाते हुए उसकी मुलाकात होती है विधि यानी तृप्ति डिमरी से, जो एक उच्च जाति से ताल्लुक रखती है। विधि एक करुणामयी लड़की है, जो जाति से ऊपर उठकर नीलेश को देखती है। लेकिन वहीं, उसके परिवार में कुछ लोग जातिगत भेदभाव के कट्टर समर्थक हैं।

जातिगत भेदभाव पर आधारित है फिल्म

नीलेश को अपने पालतू कुत्ते की हत्या से लेकर मां की बेइज्जती तक सबका सामना करना पड़ता है। वह सोचता है कि कानून की पढ़ाई करके उसकी जिंदगी बेहतर हो जाएगी, लेकिन असल संघर्ष तो कॉलेज पहुंचने के बाद शुरू होता है। फिल्म में सौरभ सचदेवा एक निर्दयी व्यक्ति की भूमिका में हैं, जो अनुसूचित जाति के लोगों को कीट की तरह समझता है और उनका कत्ल करना सामान्य मानता है।

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