सुवेंदु अधिकारी और ममता बनर्जी, फोटो- नवभारत 
विधानसभा चुनाव 2026

ममता बनर्जी का ओवर कॉन्फिडेंस फेल, अमित शाह का 'डबल सीट' फॉर्मूला सफल, क्या बंगाल में अंत की ओर है टीएमसी?

West Bengal Election Result 2026 के घोषित नतीजों में भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके ही गढ़ भवानीपुर में हरा दिया।

प्रतीक पाण्डेय

Mamata Banerjee Defeat Bhabanipur: पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब भाजपा ने प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता की ओर कदम बढ़ाए। इस जीत के सबसे बड़े नायक शुभेंदु अधिकारी रहे, जिन्होंने न केवल भवानीपुर में ममता बनर्जी को हराया, बल्कि नंदीग्राम सीट पर भी अपनी जीत का परचम लहराया।

शुभेंदु अधिकारी मूल रूप से केवल नंदीग्राम से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें दो सीटों से लड़ाने का रणनीतिक फॉर्मूला दिया था। शाह ने अधिकारी से कहा था कि उन्हें न केवल नंदीग्राम जीतना है, बल्कि 'ममता के घर में जाकर उन्हें हराना है'। भवानीपुर में मुकाबला बेहद रोमांचक रहा; एक समय ममता बनर्जी 17,000 वोटों से आगे चल रही थीं, लेकिन अंततः शुभेंदु अधिकारी ने वापसी की और 73,917 वोट हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि बनर्जी को 58,812 वोट मिले।

नंदीग्राम में भी 'टर्बनेटर' का जादू

अधिकारी ने नंदीग्राम सीट पर अपने पूर्व करीबी और टीएमसी प्रत्याशी पवित्र कर को 9,000 से अधिक वोटों से शिकस्त दी। यहाँ अधिकारी ने 1,27,301 वोट प्राप्त किए। नंदीग्राम और भवानीपुर, दोनों ही सीटों पर कांग्रेस और लेफ्ट की हालत बेहद खराब रही, जहां कांग्रेस प्रत्याशी क्रमशः चौथे और पांचवें स्थान पर रहे।

ममता के राजनीतिक करियर के अंत का संकेत: सुवेंदु

जीत के बाद शुभेंदु अधिकारी ने इसे एक 'निर्णायक राजनीतिक क्षण' और 'हिंदुत्व की जीत' करार दिया। उन्होंने दावा किया कि यह परिणाम ममता बनर्जी के राजनीतिक करियर के अंत का संकेत है। अधिकारी के अनुसार, उन्हें न केवल पारंपरिक भाजपा समर्थकों का साथ मिला, बल्कि वामपंथी मतदाताओं के एक बड़े वर्ग ने भी टीएमसी विरोधी वोटों को एकजुट करने के लिए उनका समर्थन किया।

ममता बनर्जी का अपने ही गढ़ में हारना उनके नेतृत्व और लोकप्रियता के लिए एक बड़ा धक्का माना जा रहा है। वहीं शुभेंदु अधिकारी की जीत और भाजपा का बहुमत की ओर बढ़ना यह दर्शाता है कि राज्य में सत्ता विरोधी लहर काफी मजबूत थी। अधिकारी ने इसे 'हिंदुत्व की जीत' करार दिया है, जो यह संकेत देता है कि तृणमूल कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक इस बार खिसक गया है।

क्या यह वाकई अंत है?

ऐतिहासिक रूप से, कई बड़े राजनेताओं ने भारी हार के बाद वापसी की है। हार के बाद पार्टी अपनी रणनीतियों और नेतृत्व पर मंथन करती है। सत्ता से बाहर होने पर ममता बनर्जी एक आक्रामक विपक्ष की भूमिका निभाकर फिर से जनता का विश्वास जीतने की कोशिश कर सकती हैं। सीटों के नुकसान के बावजूद, TMC को मिले कुल वोट प्रतिशत को देखना महत्वपूर्ण होगा। भले ही ममता को सीटें नहीं मिली हों, लेकिन वोट प्रतिशत अच्छा रहा है।

17 दिग्गजों को झेलनी पड़ी हार

पूरे राज्य के नतीजों पर गौर करें तो पश्चिम बंगाल में भाजपा की प्रचंड लहर देखी गई, जिसमें ममता बनर्जी सहित 17 दिग्गज नेताओं को हार का सामना करना पड़ा। हालांकि भाजपा और टीएमसी के बीच वोट शेयर का अंतर केवल 5% रहा, लेकिन सीटों के मामले में भाजपा ने ढाई गुना से ज्यादा का अंतर पैदा कर दिया। नतीजों के बाद राज्य के कई जिलों से टीएमसी दफ्तरों में तोड़फोड़ की खबरें भी सामने आई हैं, जिसके बाद सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

रची जा रही साजिश...हामिद अंसारी के हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता वाले बयान पर भड़के मौलाना, लगाए गंभीर आरोप

दिया जलाने के लिए पैसा, हॉस्टल के लिए क्यों नहीं? राहुल गांधी का PM मोदी से सीधा सवाल

भारत-जापान की वायुसेना के बीच वीर गार्जियन-2026 युद्ध अभ्यास जारी, जोधपुर पहुंचे दोनों देशों के एयर चीफ- VIDEO

मिमिक्री से मनोरंजन होता है…राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम पर MLA राम कदम का बड़ा हमला

पहाड़ों से रेगिस्तान तक भारत-अमेरिका की सेनाओं का ‘युद्ध अभ्यास’, अल्ट्रा लाइट होवित्जर से LIVE फायरिंग