West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण से पहले दक्षिण 24 परगना का फाल्टा निर्वाचन क्षेत्र एक बड़े शक्ति प्रदर्शन का केंद्र बन गया है। उत्तर प्रदेश के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट कहे जाने वाले आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को चुनाव आयोग ने यहां पुलिस ऑब्जर्वर के रूप में तैनात किया है।
आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा और ममता बनर्जी के उम्मीदवार जहांगीर खान के बीच सीधा टकराव देखने को मिल रहा है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब आईपीएस अधिकारी का एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें वे उम्मीदवार के परिवार को सख्त लहजे में चेतावनी देते नजर आए।
दक्षिण 24 परगना के संवेदनशील इलाकों का दौरा कर रहे आईपीएस अजय पाल शर्मा को शिकायत मिली थी कि टीएमसी उम्मीदवार के समर्थक मतदाताओं को धमका रहे हैं। इसके बाद शर्मा सीधे जहांगीर खान के घर पहुंचे और उनके परिजनों से कहा, "उन्हें ठीक से बता दो- हमें बार-बार खबरें मिल रही हैं कि उनके लोग धमकियां दे रहे हैं, हम इस पर कड़ी कार्रवाई करेंगे।" उन्होंने वीडियो में स्पष्ट रूप से कहा कि अगर चुनाव के दौरान कोई गड़बड़ी हुई तो वे 'अच्छे से खबर लेंगे' और तब बाद में पछताने या अफसोस करने का कोई मौका नहीं मिलेगा। गौरतलब है कि अजय पाल शर्मा अपनी सख्त कार्यशैली के कारण 'यूपी के सिंघम' के नाम से मशहूर हैं।
आईपीएस अधिकारी की इस चेतावनी पर टीएमसी प्रत्याशी जहांगीर खान ने एक जनसभा के दौरान फिल्मी अंदाज में पलटवार किया है। खान ने कहा, "पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त, अभी तो खेल शुरू हुआ है।" उन्होंने केंद्रीय सुरक्षा बलों को 'भाजपा का दलाल' करार देते हुए कहा कि वे इन बलों की धमकियों से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया कि यहां की हर महिला 'मां दुर्गा' का रूप है और उन्हें पता है कि 'असुरों' का वध कैसे करना है। खान ने चुनौती देते हुए कहा कि 'खेला' भले ही उन्होंने शुरू किया हो, लेकिन खत्म हम करेंगे।
41 वर्षीय जहांगीर खान फाल्टा से टीएमसी के उम्मीदवार हैं और उनकी कुल संपत्ति करीब 2.1 करोड़ रुपये है। हालांकि उनके खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड दर्ज नहीं है, लेकिन भाजपा ने उन्हें अभिषेक बनर्जी का 'दाहिना हाथ' और एक शक्तिशाली सिंडिकेट का हिस्सा बताया है। बीजेपी का आरोप है कि खान जमीन हड़पने, तस्करी और चुनाव में धांधली जैसे अपराधों में लिप्त गिरोह चलाता है और इसी के दम पर 2024 में उसने धांधली कर 89% वोट हासिल किए थे। टीएमसी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें चुनाव से पहले भ्रम पैदा करने की कोशिश बताया है।
इस पूरे मामले ने अब राष्ट्रीय राजनीति का रूप ले लिया है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि बंगाल में ऑब्जर्वर के नाम पर भाजपा ने अपने 'आजमाए हुए एजेंटों' को भेजा है। उन्होंने चेतावनी दी कि सही समय आने पर इन अधिकारियों के आपराधिक कृत्यों की गहन जांच की जाएगी।
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वहीं टीएमसी ने भी अजय पाल शर्मा की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए उन्हें 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' बताया और आरोप लगाया कि चुनाव आयोग द्वारा ऐसे अधिकारियों की तैनाती मतदाताओं को डराने के लिए की गई है। फिलहाल, फाल्टा में दोनों पक्षों के बीच तनाव चरम पर है और सभी की नजरें 29 अप्रैल को होने वाले मतदान पर टिकी हैं।