वर्धा विधानसभा सीट (डिजाइन फोटो) 
विधानसभा चुनाव 2026

वर्धा विधानसभा सीट: निर्दलीय प्रत्याशी ने पहली बार लगाई कांग्रेस के किले में सेंध, दो बार से बीजेपी लहरा रही परचम

महाराष्ट्र की चुनावी समरबेला में हम भी अपना दायित्व निभाते हुए हर सीट की एक-एक जानकारी आप तक पहुंचाने के काम में लगे हुए हैं। अब तक किस सीट पर कौन जीता? कौन सी किसका गढ़ रही है? वहां के जातीय समीकरण और मुद्दे क्या हैं? इस बार माहौल किसके पक्ष में दिखाई दे रहा है? जैसे सवालों के जवाब आपको इस आर्टिकल में मिल जाएंगे। इस सीरीज में आज हम वर्धा सीट के बारे में बात करेंगे।

अभिषेक सिंह

वर्धा: महाराष्ट्र के चुनावी समर में हर एक पार्टी का उम्मीदवार दो-दो हाथ करने को तैयार है। हर एक सीट मोर्चे की तरह नज़र आ रही है। चुनावों का औपचारिक ऐलान भले ही अभी नहीं हुआ है, लेकिन हर एक मोर्चे के लिए सिपहसालारों की तलाश होने लगी है। वहीं, सैनिक भी सेनापति के पद के लिए पार्टी में दावेदारी पेश करने लगे हैं। लेकिन किस मोर्चे पर कौन यह जिम्मेदारी संभालेगा इसका फैसला पार्टियों के आलाकमान ही करेंगे।

इस चुनावी समरबेला में हम भी अपना दायित्व निभाते हुए हर सीट की एक-एक जानकारी आप तक पहुंचाने के काम में लगे हुए हैं। अब तक किस सीट पर कौन जीता? कौन सी किसका गढ़ रही है? वहां के जातीय समीकरण और मुद्दे क्या हैं? इस बार माहौल किसके पक्ष में दिखाई दे रहा है? जैसे सवालों के जवाब आपको इस आर्टिकल में मिल जाएंगे। इस सीरीज में आज हम वर्धा सीट के बारे में बात करेंगे। तो चलिए शुरू करते हैं।

अतीत के आईने में वर्धा विधानसभा

साल 1972 में वर्धा सीट पर पहली बार चुनाव हुए। इस चुनाव में कांग्रेस ने जो विजय अभियान शुरू किया उसे 1990 में माणिक महादेव सबाने ने निर्दलीय ही रोकने में कामयाबी हासिल की। इसके बाद 1999 और 2004 में फिर से कांग्रेस ने विजयश्री हासिल की। लेकिन साल 2009 के चुनाव में फिर से निर्दलीय उम्मीदवार देशमुख सुरेश बापूराव ने निर्दलीय जीत हासिल की। उसके बाद 2014 और 2019 में बीजेपी ने इस सीट पर कब्जा जमाया है।

कब किसने मारी बाजी?

  • 2019 डॉ. पंकज राजेश भोयर, भाजपा
  • 2014 डॉ. पंकज राजेश भोयर, भाजपा
  • 2009 देशमुख सुरेश बापूराव, निर्दलीय
  • 2004 शेंडे प्रमोद भाऊसाहेब, कांग्रेस
  • 1999 शेंडे प्रमोद भाऊसाहेब, कांग्रेस
  • 1995 शेंडे प्रमोद भाऊसाहेब, कांग्रेस
  • 1990 माणिक महादेव सबाने, निर्दलीय
  • 1985 शेंडे प्रमोद भाऊसाहेब, कांग्रेस
  • 1980 शेंडे प्रमोद भाऊसाहेब, कांग्रेस (आई)
  • 1978 शेंडे प्रमोद भाऊसाहेब, कांग्रेस (आई)
  • 1972 वसंतराव जे कार्लेकर, कांग्रेस

क्या कहते हैं जातीय समीकरण

सामान्य श्रेणी की इस सीट पर कांग्रेस ने कुल 7 बार जीत दर्ज की है। जिसमें 6 बार शेंडे प्रमोद भाऊसाहेब की ही जनता ने जनादेश दिया है। जबकि पहले चुनाव यानी 1972 में वसंतराव जे कार्लेकर ने यहां विजय पताका फहराई थी। बात करें यहां के जातीय आंकड़ों की तो 49 हजार 165 एससी वोटर्स हैं। जो कि कुल वोट का करीब 16 फीसदी हैं। इसके अलावा 9 प्रतिशत के आस-पास आदिवासी वोटर्स भी हैं। 4 फीसदी के करीब मुस्लिम मतदाता भी लोकतंत्र में भागीदारी निभाते हैं।

अबकी बार किसकी नैया पार?

2019 के चुनावी आंकड़ों के मुताबिक इस सीट पर कुल 3 लाख 20 हजार 291 मतदाता हैं। जिसका 62 फीसदी हिस्सा शहरी वोटर्स हैं। शहरी वोटर्स के ज्यादा होने के चलते यहां मुद्दे भी शहर वाले ही रहते हैं। ग्रामीण इलाकों में पानी, सड़क, चिकित्सा और शिक्षा के मुद्दे हावी होते हैं। बात करें इस बार यहां की संभावनाओं के बारे में तो कुछ भी ठीक-ठीक कह पाना मुश्किल है। महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले 5 साल में जो उठा पटक हुई है उसके बाद यह कहना कि किस सीट पर कौन जीतेगा बहुत कठिन है।

हरियाणा में अक्टूबर से शुरू होगा ‘सुधार उत्सव’, नागरिक देंगे सरकारी व्यवस्था सुधारने के सुझाव

आज की ताजा खबर 11 अगस्त LIVE: हंगामे के कारण लोकसभा कल तक के लिए स्थगित, राज्यसभा में चर्चा जारी

मुंह पर पट्टी, मोबाइल टॉर्च...रांची की सड़कों पर छात्रों का अनोखा प्रदर्शन, निकाला 2 किमी लंबा मौन मार्च

धर्म और जीवनसाथी चुनना निजी हक, आगरा धर्मांतरण कांड में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला; पुलिस की कार्रवाई पर उठा सवाल

सड़क से संसद तक JPSC-JSSC पर हंगामा, छात्रों के आंदोलन से रांची में गरमाई सियासत; तस्वीरों में देखें