मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 के लिए सियासी उठापटक जारी है। महायुति और महाविकास अघाड़ी इस चुनावी दंगल में एक दूसरे को चित करने की तैयारी में हैं। लेकिन इस बीच यहां शिवाजी मानखुर्द सीट पर एनसीपी (अजित पवार) से नवाब मलिक की उम्मीदवारी के चलते महायुति में ही दरार आ गई है।
शिवाजी मानखुर्द सीट को लेकर लंबे समय से सस्पेंस बना हुआ था। यह सस्पेंस नामांकन दाखिल होने के आखिरी दिन खत्म हो गया है। यहां एनसीपी के कद्दावर नेता नवाब मलिक को आखिरी वक्त पर पार्टी की उम्मीदवारी मिल गई। लेकिन नवाब मलिक को उम्मीदवारी मिलते ही यहां नया सियासी घमासान छिड़ गया।
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नवाब मलिक एनसीपी (अजित पवार) से आधिकारिक उम्मीदवार घोषित होते ही विपक्षी दल महायुति पर हमलावर हो गए। शिवसेना यूबीटी की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने तो बीजेपी पर तंज कसते हुए यह भी कहा कि अब 'दाउद का दोस्त' आधिकारिक तौर पर भाजपा के गठबंधन से चुनाव लड़ रहा है। अब देशभक्ति का सर्टिफिकेट देने वाले पता नहीं कहां गायब हो गए हैं।
विपक्ष के हमलों से बैकफुट पर आई बीजेपी ने नवाब मलिक या यूं कहें कि एनसीपी से किनारा कर लिया है। शिवाजी मानखुर्द में बीजेपी ने यहां शिवसेना एकनाथ शिंदे गुट के उम्मीदवार सुरेश पाटिल का समर्थन करेगी। और एनसीपी (अजित पवार) के लिए प्रचार नहीं करेगी। आशीष शेलार ने कहा कि हमने दाउद इब्राहिम से जुड़े लोगों पर अपना रुख पहले ही साफ कर रखा है।
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इस पूरे फलसफे पर सियासी जानकारों का मानना है कि महायुति में शामिल एक दल का समर्थन करने और एक दल का समर्थन न करने की बात अजित पवार को खटक सकती है। जो महायुति में दरार का कारण भी बन सकती है। फिलहाल तो महाराष्ट्र में चुनावी मौसम है कोई कभी भी बदल सकता है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि आगे यहां और क्या कुछ होता है।