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विधानसभा चुनाव 2026

पुडुचेरी विधानसभा चुनाव: 'नया गांव' में कांग्रेस छीन पाएगी अपना पुराना किला? जानिए कैसा रहा है इंदिरानगर का रण

Puducherry Assembly Election 2026: पुडुचेरी की वीआईपी सीट इंदिरानगर में 9 अप्रैल को मतदान होना है। कांग्रेस के पुराने गढ़ में अब क्षेत्रीय दलों का दबदबा है, जिससे मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है।

प्रतीक पाण्डेय

Indira Nagar Constituency Seat Profile: बंगाल और तमिलनाडु के चुनावी शोर के बीच दक्षिण भारत का एक छोटा लेकिन बेहद खूबसूरत हिस्सा 'पुडुचेरी' भी अपनी नई सरकार चुनने की तैयारी में है। 9 अप्रैल 2026 को यहां की चर्चित इंदिरानगर विधानसभा सीट पर जनता अपने मत का प्रयोग करेगी।

फ्रांसीसी वास्तुकला और समुद्री तटों के लिए मशहूर इस केंद्र-शासित प्रदेश की सियासत उतनी ही पेचीदा है, जितनी इसकी गलियां। कभी कांग्रेस का मजबूत किला रही यह सीट आज क्षेत्रीय दलों की ताकत का गवाह बन चुकी है। यहां का चुनाव केवल राजनीतिक दलों की जंग नहीं, बल्कि विकास और साख की लड़ाई है।

300 साल का फ्रांसीसी इतिहास और 'नया गांव' बनने की कहानी

पुडुचेरी, जिसे कभी पोंडीचेरी के नाम से जाना जाता था, आज भी अपने भीतर 300 सालों के फ्रांसीसी प्रभाव को समेटे हुए है। 2006 में इसका आधिकारिक रूप से नाम बदलकर 'पुडुचेरी' कर दिया गया, जिसका स्थानीय तमिल भाषा में अर्थ होता है 'नया गांव'। यह शहर न केवल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है, बल्कि आध्यात्मिक और धार्मिक रूप से भी बहुत गहरा महत्व रखता है। यहां की इंदिरा नगर सीट का नाम पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नाम पर रखा गया बताया जाता है, जो इस इलाके की ऐतिहासिक राजनीतिक जड़ों को दर्शाता है। इस सीट का शहरी चरित्र और यहां की उच्च साक्षरता दर इसे पुडुचेरी की सबसे जागरूक सीटों में से एक बनाती है।

कांग्रेस का पुराना गढ़ जहां अब क्षेत्रीय दलों का है बोलबाला

इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि इंदिरा नगर लंबे समय तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अभेद्य दुर्ग रहा है। लेकिन बदलते समय के साथ यहां की राजनीतिक हवा भी बदली और क्षेत्रीय दलों ने अपनी जड़ें जमाना शुरू कर दिया। शहरीकरण और मध्यम वर्ग की बढ़ती आबादी ने यहां के चुनावी मुद्दों को पूरी तरह बदल दिया है। आज यहां के जागरूक मतदाता केवल पार्टी के नाम पर नहीं, बल्कि उम्मीदवार के व्यक्तित्व और स्थानीय विकास के आधार पर वोट देते हैं। क्षेत्रीय दलों के बढ़ते प्रभाव ने कांग्रेस के लिए यहां अपनी जमीन बचाना एक बड़ी चुनौती बना दिया है।

2021 के चुनावी नतीजे कैसे थे

अगर हम पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2021 के आंकड़ों पर गौर करें, तो एआईएनआरसी के वी. अरुमुगम उर्फ एकेडी ने यहां एकतरफा जीत दर्ज की थी। उन्होंने 21,841 वोट हासिल किए, जो कुल मतदान का लगभग 74.8 प्रतिशत था। कांग्रेस के एम. कन्नन को महज 3,310 वोटों से संतोष करना पड़ा, जिससे जीत का अंतर 18,531 वोटों का रहा।

इससे पहले 2016 में भी एआईएनआरसी के एन. रंगासामी ने यहां जीत का परचम लहराया था, हालांकि तब कांग्रेस के साथ मुकाबला काफी कड़ा था और जीत का अंतर केवल 3,404 वोटों का था। यह आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक दशक में यहाँ क्षेत्रीय दलों की पकड़ कितनी मजबूत हुई है। अब सवाल यह है कि क्या 1 अप्रैल 2026 को होने वाले चुनाव में कांग्रेस अपनी खोई हुई साख वापस पा सकेगी? इंदिरा नगर की जनता एक बार फिर विकास और व्यक्तित्व के तराजू पर अपने उम्मीदवारों को तौलेगी। चुनावी तारीखों के एलान के साथ ही 'नये गांव' की फिजाओं में सियासी सरगर्मी बढ़ गई है।

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