मोहन भागवत (फोटो-सोशल मीडिया) 
दिल्ली

भागवत सहित RSS के नेताओं की मुस्लिम धर्मगुरुओं के साथ बैठक, चुनाव पर होगा असर?

Mohan Bhagwat: दिल्ली मुस्लिम धर्म गुरुओं के साथ संघ की एक बैठक चल रही है। इस बैठक में संघ प्रमुख भागवत सहित RSS के 50 से ज्यादा नेता मौजूद हैं। इस बैठक को बिहार चुनाव जोड़ कर देखा जा रहा है।

Saurabh Pal

RSS Meeting With Muslim religious leaders: राष्ट्रीय स्वयं सेवक (RSS) की टॉप लीडरशिप दिल्ली के हरियाणा भवन में मुस्लिम धर्मगुरुओं के साथ एक बैठक कर रहा है। इस बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत, महासचिव दत्तात्रेय होसबाले, सह सरकार्यवाहक कृष्ण गोपाल, अल्पसंख्यक विंग के प्रमुख इंद्रेश कुमार और संगठन मंत्री बीएल संतोष जैसे 50 से अधिक RSS के नेता शामिल हैं। वहीं दूसरी तरफ से मुस्लिम धर्मगुरुओं के अलावा रिसर्च स्कॉलर, मौलाना व इस्लामिक इंटलैक्चुअल बैठक में मौजूद हैं।

RSS की टॉप लीडरशिप की धार्मिक रूप से मुस्लिमों का नेतृत्व करने वालों के साथ मीटिंग काफी अहम मानी जा रही है। हालांकि यह मीटिंग संघ की आम छवि से हटकर है, लेकिन ऐसा पहली बार नहीं है जब RSS की लीडरशिप ने मुस्लिम धर्मगुरुओं या मौलानाओं से मुलाकात की है। ये अलग बात है कि इस बैठक के सामाजिक और सियासी दोनों मायने निकाले जा रहे हैं।

बैठक का चुनाव पर पड़ेगा असर?

RSS और मुस्लिम धर्मगुरुओं की पिछली बैठकों के मद्देनजर कयास लगाए जा रहे हैं कि इस बैठक में सामाजिक मुद्दों पर चर्चा होगी। इसमें सबसे अहम मुद्दा घुसपैठ का हो सकता है। साथ ही बिहार में चल रहे वोटर लिस्ट रिवीजन पर भी बातचीत हो सकती है। क्योंकि मुस्लिमों में इस बात का डर है कि वोटर लिस्ट से उनके नाम काट दिए जाएंगे। वहीं राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस बैठक के सियासी मायने भी हैं। क्योंकि वक्फ कानून में संशोधन से मुस्लिम समुदाय में सरकार के प्रति खासी नाराजगी है। इस बैठक को नाराजगी दूर करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। मुसलमानों की नाराजगी बिहार चुनाव में सरकार को भारी पड़ने वाली है। ऐसा बुद्धिजीवियों का मानना है।

मुस्लिमों को डरने की जरूरत नहींः संघ प्रमुख

इससे पहले 2021 में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मुस्लिम विद्वानों के कार्यक्रम में संबोधन दिया था। उन्होंने एकता का संदेश देते हुए कहा था कि भारत में रहने वाले हिंदूओं और मुस्लिमों के पूर्वज एक ही हैं। मुस्लिमों को इस देश में डरने की जरूरत नहीं है और ना ही मुस्लिम वर्चस्व की सोच रखनी चाहिए। हमें भारत के वर्चस्व की सोच रखनी होगी।

2022 की बैठक में हिजाब व ज्ञानवापी पर हुई थी चर्चा

ऐसी ही एक मीटिंग संघ की लीडरशिप और मुस्लिम धर्मगुरुओं की सितंबर 2022 में हुई थी। उस समय ज्ञानवापी मस्जिद विवाद और कर्नाटक से निकला हिजाब विवाद काफी चर्चा में था। इस बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत और मुस्लिम धर्मगुरुओं की ज्ञानवापी, हिजाब विवाद जैसे तमाम मुद्दों पर चर्चा हुई थी।

RSS की मीटिंग मुस्लिम धर्मगुरुओं से कौन करवाता है?

बता दें कि संघ की एक सहयोगी संस्था मुस्लिम राष्ट्रीय मंच है। इसी संस्था के जरिए संघ का नेतृत्व मुस्लिम मौलानाओं, धर्मगुरुओं व समुदाय के अन्य नेताओं से संवाद स्थापित करता है। 2023 में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने कहा था कि वह एक राष्ट्र एक झंडा और एक राष्ट्र के लिए पूरे देश में अभियान चलाएगा। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की यह लाइन संघ के नारे ' एक देश, एक विधान, एक निशान से ली गई थी।

H-1B वीजा पर जेडी वेंस की टिप्पणी पर भारत सख्त, MEA ने बंधुआ मजदूर बयान को बताया आपत्तिजनक

जेवर एयरपोर्ट का नाम होगा नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, सीएम योगी ने किया ऐलान, कैबिनेट से मिली मंजूरी

Ratan Tata Death Anniversary: नैनो से लेकर एयर इंडिया तक, रतन के वो बड़े फैसले जिन्होंने बदली भारत की तस्वीर

Bypoll Results 2026 Live: पुडुचेरी में जीती AINRC, तमिलनाडु में TVK-AIADMK में टक्कर, बंगाल-असम में BJP आगे

Puducherry Bypoll Result: थट्टानचावाडी सीट पर AINRC के अशोक आनंद जीते, कांग्रेस को 8,482 वोटों से दी मात