जामिया में 12 अक्टूबर से छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग पर प्रदर्शन जारी।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी को पुलिस ने हिरासत में लिया।
दीवारों पर विवादित नारे मिलने के बाद प्रशासन ने जांच और कार्रवाई की बात कही।
Jamia Protest: राजधानी दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर जारी प्रदर्शन में अब विपक्षी नेताओं की भी एंट्री हो गई है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी छात्रों के समर्थन में पहुंचे। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया।
जामिया मिलिया इस्लामिया में 12 अक्टूबर से छात्र संघ चुनाव की बहाली और चुनाव कार्यक्रम घोषित करने की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी है। छात्रों की मांग है कि विश्वविद्यालय प्रशासन जल्द से जल्द चुनाव की तारीखों का ऐलान करे।
छात्र संगठनों के मुताबिक, विश्वविद्यालय में छात्र संघ 2006 में भंग कर दिया गया था। अब छात्र एक बार फिर निर्वाचित छात्र प्रतिनिधित्व बहाल करने की मांग कर रहे हैं। इस बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र संघ का संविधान तैयार करने और छात्रों की मांगों पर विचार करने के लिए कमेटी गठित की है। हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्र तत्काल चुनाव कार्यक्रम घोषित करने की मांग पर अड़े हैं।
जामिया परिसर की दीवारों पर ‘फ्री कश्मीर’ और ‘फ्री शरजील इमाम’ जैसे नारे लिखे मिलने के बाद विवाद बढ़ गया है। इन नारों को किसने लिखा, इसकी जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि वह परिसर की दीवारों पर लिखे किसी भी विवादित पोस्टर या नारे का समर्थन नहीं करते। उन्होंने कहा, “कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, लेकिन प्रशासन छात्र संघ की बहाली क्यों नहीं कर रहा है?”
समाजवादी पार्टी के रामपुर सांसद मोहिबुल्लाह नदवी भी छात्रों से मिलने पहुंचे थे। खबरों के मुताबिक, पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोककर हिरासत में लिया। नदवी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ धक्का-मुक्की और बदसलूकी की। उन्होंने कहा कि जामिया का पूर्व छात्र होने के नाते छात्रों के अधिकारों के लिए आवाज उठाना उनका फर्ज है।
विवादित नारों को विश्वविद्यालय प्रशासन ने केमिकल की मदद से मिटा दिया है। खबर के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि जिस जगह नारे लिखे गए थे, वहां लगे सीसीटीवी कैमरों के तार काटे गए थे। प्रशासन ने दोषियों की पहचान कर कार्रवाई करने की बात कही है। उधर, प्रदर्शन को देखते हुए विश्वविद्यालय की ओर जाने वाले रास्तों पर दिल्ली पुलिस ने बैरिकेडिंग की है। आने-जाने वालों की जांच भी की जा रही है।
प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने भी एकजुट होकर मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि जब तक छात्र संघ चुनाव का शेड्यूल जारी नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र संघ का नया संविधान तैयार करने के लिए कमेटी बनाई है। हालांकि, छात्र तत्काल चुनाव की तारीखों की घोषणा चाहते हैं। ऐसे में प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच गतिरोध बना हुआ है।