दूसरे राज्यों के BS-6 से नीचे के पेट्रोल-डीजल वाहनों की दिल्ली में एंट्री पर रोक।
बिना वैध PUC प्रमाणपत्र के पेट्रोल, डीजल, CNG और LPG नहीं मिलेगी।
सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 फीसदी वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था लागू।
Delhi New Traffic Rules November 2026: दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए 1 नवंबर 2026 से विंटर एक्शन प्लान के तहत कई नए नियम लागू किए गए हैं। नए नियमों के तहत दूसरे राज्यों में पंजीकृत बीएस-6 से नीचे के पेट्रोल और डीजल वाहनों की दिल्ली में एंट्री पर रोक रहेगी। इसके साथ ही 'नो पीयूसी, नो फ्यूल' नियम, दोगुना पार्किंग शुल्क और सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 फीसदी वर्क फ्रॉम होम जैसे कदम भी दिल्ली की रेखा सरकार द्वारा उठाए गए हैं।
दिल्ली सरकार का ये विंटर एक्शन प्लान 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक लागू रहेगा। हालांकि, कुछ प्रतिबंधों की अवधि अलग-अलग तय की गई है। ऐसे में अगर आप दिल्ली में रहते हैं या एनसीआर के शहरों से रोजाना राजधानी आते-जाते हैं, तो नए नियमों के बारे में जानना बहुत जरूरी है।
दिल्ली के बाहर पंजीकृत बीएस-6 से नीचे के पेट्रोल और डीजल वाहनों को 1 नवंबर से 31 जनवरी 2027 तक राजधानी में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। इस नियम का असर गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद से दिल्ली आने वाले वाहन चालकों पर भी पड़ेगा। हालांकि, दिल्ली में पंजीकृत वाहनों को इस नियम से राहत मिलेगी।
दिल्ली में PUCC के बिना वाहनों को पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और एलपीजी नहीं मिलेगी। यानी वाहन चालकों को ईंधन भरवाने के लिए वैध पीयूसी प्रमाणपत्र रखना जरूरी होगा।
निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने के लिए अधिकृत पार्किंग स्थलों पर शुल्क दोगुना किया जाएगा। यह बढ़ोतरी 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक लागू रहेगी। दिल्ली मेट्रो के अपने पार्किंग स्थलों को इस बढ़ोतरी से छूट दी गई है।
प्रदूषण और ट्रैफिक को कम करने के लिए सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 फीसदी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था के तहत काम करना होगा। यह व्यवस्था 1 नवंबर से 31 जनवरी 2027 तक लागू रहेगी। आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को निर्धारित छूट मिल सकती है।
धूल से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए 1 नवंबर से 31 जनवरी 2027 तक धूल उड़ाने वाली तोड़फोड़ और खुले में होने वाले सिविल निर्माण कार्यों पर रोक रहेगी। इसके बाद 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर और सख्त प्रतिबंध लागू होगा।
बीएस-6 मानकों को पूरा नहीं करने वाली दूसरे राज्यों की डीजल बसों को दिल्ली में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। इससे राजधानी में चलने वाली अंतरराज्यीय बस सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है।
ऐसे मालवाहक ट्रक जिनका दिल्ली में कोई गंतव्य नहीं है, उन्हें राजधानी से होकर गुजरने के बजाय ईस्टर्न या वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल करना होगा। इससे दिल्ली के अंदर ट्रकों की आवाजाही और उनसे होने वाले प्रदूषण को कम करने की कोशिश की जाएगी।
दिल्ली में कचरा, सूखी पत्तियां, प्लास्टिक और अन्य बायोमास खुले में जलाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। लोगों से ऐसी गतिविधियों से बचने और प्रदूषण फैलाने वालों की शिकायत करने की अपील की गई है।
दिल्ली में ट्रैक्टर और जुगाड़ वाहनों के परिचालन पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। इनसे जुड़े नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जा सकती है।
ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए दिल्ली के सरकारी कार्यालयों के समय में बदलाव किया गया है। नगर निगम और दिल्ली सरकार के कार्यालय अलग-अलग समय पर संचालित होंगे।
नए नियमों के तहत इन वाहनों को छूट दी गई है-
बीएस-6 मानक वाले पेट्रोल और डीजल वाहन, वैध पीयूसी प्रमाणपत्र के साथ।
सीएनजी वाहन।
इलेक्ट्रिक वाहन।
एंबुलेंस, दमकल और पुलिस के वाहन।
निर्धारित आपातकालीन और आवश्यक सरकारी सेवाओं में इस्तेमाल होने वाले वाहन।
दिल्ली सरकार ने ट्रैफिक और प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकारी कार्यालयों के समय में भी बदलाव किया है।
दिल्ली नगर निगम (MCD): सुबह 8:30 बजे से शाम 5 बजे तक।
दिल्ली सरकार के कार्यालय: सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक।
निजी कार्यालय: अलग-अलग शिफ्ट, कार पूलिंग और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं।