Delhi Satya Niketan PG Building Collapse: दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को इमारत ढहने के बाद हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। हादसे में अब तक तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई छात्रों के अभी भी मलबे में फंसे होने की आशंका है। एनडीआरएफ और दिल्ली पुलिस की टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। बचावकर्मियों की कोशिश है कि मलबे में फंसे सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
जानकारी के मुताबिक, जिस इमारत में हादसा हुआ, उसमें एक पीजी संचालित किया जा रहा था। बताया जा रहा है कि इस पीजी को करीब एक साल पहले बंद कर दिया गया था, लेकिन कुछ महीने पहले इसे दोबारा शुरू किया गया।
हादसे के समय यहां बड़ी संख्या में छात्र रह रहे थे। यह भी दावा किया जा रहा है कि इनमें ज्यादातर छात्र पूर्वोत्तर भारत से आए हुए थे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पीजी का नाम 'द हॉस्टल डेज' बताया जा रहा है।
पीजी के सोशल मीडिया पेज पर कई पोस्ट मौजूद होने की बात सामने आई है। इन पोस्ट में छात्रों को बेहतर सुविधाएं और सुरक्षा देने का दावा किया गया था।
बताया गया था कि यहां छात्रों को मुफ्त इंटरनेट और वाई-फाई, लॉन्ड्री की सुविधा, खाने की व्यवस्था और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए छात्रों से कथित तौर पर 13 हजार से 15 हजार रुपये तक मासिक किराया लिया जा रहा था।
अब हादसे के बाद इस पीजी की सुरक्षा व्यवस्था और वहां छात्रों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
हादसे के तुरंत बाद दिल्ली पुलिस, एनडीआरएफ, फायर सर्विस और अन्य एजेंसियों ने राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। अब तक 6 लोगों को मलबे से सुरक्षित निकालकर अस्पताल भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
मलबे में फंसे लोगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर भी घटनास्थल पर मंगाए गए हैं। बचाव दल मलबे के अंदर लगातार लोगों की तलाश कर रहा है।
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मलबे के नीचे फंसे लोगों की आवाजें सुनाई देने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि कुछ छात्र मलबे के अंदर से मदद के लिए आवाज लगा रहे हैं।
कुछ छात्रों द्वारा मलबे के नीचे से फोन कर मदद मांगने की जानकारी भी सामने आई है। इसके बाद बचावकर्मी उन जगहों को चिन्हित कर रहे हैं जहां से आवाजें आ रही हैं और सावधानी से मलबा हटाने का काम किया जा रहा है।
घायलों को जल्द अस्पताल पहुंचाने के लिए इलाके में ग्रीन कॉरिडोर तैयार किए जाने की भी जानकारी है, ताकि एंबुलेंस को रास्ते में किसी तरह की देरी न हो।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी घटनास्थल पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों से स्थिति की जानकारी ली और रेस्क्यू ऑपरेशन को तेज करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री अधिकारियों के संपर्क में रहकर पूरे ऑपरेशन की निगरानी कर रही हैं। फिलहाल प्रशासन और बचाव एजेंसियों की प्राथमिकता मलबे में फंसे छात्रों और अन्य लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालना है।