सत्य निकेतन के पास PG के मलबे में दबी कईं जिंदगियां navbharat
दिल्ली

सत्य निकेतन हादसा: जिस PG में रहते थे छात्र, अंदर कैसी थी बिल्डिंग? देखें द हॉस्टल डेज की तस्वीरें

Delhi Satya Niketan Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन में ‘द हॉस्टल डेज’ PG की इमारत ढहने से 3 लोगों की मौत हुई है। कई छात्रों के फंसे होने की आशंका के बीच NDRF और पुलिस का रेस्क्यू जारी है।

अर्पित शुक्ला

Delhi Satya Niketan PG Building Collapse: दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को इमारत ढहने के बाद हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। हादसे में अब तक तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई छात्रों के अभी भी मलबे में फंसे होने की आशंका है। एनडीआरएफ और दिल्ली पुलिस की टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। बचावकर्मियों की कोशिश है कि मलबे में फंसे सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

बंद होने के बाद फिर शुरू हुआ था पीजी

जानकारी के मुताबिक, जिस इमारत में हादसा हुआ, उसमें एक पीजी संचालित किया जा रहा था। बताया जा रहा है कि इस पीजी को करीब एक साल पहले बंद कर दिया गया था, लेकिन कुछ महीने पहले इसे दोबारा शुरू किया गया।

हादसे के समय यहां बड़ी संख्या में छात्र रह रहे थे। यह भी दावा किया जा रहा है कि इनमें ज्यादातर छात्र पूर्वोत्तर भारत से आए हुए थे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पीजी का नाम 'द हॉस्टल डेज' बताया जा रहा है।

सत्य निकेतन हादसा

इंस्टाग्राम पर पोस्ट की भरमार

पीजी के सोशल मीडिया पेज पर कई पोस्ट मौजूद होने की बात सामने आई है। इन पोस्ट में छात्रों को बेहतर सुविधाएं और सुरक्षा देने का दावा किया गया था।

बताया गया था कि यहां छात्रों को मुफ्त इंटरनेट और वाई-फाई, लॉन्ड्री की सुविधा, खाने की व्यवस्था और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए छात्रों से कथित तौर पर 13 हजार से 15 हजार रुपये तक मासिक किराया लिया जा रहा था।

अब हादसे के बाद इस पीजी की सुरक्षा व्यवस्था और वहां छात्रों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

सत्य निकेतन हादसा
सत्य निकेतन हादसा

मलबे से 6 लोगों को निकाला गया

हादसे के तुरंत बाद दिल्ली पुलिस, एनडीआरएफ, फायर सर्विस और अन्य एजेंसियों ने राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। अब तक 6 लोगों को मलबे से सुरक्षित निकालकर अस्पताल भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।

मलबे में फंसे लोगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर भी घटनास्थल पर मंगाए गए हैं। बचाव दल मलबे के अंदर लगातार लोगों की तलाश कर रहा है।

मलबे के नीचे से आ रही हैं छात्रों की आवाजें

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मलबे के नीचे फंसे लोगों की आवाजें सुनाई देने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि कुछ छात्र मलबे के अंदर से मदद के लिए आवाज लगा रहे हैं।

कुछ छात्रों द्वारा मलबे के नीचे से फोन कर मदद मांगने की जानकारी भी सामने आई है। इसके बाद बचावकर्मी उन जगहों को चिन्हित कर रहे हैं जहां से आवाजें आ रही हैं और सावधानी से मलबा हटाने का काम किया जा रहा है।

घायलों को जल्द अस्पताल पहुंचाने के लिए इलाके में ग्रीन कॉरिडोर तैयार किए जाने की भी जानकारी है, ताकि एंबुलेंस को रास्ते में किसी तरह की देरी न हो।

सत्य निकेतन हादसा

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लिया जायजा

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी घटनास्थल पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों से स्थिति की जानकारी ली और रेस्क्यू ऑपरेशन को तेज करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री अधिकारियों के संपर्क में रहकर पूरे ऑपरेशन की निगरानी कर रही हैं। फिलहाल प्रशासन और बचाव एजेंसियों की प्राथमिकता मलबे में फंसे छात्रों और अन्य लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालना है।

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