Delhi Gymkhana Club Case: दिल्ली हाई कोर्ट ने जिमखाना क्लब परिसर को वापस लेने के प्रस्तावित कदम से जुड़े विवाद में कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने एक साथ कई जगह सुनवाई होने की संभावना पर चिंता जताई है। केंद्र सरकार ने इस आधार पर नई याचिका की स्वीकार्यता का विरोध किया कि इसी तरह के मामले पहले से ही कोर्ट में सिविल मुकदमों के तौर पर लंबित हैं। जस्टिस अमित महाजन, विपिन अग्रवाल और अन्य की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें केंद्र के 22 मई, 2026 के परिसर वापसी के नोटिफिकेशन और उसके बाद नोटिस को चुनौती दी गई थी।
भारत सरकार की ओर से पेश होते हुए, केंद्र सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल आशीष के. दीक्षित ने याचिका की स्वीकार्यता पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इस परिसर की वापसी को लेकर जारी नोटिफिकेशन और उसके बाद की कार्यवाही से जुड़े कई सिविल मुकदमे पहले से ही हाई कोर्ट में लंबित हैं। दीक्षित ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ताओं की पिछली कार्यवाही का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि भले ही सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को अलग कार्यवाही के जरिए हाई कोर्ट जाने या लंबित मामलों में पक्षकार बनने की छूट दी थी, लेकिन इस छूट का मतलब यह नहीं निकाला जा सकता कि वे समानांतर कार्यवाही शुरू कर सकते हैं।
केंद्र की ओर से दलील दी गई कि विवाद पहले से ही दिल्ली हाई कोर्ट की एक बेंच के सामने लंबित है। सीनियर एडवोकेट विकास सिंह और एडवोकेट वेंकटेश सिंह ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पक्ष रखा और केंद्र की आपत्ति का विरोध किया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग सदस्यों को अधिकारियों द्वारा की गई कथित जबरदस्ती वाली कार्रवाई को चुनौती देने का स्वतंत्र अधिकार है। उन्होंने आगे तर्क दिया कि प्रतिवादियों ने खुद ही लंबित दीवानी मुकदमों की स्वीकार्यता पर सवाल उठाए थे, इसलिए अब वे यह तर्क नहीं दे सकते कि जमीन वापस लेने की कार्यवाही को चुनौती देने वाली मौजूदा रिट याचिका स्वीकार्य नहीं है।
याचिकाकर्ताओं ने 22 मई के जमीन वापस लेने के नोटिफ़िकेशन को रद्द करने की मांग की है। उनका आरोप है कि यह नोटिफिकेशन संवैधानिक गारंटी, गवर्नमेंट ग्रांट्स एक्ट, 1895 के प्रावधानों और हमेशा के लिए लीज डीड की शर्तों का उल्लंघन करता है। उन्होंने सरकार द्वारा जारी 29 जून के नोटिस को भी चुनौती दी है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि क्लब की जगह कानून के तहत सार्वजनिक परिसर की परिभाषा में नहीं आती है और क्लब का कब्जा गैर-कानूनी नहीं है।
बहस के दौरान जस्टिस महाजन ने कहा कि मौजूदा हालात में स्वतंत्र उपाय के लिए मुकदमा दायर करना होगा, जिस पर अनिवार्य रूप से वही बेंच सुनवाई करेगी, ताकि कई कार्यवाही से बचा जा सके। कोर्ट ने कहा कि रिट याचिका को जारी रखने का मतलब होगा दो अलग-अलग अदालतों द्वारा विवाद का समानांतर निपटारा। हाई कोर्ट ने इस बार की याचिका पर नोटिस जारी नहीं किया और मामले को आगे के विचार के लिए 29 अक्टूबर, 2026 को लिस्ट किया है।