Highlights:
दिल्ली हाई कोर्ट ने नताशा नरवाल को यूके जाने की अनुमति दी
नताशा नरवाल 2 नवंबर से 1 दिसंबर, 2026 यूके जाएंगी
2020 के दिल्ली दंगा मामले में आरोप हैं नताशा
कोर्ट ने शर्त के साथ जाने की अनुमति दी है
Delhi Riot Accused: दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को नताशा नरवाल को एक एकेडमिक कॉन्फ्रेंस के लिए यूके जाने की अनुमति दे दी। वह 2 नवंबर से 1 दिसंबर 2026 तक यूके जाएंगी, जहां वह अपने पीएचडी सुपरवाइजर से मुलाकात करेंगी और यूनिवर्सिटी में होने वाली वार्षिक कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेंगी। वह 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े तीन मामलों में आरोपी हैं। जस्टिस अमित बंसल ने उनके वकील अदित एस. पुजारी की दलीलें सुनने के बाद नताशा नरवाल को यह अनुमति दी।
दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी गई है, जिसमें हर मामले में 50 हजार की जमानत देना शामिल है। वकील अदित एस. पुजारी ने बताया कि नताशा नरवाल, वारविक यूनिवर्सिटी से PhD कर रही हैं और 'कारसेरल लेबर' (जेल में कैदियों से कराया जाने वाला काम) पर अपनी थीसिस लिख रही हैं। उनका रिसर्च पेपर एक वार्षिक सम्मेलन के लिए चुना गया है। ASG एस.वी. राजू और विशेष लोक अभियोजक मधुकर पांडे ने उनकी इस अर्जी का विरोध किया था।
ASG राजू ने इस आधार पर विरोध किया कि UK में प्रत्यर्पण कानून बहुत सख्त हैं और अगर वह वापस नहीं आती हैं, तो उन्हें वापस लाना मुश्किल होगा। इसके अलावा, शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए UK जाने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि वह पिछले तीन सालों से यह कोर्स ऑनलाइन कर रही हैं।
SPP मधुकर पांडे ने सवाल उठाया कि अगर वह वापस नहीं आती हैं और वहां शरण के लिए आवेदन कर देती हैं, तो क्या होगा? यह भी सुझाव दिया गया कि उन पर सख्त शर्तें लगाई जाएं, जिसमें उनके भाई द्वारा जमानत देना और यह लिखित आश्वासन देना शामिल है कि वह भारत वापस आएंगी और शरण के लिए आवेदन नहीं करेंगी।
दिल्ली हाई कोर्ट ने 12 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस से नताशा नरवाल की अर्जी पर जवाब मांगा। नताशा दिल्ली दंगों की 'बड़ी साजिश' मामले में आरोपी हैं और उन्होंने एक शैक्षणिक सम्मेलन में शामिल होने और उससे जुड़ी रिसर्च करने के लिए UK जाने की अनुमति मांगी थी। नरवाल ने ट्रायल कोर्ट के 6 अक्टूबर के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें 2 नवंबर से 1 दिसंबर, 2026 तक UK जाने की उनकी मांग को ठुकरा दिया गया था।
ट्रायल कोर्ट ने कहा कि विदेश यात्रा का अधिकार असीमित नहीं है, और उनकी अर्जी पर फैसला लेते समय 'गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम' (UAPA) के तहत चल रही कार्यवाही को ध्यान में रखना जरूरी है। कोर्ट ने गौर किया कि मामला अभी आरोप तय करने के चरण में है। UAPA के तहत जिन अपराधों के लिए नरवाल के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है, उनमें उम्रकैद और कुछ मामलों में मौत की सजा तक का प्रावधान है।
हालांकि कोर्ट ने माना कि केवल आपराधिक मामला लंबित होने भर से कोई आरोपी विदेश यात्रा के अधिकार से वंचित नहीं हो जाता, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि ऐसी अर्जियों पर फैसला लेते समय आरोपों की प्रकृति और गंभीरता, कानूनी कार्यवाही के चरण और मामले की कुल परिस्थितियों को देखना चाहिए।