अहमदाबाद प्लेन क्रैश और सुप्रीम कोर्ट (सोर्स- एआई नीर्मित) 
दिल्ली

अहमदाबाद प्लेन क्रैश: कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग सार्वजनिक नहीं कर सकते, सुप्रीम कोर्ट में AAIB ने किया विरोध

Supreme Court Ahmedabad Plane Crash: AAIB ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि अहमदाबाद विमान हादसे की कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग कानून के तहत गोपनीय है और इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

करुणा नंद शाहवाल

Ahmedabad AI 171 Plane Crash AAIB On SC: अहमदाबाद में एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 दुर्घटना से जुड़े मामले में एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया है कि कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग और जांच से संबंधित अन्य संवेदनशील दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए जा सकते। ब्यूरो ने अपने हलफनामे में कहा कि विमान दुर्घटनाओं की जांच का अधिकार केवल एएआईबी को है और मौजूदा कानूनी व्यवस्था के तहत किसी समानांतर जांच या संरक्षित सामग्री के खुलासे की अनुमति नहीं है।

एएआईबी ने अदालत को बताया कि दुर्घटना की जांच एयरक्राफ्ट (इन्वेस्टिगेशन ऑफ एक्सीडेंट्स एंड इंसिडेंट्स) रूल्स, 2025 और अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के मानकों के अनुसार की जा रही है। ब्यूरो को उम्मीद है कि जांच पूरी कर अक्टूबर 2026 तक अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी जाएगी। हलफनामे में कहा गया कि गवाहों के बयान, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग, एयर ट्रैफिक कंट्रोल रिकॉर्डिंग और जांच अधिकारियों की राय जैसी सामग्री गोपनीय रखी जाती है ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके। यह मामला सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन की उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है।

सुप्रीम कोर्ट में AAIB का हलफनामा

हलफनामे में एएआईबी ने नियम 17 का हवाला देते हुए कहा कि जांच के दौरान दर्ज गवाहों के बयान, विमान संचालन से जुड़े लोगों के बीच हुई बातचीत, मेडिकल और निजी जानकारी, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग और उसके ट्रांसक्रिप्ट, एयर ट्रैफिक कंट्रोल रिकॉर्डिंग, कॉकपिट इमेज रिकॉर्डिंग और जांच अधिकारियों की राय जैसी सामग्री सार्वजनिक नहीं की जा सकती।

केवल तभी इसका खुलासा संभव है, जब केंद्र सरकार यह निर्णय ले कि जांच या भविष्य की जांच पर पड़ने वाले प्रभाव के बावजूद सार्वजनिक हित में इसका खुलासा आवश्यक है। ब्यूरो ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं की ओर से कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग किसी बाहरी समिति को उपलब्ध कराने की मांग मौजूदा कानूनी व्यवस्था के विपरीत है।

जांच सामग्री को बताया गोपनीय

हलफनामे में कहा गया है, "2025 के नियमों में जांच सामग्री की गोपनीयता और उसकी निष्पक्षता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण और अनिवार्य प्रावधान किए गए हैं। नियम 17(5) स्पष्ट रूप से कहता है कि कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग की ऑडियो सामग्री को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। यह पूर्ण रूप से वैधानिक प्रतिबंध है।"

एएआईबी ने कहा कि इन प्रावधानों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गवाह बिना किसी डर या दबाव के जांच में सहयोग करें और जांच अधिकारी स्वतंत्र रूप से सुरक्षा संबंधी जांच कर सकें। ब्यूरो ने यह भी स्पष्ट किया कि संरक्षित सामग्री का खुलासा किया जाए या नहीं, इसका निर्णय केवल केंद्र सरकार ही ले सकती है और मौजूदा मामले में ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

समानांतर जांच का किया विरोध

वहीं हलफनामे में आगे कहा गया है, "ये सुरक्षा प्रावधान बेहद महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये गवाहों की स्पष्टवादिता, जांच अधिकारियों की स्वतंत्रता और 'नो-ब्लेम' जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता को बनाए रखते हैं। यदि गवाहों को यह आशंका होगी कि उनके बयान सार्वजनिक किए जा सकते हैं, तो वे खुलकर सहयोग करने से बचेंगे, जिससे सुरक्षा जांच का मूल उद्देश्य ही प्रभावित होगा।"

एएआईबी ने यह भी दलील दी कि विमान दुर्घटनाओं की जांच से संबंधित कानूनी ढांचा अपने आप में पूर्ण है और इसमें अदालत द्वारा किसी समानांतर जांच के आदेश की कोई गुंजाइश नहीं है। ब्यूरो ने सुप्रीम कोर्ट से इस रिट याचिका को खारिज करने का अनुरोध किया है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के अनुरूप की जा रहीं जांच

यह हलफनामा उस याचिका के जवाब में दाखिल किया गया है, जिस पर इस वर्ष फरवरी में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एएआईबी से जांच की प्रगति और अपनाई जा रही प्रक्रिया का ब्योरा मांगा था। उस समय केंद्र सरकार ने अदालत को बताया था कि जांच भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के अनुरूप की जा रही है और इसका उद्देश्य दुर्घटना के कारणों का पता लगाना है, न कि किसी की जिम्मेदारी तय करना।

सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन की याचिका पर सुनवाई

यह याचिका सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन ने दायर की है, जिसमें एयर इंडिया एआई-171 विमान दुर्घटना की अदालत की निगरानी में जांच कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बड़ी संख्या में लोगों की मौत वाले मामलों में अंतरराष्ट्रीय विमान दुर्घटना जांच मानकों के तहत उच्च स्तरीय जांच का प्रावधान है। उन्होंने एएआईबी की जांच टीम की संरचना पर भी सवाल उठाते हुए कहा है कि टीम के कई सदस्य नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) से हैं, जबकि इस हादसे के संदर्भ में डीजीसीए की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

दुर्घटनाग्रस्त हुआ था विमान

उल्लेखनीय है कि एयर इंडिया की फ्लाइट एआई-171 12 जून, 2025 को लंदन गैटविक के लिए उड़ान भरने केकुछ ही देर बाद अहमदाबाद के मेघानीनगर इलाके में एक मेडिकल हॉस्टल कॉम्प्लेक्स से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में यात्रियों, क्रू सदस्यों और ज़मीन पर मौजूद लोगों सहित लगभग 260 लोगों की जान चली गई थी।

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