दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग का हाईप्रोफाइल 'अजमेर कांड' (डिजाइन फोटो) 
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Ajmer Assault Case Insights: चिश्ती का फार्महाउस, 100 से ज्यादा लड़कियां, दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग का हाईप्रोफाइल 'अजमेर कांड'

Ajmer physical Assault Scandal : राजस्थान का अजमेर शहर ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह और पुष्कर मंदिर के लिए मशहूर ज़रूर है। लेकिन यह 1992 ब्लैकमेलिंग स्कैंडल के लिए बदनाम भी है।

अभिषेक सिंह

Ajmer Assault Scandal: राजस्थान अपनी खूबसूरती और परंपराओं के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। यहां का इतिहास है कि महिलाएं अपने सम्मान को किसी भी तरह की ठेस से बचाने के लिए जौहर कर लेती थीं। लेकिन इस राज्य के बेहद पवित्र शहर अजमेर में 1990 से 1992 के बीच कुछ ऐसा हुआ जिसने पूरे देश में गुस्सा पैदा कर दिया। दरअसल, इन दो सालों में इस शहर में 100 से ज्यादा स्कूली लड़कियों के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया।

आपको बता दें, स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने पिछले साल इस मामले में 6 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस मामले में कुल 18 आरोपी थे। इसमें से 9 आरोपियों को पहले ही सजा सुनाई जा चुकी है। जबकि, एक आरोपी दूसरे मामले में पहले से ही जेल में है और एक आरोपी ने आत्महत्या कर ली है। वहीं, एक आरोपी अभी भी फरार है। आइए आज आपको ऑफलाइन दुनिया के सबसे बड़े सेक्स स्कैंडल मामले की पूरी कहानी बताते हैं।

एक अखबार ने पूरी कहानी का खुलासा किया

उन दिनों अजमेर शहर में दैनिक नवज्योति नाम का एक अखबार निकलता था। मई 1992 में एक दिन जब शहर के लोग सुबह उठे तो उन्होंने अखबार में छपी एक खबर देखी। खबर की हेडलाइन थी, 'बड़े लोगों की बेटियां ब्लैकमेलिंग का शिकार'। इसे एक युवा रिपोर्टर संतोष गुप्ता ने लिखा था। जैसे ही यह रिपोर्ट अखबार में छपी और लोगों तक पहुंची तो पूरे शहर में हंगामा मच गया। दोपहर तक मामला राजस्थान के मुख्यमंत्री तक पहुंच गया। उस समय राज्य में भाजपा की सरकार थी और मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत थे।

'छात्राओं के ब्लैकमेलर कैसे आजाद रह गए?'

मुख्यमंत्री ने इस मामले को गंभीरता से लिया और पुलिस को कहा कि आरोपियों को किसी भी कीमत पर भागने नहीं दिया जाना चाहिए। हालांकि पुलिस की कार्रवाई में देरी हो रही थी और इस बीच आरोपी हर सबूत मिटाने की पूरी तैयारी कर रहे थे। अखबार में खबर छपे करीब 15 दिन बीत चुके थे लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही थी। इस बीच संतोष गुप्ता हर रोज अखबार में इस मामले से जुड़ी नई जानकारियां लिख रहे थे। जब संतोष गुप्ता को लगा कि आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है तो उन्होंने अपनी दूसरी खबर में उनकी तस्वीरें भी प्रकाशित कीं। इस खबर का शीर्षक था, 'छात्राओं के ब्लैकमेलर कैसे आजाद रह गए?'।

दैनिक नवज्योति अखबार में प्रकाशित ख़बर (सोर्स- सोशल मीडिया)

जब लोगों ने पीड़ित लड़कियों के साथ आरोपियों की तस्वीरें देखीं तो उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। पूरा शहर गुस्से से भर गया। इसके बाद संतोष गुप्ता ने तीसरी खबर प्रकाशित की और उसका शीर्षक था, 'सीआईडी ​​ने 5 महीने पहले दी थी सूचना!' और चौथी खबर प्रकाशित हुई 'डेढ़ महीने पहले दिखी थीं ये तस्वीरें'। चौथी खबर ने लोगों के गुस्से का बांध इसलिए तोड़ दिया क्योंकि यह एक बयान पर प्रकाशित हुई थी। यह बयान राजस्थान के तत्कालीन गृह मंत्री दिग्विजय सिंह ने दिया था।

लोगों का मानना ​​था कि जब सरकार और प्रशासन को पूरे मामले और आरोपियों के बारे में पहले से ही पता था, तो उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही थी। लोग सड़कों पर उतर आए और अजमेर बंद का ऐलान कर दिया। विश्व हिंदू परिषद, शिवसेना, बजरंग दल जैसे संगठनों ने पूरे शहर में हंगामा किया। वहीं, अजमेर जिला बार एसोसिएशन के वकील भी लड़कियों को न्याय दिलाने के लिए आगे आए।

सीबी सीआईडी के हाथ में मामला

जब मामला गंभीर होने लगा तो राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत ने मामले को सी.आई.डी. सी.बी. को सौंप दिया। इसके बाद वरिष्ठ आई.पी.एस. अधिकारी एन.के. पाटनी अपनी पूरी टीम के साथ अजमेर पहुंचे। 31 मई को जांच शुरू हुई और यूथ कांग्रेस के शहर अध्यक्ष और दरगाह के खादिम चिश्ती परिवार के फारूक चिश्ती, उपाध्यक्ष नफीस चिश्ती, संयुक्त सचिव अनवर चिश्ती, पूर्व कांग्रेस विधायक के रिश्तेदार अलमास महाराज, इशरत अली, इकबाल खान, सलीम, जमीर, सोहेल गनी, पुत्तन इलाहाबादी, नसीम अहमद उर्फ ​​टार्जन, प्रवेज अंसारी, मोहिबुल्लाह उर्फ ​​माराडोना, कैलाश सोनी, महेश लुधानी, पुरुषोत्तम उर्फ ​​जॉन वेस्ले उर्फ ​​बबना और हरीश तोलानी जैसे नाम प्रकाश में आए। इनमें हरीश तोलानी ही वह शख्स था, जो लैब में लड़कियों की अश्लील तस्वीरें तैयार करता था।

पहले 8 लोग गिरफ्तार हुए थे

पहले जांच के बाद 8 लोग गिरफ्तार हुए थे। वर्ष 1994 में एक आरोपी पुरुषोत्तम जब जेल से बाहर आया, तो उसने आत्महत्या कर ली थी। जबकि इस मामले का पहला फैसला 6 साल बाद आया और इसमें 8 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई और अब 32 साल बाद 6 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।

कैसे गैंगरेप की शिकार बनी लड़कियां?

यह पूरा मामला 1991 के आसपास शुरू हुआ। शहर के एक बड़े युवा नेता ने एक व्यापारी की बेटी से दोस्ती की और उसे बहला-फुसलाकर फारुख चिश्ती के फायसागर स्थित पोल्ट्री फार्महाउस पर ले गया। वहां पहले लड़की के साथ बलात्कार किया गया और फिर उसकी तस्वीरें खींची गईं। फिर आरोपियों ने इन तस्वीरों के ज़रिए लड़की को ब्लैकमेल किया और उसे अपने दोस्तों को भी इस फार्महाउस पर लाने के लिए कहा। ऐसा करते हुए इन आरोपियों ने करीब 100 लड़कियों के साथ बलात्कार किया और उनकी नग्न तस्वीरें खींचीं।

कैसे लीक हुई तस्वीरें?

बाद में जब जांच की गई तो पता चला कि जिस लैब से ये आरोपी इन लड़कियों की तस्वीरें तैयार करवाते थे, वहां से ये तस्वीरें शहर के दूसरे लोगों तक पहुंचती थीं और वे भी इन तस्वीरों के सहारे लड़कियों को ब्लैकमेल करते थे और उनके साथ बलात्कार करते थे। इन सभी लड़कियों की उम्र महज 17 से 20 साल थी। जब लड़कियों की तस्वीरें पूरे शहर में बंटने लगीं तो पीड़ित लड़कियों में से 6 ने आत्महत्या कर ली। वहीं, कुछ परिवार शहर छोड़कर गुमनामी की जिंदगी जीने लगे।

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