अंबिकापुर में मनाया कुकुर तिहार (सोर्स - नवभारत लाइव)
सरगुजा (अंबिकापुर)

अंबिकापुर में अनोखी दिवाली: कुत्तों को तिलक, फूलों की माला पहनाकर मनाया कुकुर तिहार

Unique Diwali In Chhattisgarh: शहर के बेजुबान डॉग सेल्टर में नेपाल की परंपरा के अनुसार कुकुर तिहार मनाया गया। इस दौरान सेल्टर के सदस्यों ने वहां रह रहे डॉग्स को तिलक लगाया।

चंदू निर्मलकर

Highlights

  • नेपाल की परंपरा के अनुसार मनाया गया कुकुर तिहार।

  • कुत्तों को उनकी वफादारी और इंसानों के प्रति समर्पण के लिए सम्मान का पर्व।

  • बेजुबान डॉग सेल्टर के सदस्यों ने मनाया कुकुर तिहार।

  • बेजुबान डॉग सेल्टर ने अब तक सात हजार से अधिक डॉग्स का रेस्क्यू।

Kukur Tihar In Chhattisgarh: इंसानों के सबसे वफादार साथी माने जाने वाले कुत्तों के सम्मान में अंबिकापुर में अनोखी पहल देखने को मिली। शहर के बेजुबान डॉग सेल्टर में नेपाल की परंपरा के अनुसार कुकुर तिहार मनाया गया। इस दौरान सेल्टर के सदस्यों ने वहां रह रहे डॉग्स को तिलक लगाया। फूलों की माला पहनाई और उनकी पूजा कर उन्हें स्वादिष्ट भोजन कराया।

दरअसल भारत के पड़ोसी देश नेपाल में कुकुर तिहार का विशेष महत्व है। दीपावली से एक दिन पहले मनाए जाने वाले इस पर्व में कुत्तों को उनकी वफादारी और इंसानों के प्रति समर्पण के लिए सम्मान दिया जाता है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अंबिकापुर के संभाग के एकमात्र बेजुबान डॉग सेल्टर में भी कुकुर तिहार मनाया गया।

कुत्तों को माना जाता है यमराज का दूत

यहां संभागभर से घायल और चोटिल कुत्तों का रेस्क्यू कर लाया जाता है और उनका निशुल्क उपचार किया जाता है। सेल्टर के सदस्यों के मुताबिक अब तक सात हजार से अधिक डॉग्स का रेस्क्यू किया जा चुका है। इस नेक काम में शहर के लोग भी बढ़-चढ़कर सहयोग कर रहे हैं। सेल्टर के सदस्यों ने बताया कि मान्यता के अनुसार कुत्तों को यमराज का दूत माना जाता है। यही वजह है कि इस दिन उनकी पूजा कर यमराज को प्रसन्न करने की परंपरा है।

कुत्तों को तिलक लगाकर, फूलों की माला पहनाकर और अच्छा भोजन कराकर उनके प्रति प्रेम और सम्मान जताया जाता है,कुकुर तिहार के इस आयोजन ने एक बार फिर संदेश दिया कि बेजुबान जानवर भी प्रेम और सम्मान के हकदार हैं।

कुकुर त्यौहार को लेकर पुरोहित ने कही ये बात

आज कुकुर त्यौहार के दिन शेल्टर में पूजा करने पहुंचे पंडित ने भी बताया कि विगत कई वर्षों से उनके द्वारा धार्मिक कार्यक्रमों में पूजा पाठ का कार्य किया जा रहा है मगर पहली बार उन्हें कुकुर तिहार में पूजा करने का अवसर मिला है। साथ ही पंडित ने बताया कि कशी विश्वनाथ हो या उज्जैन या फिर नेपाल में स्थित पशुपतिनाथ का मंदिर सभी में इनका वर्णन किया गया है। कुकुर तिहार में कुत्तों को भगवान भैरव का वाहन और मनुष्य का वफादार साथी मानकर पूजा जाता है।

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