Chhattisgarh Health Department Raid : छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभाग ने आयुष्मान और बीजू स्वास्थ्य कार्ड से फर्जी इलाज की शिकायतों पर 100 से ज्यादा अस्पतालों में एक साथ छापेमारी की। टीमों ने इलाज, मरीजों और बिलिंग से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले।
छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग ने एक साथ बड़ी कार्रवाई की है। विभाग की कई टीमों ने बुधवार को प्रदेश के 100 से ज्यादा अस्पतालों में छापेमारी की। इस अचानक हुई कार्रवाई से अस्पताल संचालकों में हड़कंप मच गया है।
यह छापेमारी राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई अन्य जिलों में एक साथ की गई। इसमें सरकारी और निजी अस्पतालों के साथ-साथ कई नर्सिंग होम भी शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग की अलग-अलग टीमें सुबह से ही अस्पतालों में जांच के लिए पहुंच गई थीं।
अस्पतालों के खिलाफ फर्जीवाड़े की लगातार गंभीर शिकायतें मिल रही थीं। आयुष्मान कार्ड के जरिए कागजों पर ही फर्जी इलाज दिखाने की बात सामने आई थी। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने जांच टीम का गठन किया।
जांच टीमें अब अस्पतालों में पहुंचकर मरीज भर्ती और इलाज से जुड़े रिकॉर्ड खंगाल रही हैं। भर्ती रजिस्टर, पैथोलॉजी रिपोर्ट और बिलिंग से संबंधित सभी दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है। फर्जी मरीजों के नाम दर्ज कर क्लेम लेने की आशंका जताई जा रही है।
जांच के दौरान ओडिशा सरकार की बीजू स्वास्थ्य कल्याण योजना में भी गड़बड़ी सामने आई है। छत्तीसगढ़ के कई निजी अस्पतालों में ओडिशा के पात्र मरीजों को कैशलेस इलाज देने की सुविधा दी गई है।
आरोप है कि इस योजना के तहत भी फर्जी मरीजों के रिकॉर्ड तैयार करके सरकारी फंड का गलत इस्तेमाल किया गया। जांच अधिकारी आयुष्मान कार्ड और बीजू कार्ड दोनों योजनाओं के रिकॉर्ड की समानांतर जांच कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में पहले मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत स्मार्ट कार्ड से इलाज होता था। बाद में केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना शुरू होने पर इसे इसके साथ जोड़ दिया गया।
वर्तमान में पात्र परिवारों को आयुष्मान कार्ड के तहत सालाना 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलता है। इसी कैशलेस व्यवस्था में कुछ अस्पतालों द्वारा फर्जीवाड़ा करने का मामला सामने आया है।
फिलहाल इस छापेमारी को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि पूरी जांच प्रक्रिया खत्म होने के बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी।
जांच में फर्जीवाड़ा साबित होने पर संबंधित अस्पतालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे अस्पतालों के लाइसेंस रद्द करने के साथ ही उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है।