छत्तीसगढ़ पुलिस भर्ती विवाद सोर्स : AI जेनरेट
छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ पुलिस भर्ती : 2008 से वरिष्ठता नहीं, सुप्रीम कोर्ट से अभ्यर्थियों को बड़ा झटका

Bilaspur High Court : छत्तीसगढ़ पुलिस भर्ती 2006 का वरिष्ठता विवाद सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। अभ्यर्थियों को 2008 से वरिष्ठता का लाभ नहीं मिलेगा।

ऐश्वर्या द्विवेदी

Chhattisgarh Police Recruitment Dispute : छत्तीसगढ़ पुलिस भर्ती का 20 साल पुराना विवाद समाप्त हो गया। सुप्रीम कोर्ट ने अभ्यर्थियों की याचिका पूरी तरह खारिज कर दी। अब अभ्यर्थियों को 2008 से वरिष्ठता का लाभ नहीं मिलेगा। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने यह आदेश दिया। जस्टिस श्रीचंद्रशेखर भी इस पीठ में शामिल रहे। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का फैसला बरकरार रखा। यह फैसला 30 सितंबर 2026 को सुनाया गया।

पुलिस भर्ती में पुरानी वरिष्ठता खारिज

वर्ष 2006 में पुलिस भर्ती का विज्ञापन जारी हुआ था। वर्ष 2008 में पहली मेरिट सूची प्रकाशित की गई थी। उत्तर पुस्तिकाओं का दोबारा मूल्यांकन 2009 में कराया गया।

संशोधित सूची के बाद नियुक्ति की तिथि बदल गई। सुप्रीम कोर्ट ने पुरानी वरिष्ठता देने से मना कर दिया।

भर्ती विज्ञापन से विवाद तक

पुलिस मुख्यालय ने 18 सितंबर 2006 को विज्ञापन निकाला। यह भर्ती कुल 380 पदों के लिए निकाली गई थी। इनमें सूबेदार, प्लाटून कमांडर और उपनिरीक्षक के पद शामिल थे। पहली मेरिट सूची 8 अप्रैल 2008 को जारी हुई। चयनित अभ्यर्थियों ने अपना प्रशिक्षण भी पूरा कर लिया। बाद में प्रश्नपत्र में बड़ी त्रुटियां सामने आईं। मॉडल उत्तरों में भी गंभीर कमियां पाई गईं।

पुनर्मूल्यांकन और नया आदेश

गलत प्रश्नों को हटाकर उत्तर पुस्तिकाओं को जांचा गया। संशोधित मेरिट सूची 27 जून 2009 को जारी हुई। इसके बाद पूर्व की नियुक्तियों को रद्द कर दिया गया। मामला वर्ष 2013 में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। कोर्ट ने पुनर्मूल्यांकन को पूरी तरह सही माना।अभ्यर्थियों को सेवा में बनाए रखने का निर्देश दिया। उन्हें संशोधित सूची के तहत नई नियुक्ति माना गया। उन्हें सूची में सबसे नीचे रखने को कहा गया।

वरिष्ठता सूची पर उठा सवाल

वर्ष 2013 के बाद नई वरिष्ठता सूची तैयार हुई। याचिकाकर्ताओं को नए नियुक्त कर्मचारी के रूप में रखा गया। उन्हें 2008 से 2013 के बीच नियुक्तों से नीचे रखा गया।

इससे उनके बाद आए कर्मचारी पदोन्नत हो गए। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 23 जुलाई 2026 को याचिका खारिज की। हाई कोर्ट ने कहा कि विभाग ने नियमों का पालन किया।

इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर हुई। सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर केस समाप्त कर दिया।

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