बिलासपुर हाईकोट में हुई सलवा जुडूम पर सुनवाई।
कर्मियों के सेवा संबंधी मामले में राज्य सरकार को नोटिस।
हाईकोर्ट ने 6 सप्ताह के भीतर मांगा जवाब।
याचिका में कथित भेदभाव का मुद्दा उठाया।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सलवा जुडूम से जुड़े रहे और बाद में छत्तीसगढ़ आर्म्ड पुलिस फोर्स में शामिल किए गए कर्मियों के सेवा संबंधी मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने सरकार को छह सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिका में सेवा शर्तों, समानता के अधिकार और लंबे समय से कथित भेदभाव का मुद्दा उठाया गया है।
सलवा जुडूम की शुरुआत वर्ष 2005 के आसपास बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान के रूप में हुई थी। इस दौरान कई स्थानीय आदिवासी युवाओं को विशेष पुलिस अधिकारी (SPO) के रूप में नियुक्त किया गया था। वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने SPOs के सशस्त्र नक्सल-विरोधी अभियानों में इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। इसके बाद सलवा जुडूम से जुड़े कुछ कर्मियों को छत्तीसगढ़ आर्म्ड पुलिस फोर्स में शामिल किया गया। अब इन्हीं कर्मियों की सेवा शर्तों और अधिकारों को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं का पक्ष है कि उनकी सेवा से जुड़े अधिकारों और पात्रताओं पर उचित विचार किया जाना चाहिए तथा कथित भेदभाव का न्यायसंगत समाधान होना चाहिए।
याचिका में समानता के अधिकार और सार्वजनिक रोजगार में अवसर की समानता से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों का मुद्दा भी उठाया गया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई है कि मामला केवल सेवा लाभों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता और निष्पक्ष व्यवहार के सिद्धांतों से भी जुड़ा है।
इस मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता फतेश कुमार साहू और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के अधिवक्ता विद्याभूषण सोनी संयुक्त रूप से पैरवी कर रहे हैं। दोनों अधिवक्ताओं की ओर से मामले के संवैधानिक पहलुओं को रेखांकित किया गया है।
दोनों अधिवक्ता मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जुड़े चर्चित ‘माउंटेन मैन’ ट्रेडमार्क विवाद के कानूनी पक्षों में रणनीतिक भागीदारी भी कर चुके हैं।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को छह सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। सरकार का जवाब आने के बाद मामले में आगे की सुनवाई होगी। फिलहाल, अदालत की ओर से नोटिस जारी किया जाना न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है। मामले में अंतिम फैसला आगे की सुनवाई और पक्षकारों की दलीलों के आधार पर होगा।