सड़क हादसे में जान गंवाने वाले परिजनों के पक्ष में आया फैसला।
बिलासपुर हाईकोर्ट ने पंजाब रोडवेज पर ठोंका जुर्माना।
30 दिन के भीतर मुआवजे की 50 प्रतिशत राशि जमा करने के निर्देश।
1 करोड़ 9 हजार 160 रुपए मुआवजा देने का दिया था आदेश।
Bilaspur High Court imposes fine on Punjab Roadways: सड़क हादसे में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिजनों को मुआवजा देने के मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट ने पंजाब रोडवेज की बस कंपनी को बड़ा झटका दिया है। मुआवजा आदेश को चुनौती देने वाली अपील 389 दिन की देरी से दाखिल की गई। कोर्ट ने देरी माफ करते हुए अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार तो कर लिया, लेकिन कंपनी पर 38 हजार रुपये का खर्च भी लगा दिया। साथ ही अंतरिम राहत के लिए 30 दिन के भीतर कुल मुआवजे की 50 प्रतिशत राशि जमा करने की शर्त रखी है।
मामला 14 अक्टूबर 2019 को हुए सड़क हादसे से जुड़ा है। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने 22 फरवरी 2025 को मृतक के परिजनों को 1 करोड़ 9 हजार 160 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था। इस राशि पर 6 प्रतिशत सालाना ब्याज भी निर्धारित किया गया था। इसके खिलाफ पंजाब रोडवेज की बस के मालिक की ओर से 22 जून 2026 को हाईकोर्ट में अपील दायर की गई। अपील दाखिल करने में 389 दिन की देरी हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि मुआवजे का आदेश जारी होने के बावजूद दावेदारों को अब तक कोई राशि जमा नहीं की गई थी।
न्यायमूर्ति संजय कुमार जायसवाल ने अपील में हुई देरी को माफ कर सुनवाई का रास्ता खोल दिया, लेकिन कंपनी को राहत बिना शर्त नहीं मिली। कोर्ट ने निर्देश दिया कि 38 हजार रुपये का खर्च 30 दिन के भीतर चेक के माध्यम से किसी एक दावेदार को अधिकरण के समक्ष दिया जाए। इसके अलावा, कंपनी को कुल मुआवजे की 50 प्रतिशत राशि भी निर्धारित समय में जमा करनी होगी। इसके बाद ही शेष मुआवजे की वसूली पर रोक लागू होगी। यानी कंपनी को अंतरिम राहत पाने के लिए पहले मुआवजे का आधा हिस्सा जमा करना अनिवार्य होगा।
हाईकोर्ट ने दावेदारों को जमा की गई राशि निकालने की अनुमति दी है, लेकिन इसके लिए उन्हें लिखित आश्वासन देना होगा कि भविष्य में कोर्ट के आदेश पर रकम लौटाने की जरूरत पड़ने पर वे राशि वापस करेंगे। कंपनी को अगली सुनवाई में 38 हजार रुपये के खर्च और मुआवजे की आधी राशि जमा करने की रसीद पेश करनी होगी। वहीं, बस चालक सहित अन्य पक्षकारों को दोबारा नोटिस जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। अब देखना होगा कि पंजाब रोडवेज तय 30 दिन के भीतर कोर्ट के निर्देशों का पालन करती है या नहीं।