1 नवंबर से पर्यटक कर सकेंगे जंगल की सैर।
पर्यटन की यह शुरुआत बदलते बीजापुर की नई तस्वीर पेश करेगी।
अब 9 किमी के ट्रैक पर पर्यटक कर सकेंगे जंगल सफारी का दीदार।
जंगल सफारी का शुल्क 2 हजार रुपए निर्धारित।
Chhattisgarh Indravati Tiger Reserve Jungle Safari: जिस इंद्रावती टाइगर रिजर्व के जंगलों में कभी कदम रखने से लोग डरते थे, वहां अब पर्यटकों की चहल-पहल सुनाई देगी। करीब तीन दशक बाद इंद्रावती के जंगलों में जंगल सफारी शुरू हो गई है। 1 नवंबर से पर्यटक जिप्सी में सवार होकर जंगल की हरियाली, वन्यजीवों और प्राकृतिक खूबसूरती का दीदार कर सकेंगे। नक्सलवाद के लंबे दौर के बाद जिले में पर्यटन की यह शुरुआत बदलते बीजापुर की नई तस्वीर पेश करेगी।
वन विभाग ने सफारी के लिए उल्लूर गांव से सरांड तक करीब 9 किलोमीटर का ट्रैक तैयार किया है। शुरुआत में चार जिप्सियों से पर्यटकों को जंगल की सैर कराई जाएगी। सफारी का शुल्क 2 हजार रुपए निर्धारित किया गया है। प्रवेश स्थल पर बांस-बल्ली से आकर्षक गेट और टिकट काउंटर भी बनाया गया है।
इंद्रावती टाइगर रिजर्व का नाम लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों और सुरक्षा चुनौतियों के कारण चर्चा में रहा। जंगल के बड़े हिस्से में नक्सलियों का प्रभाव होने के कारण पर्यटन की संभावनाएं भी सीमित थीं। अब हालात बदलने के साथ जंगल के प्राकृतिक सौंदर्य को लोगों तक पहुंचाने की तैयारी की गई है। सफारी मार्ग जंगल के भीतर से गुजरता है। यहां पर्यटक ऊंचे पेड़ों, हरियाली और प्राकृतिक वातावरण का आनंद ले सकेंगे। वन विभाग का उद्देश्य केवल पर्यटन बढ़ाना नहीं, बल्कि जंगल और वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी है।
बीजापुर की पहचान लंबे समय तक नक्सलवाद और सुरक्षा चुनौतियों से जुड़ी रही है। अब जंगल सफारी की शुरुआत जिले के लिए नई संभावनाएं लेकर आ रही है। इससे बाहर से आने वाले पर्यटकों को बस्तर की प्राकृतिक विरासत देखने का अवसर मिलेगा, वहीं स्थानीय ग्रामीणों की आजीविका के नए रास्ते भी खुलेंगे।
वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप आज सुबह 8 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इंद्रावती टाइगर रिजर्व में पहली जंगल सफारी का वर्चुअल शुभारंभ किया। इसके साथ ही पर्यटकों के लिए सफारी की बुकिंग भी शुरू हो गई।
डीएफओ आईटीआर, एसएस सोरी ने बताया कि 'जंगल सफारी की शुरुआत के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 1 नवंबर से पर्यटक निर्धारित मार्ग पर सफारी कर सकेंगे। इसके लिए चार जिप्सियां उपलब्ध कराई गई हैं। स्थानीय युवाओं को गाइड और वाहन चालक के रूप में प्रशिक्षण दिया गया है। सफारी के माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।