Bastar Dussehra Kachhan Devi Tradition Controversy : जिस काछन देवी की अनुमति के बाद बस्तर दशहरा मनाने की परंपरा निभाई जाती है, अब उसी काछन देवी की परंपरा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बस्तर प्रवास के दौरान लालबाग मैदान में आयोजित कार्यक्रम में काछन देवी के प्रतीकात्मक स्वरूप में दूसरी बालिका को उनसे मिलवाया गया, जबकि मान्यता के अनुसार काछन देवी की सवारी बनने वाली बालिका पीहू इस मुलाकात का हिस्सा नहीं बन सकी। इस घटनाक्रम से पनका समाज बेहद नाराज है। समाज का सवाल है कि जब परंपरा पीहू से जुड़ी है, तो राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए दूसरी बच्ची को क्यों चुना गया?
बस्तर दशहरा की परंपराओं में काछन देवी का विधान विशिष्ट स्थान रखता है। मान्यता है कि काछन देवी से अनुमति मिलने के बाद ही दशहरा मनाने की परंपरा आगे बढ़ती है। इस विधान में पीहू की भूमिका महत्वपूर्ण है। हर साल कांटों के झूले पर झूलने की कठिन पारंपरिक रस्म के साथ काछन देवी से अनुमति लेने का विधान निभाया जाता है। ऐसे में राष्ट्रपति के सामने काछन देवी के प्रतीकात्मक स्वरूप में दूसरी बालिका को प्रस्तुत किए जाने से समाज ने परंपरा में वास्तविक भूमिका निभाने वाली पीहू की उपेक्षा का सवाल उठाया है।
पीहू को राष्ट्रपति से नहीं मिलवाए जाने पर नाराज पनका समाज ने दशहरा समिति और जिला प्रशासन के प्रति अपनी आपत्ति जाहिर की है। समाज के सदस्यों ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में भी परंपरा से जुड़े लोगों की अनदेखी होती रही, तो आगामी वर्ष बस्तर दशहरा का बहिष्कार किया जा सकता है। समाज ने चुनौती देते हुए कहा कि प्रशासन और समिति को काछन देवी की परंपरा का महत्व समझना चाहिए और पीहू के माध्यम से पारंपरिक विधान के सम्मान को सुनिश्चित करना चाहिए।
बस्तर दशहरा में काछन देवी का विधान महज एक रस्म नहीं, बल्कि स्थानीय आस्था और पनका समाज की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है। ऐसे में राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान प्रतीकात्मक प्रस्तुति के लिए दूसरी बालिका का चयन विवाद की वजह बन गया है। अब सवाल यह है कि आयोजन समिति और प्रशासन समाज की नाराजगी को किस तरह दूर करते हैं। फिलहाल, इस मामले में प्रशासन और दशहरा समिति का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है।