गौतम देव  सोर्स-सोशल मीडिया
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IIT की डिग्री, 20 साल का अनुभव फिर भी अमेरिका में नौकरी के लिए दर-दर भटक रहा है ये शख्स; पढ़े पूरी कहानी

Gautam Dev: गौतम देव IIT कानपुर से बीटेक और 20 साल से अधिक का अनुभव होने के बाद भी नौकरी न मिलने से अमेरिका में Uber चलाकर गुजारा कर रहे हैं। गौतम की सेविंग खत्म हो गई है। वो भारत लौटना चाहते हैं।

आशीष शुक्ला

Highlights

  • अमेरिका में रहने वाले 61 वर्षीय गौतम देव आर्थिक तंगी में चला रहे Uber

  • गौतम देव की पूरी सेविंग खत्म हो गई है। फिलहाल गौतम भारत लौटने की सोच रहे हैं।

  • IIT की डिग्री और 20 साल से अधिक का अनुभव होने के बाद भी नौकरी के लिए दर-दर भटक रहा शख्स

The Story Of Gautam Dev Struggle: समाज में आपने भी सुना होगा IIT से बीटेक और सरकारी कॉलेज से एमबीबीएस कर लेने के बाद बच्चे का भविष्य सुनिश्चित रहेगा। मां-बाप का भी बच्चों को लेकर धारणा सी बन गई है कि बीटेक IIT से और सरकारी कॉलेज से एमबीबीएस कर लेने के बाद बच्चें का भविष्य सुनहरा रहेगा। लेकिन एक शख्स IIT से बीटेक और कार्य करने का लंबा अनुभव होने के बाद भी शख्स नौकरी न मिलने के कारण दर-दर भटक रहा है।

अमेरिका में रहने वाले 61 वर्षीय गौतम देव की कहानी बेहद मार्मिक है। IIT से डिग्री हासिल करने और टेक इंडस्ट्री में 20 साल से अधिक का अनुभव रखने के बावजूद वह करीब दो साल से फुल-टाइम नौकरी की तलाश कर रहे हैं। आर्थिक तंगी के बीच उन्हें अपना गुजारा करने के लिए किसी और काम का सहारा लेना पड़ रहा है। गौतम देव आज Uber चलाने और सामान की डिलीवरी करने को मजबूर हैं। बचत खत्म, कर्ज बढ़ा और अब भारत लौटने पर विचार कर रहे।

नौकरी छोड़ी, लेकिन नहीं मिली नई नौकरी

रिपोर्टों के मुताबिक, गौतम देव सितंबर 2024 में डलास में अपनी सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर बेरोजगार हो गए थे। उन्होंने यह फैसला दूसरी जगह शिफ्ट होने से बचने के लिए लिया था। उस समय उन्हें उम्मीद थी कि वह जल्द ही कोई दूसरी नौकरी खोज लेंगे। हालांकि, उनकी उम्मीदें अब तक पूरी नहीं हो सकी हैं।

फुल-टाइम रोजगार नहीं मिलने के बाद उन्होंने ट्रेडिंग की कोशिश की। इसके बाद Uber के लिए गाड़ी चलाने और DoorDash तथा Walmart Spark के जरिए सामान की डिलीवरी जैसे काम शुरू किए। लेकिन उनका कहना है कि इन कामों से होने वाली कमाई रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

खत्म हुई बचत, बढ़ता गया कर्ज

लगातार नौकरी नहीं मिलने का असर अब उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है। उनकी बचत खत्म हो चुकी है, क्रेडिट कार्ड का कर्ज बढ़ रहा है और हर महीने किराया चुकाना बड़ी चुनौती बन गया है। रिपोर्टों के अनुसार, उनके बिलों के भुगतान में मदद के लिए GoFundMe पर चलाए गए अभियान से 9,000 डॉलर से अधिक जुटाए गए।

देव अब भारत लौटने पर भी विचार कर रहे हैं, हालांकि उन्होंने अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। उन्हें उम्मीद है कि 62 वर्ष की उम्र से मिलने वाले अमेरिकी सोशल सिक्योरिटी लाभ उनकी आर्थिक परेशानियों को कुछ कम कर सकती हैं।

उम्र के साथ बढ़ती नौकरी की चुनौती

गौतम देव की कहानी ऐसे समय सामने आई है, जब अनुभवी कर्मचारियों के लिए रोजगार के अवसरों और कार्यस्थल पर उम्र के आधार पर भेदभाव को लेकर बहस जारी है। AARP के 2026 के सर्वे के मुताबिक, 50 वर्ष और उससे अधिक उम्र के 64 प्रतिशत कर्मचारियों ने कार्यस्थल पर उम्र आधारित भेदभाव देखने या महसूस करने की बात कही गई है।

यह कहानी उन पेशेवरों के लिए भी सबक है, जो नौकरी छोड़कर नया विकल्प तलाशने की योजना बना रहे हैं। पर्याप्त बचत, कर्ज का आकलन और नई नौकरी मिलने में लगने वाले संभावित समय की योजना बनाना आर्थिक जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

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