सिद्धार्थ भैया, (सोर्स- सोशल मीडिया)  
बिज़नेस

कौन थे सिद्धार्थ भैया? 47 की उम्र में हॉर्ट अटैक से निधन, ऐसा 'हंटर' जो मिट्टी में खोज लेता था सोना

Siddhartha Bhaiya: सिद्धार्थ भैया को अक्सर 'स्मॉलकैप मल्टीबैगर हंटर' के रूप में जाना जाता था। उन्होंने शुरुआती दौर में ही हाई-ग्रोथ वाली कंपनियों को पहचानने की क्षमता से एक मजबूत पहचान बनाई थी।

मनोज आर्या

Siddharth Bhaiya Passes Away: सिद्धार्थ भैया का 31 दिसंबर 2025 को अचानक दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वह 47 वर्ष के थे। सिद्धार्थ दलाल स्‍ट्रीट के जाने-माने स्मॉलकैप निवेशक थे। वह एक्विटास (Aequitas) नाम की पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (पीएमएस) फर्म के संस्थापक और एमडी थे। सिद्धार्थ भैया न्यूजीलैंड में परिवार के साथ छुट्टी मना रहे थे। तभी उन्हें दिल का दौरा पड़ा।

इस खबर से भारत के निवेश जगत में शोक की लहर दौड़ गई। एक्विटास ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि हमें अपने एमडी सिद्धार्थ भैया के 31 दिसंबर 2025 को अचानक कार्डियक अरेस्ट के बाद हुए निधन की खबर साझा करते हुए गहरा दुख हो रहा है।

कौन थे सिद्धार्थ भैया?

सिद्धार्थ भैया को अक्सर 'स्मॉलकैप मल्टीबैगर हंटर' के रूप में जाना जाता था। उन्होंने शुरुआती दौर में ही हाई-ग्रोथ वाली कंपनियों को पहचानने और उन पर लंबे समय तक भरोसा जताने की अपनी क्षमता से एक मजबूत पहचान बनाई थी। उनके नेतृत्व में एक्विटास दलाल स्‍ट्रीट के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले पीएमएस प्लेटफॉर्म में से एक बन गया। यह पीएमएस और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) रणनीतियों में लगभग ₹7,700 करोड़ का प्रबंधन करता है।

ट्रैक रिकॉर्ड स्टार निवेशकों से भी अलग

दस्तावेजों और उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, भैया का ट्रैक रिकॉर्ड स्टार निवेशकों से भरे बाजार में भी अलग दिखता था। उनकी फ्लैगशिप PMS रणनीति ने लगभग 34% का कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) दिया, जिससे लगभग 2,800% का एब्सोल्यूट रिटर्न मिला। इसका मतलब है कि लंबे समय में निवेशकों को करीब 28 गुना रिटर्न मिला। एक्विटास को भारतीय इक्विटी बाजार में टॉप-परफॉर्मिंग PMS फंड्स में से एक माना जाता है।

फंड मैनेजर से फाउंडर तक का सफर

सिद्धार्थ भैया एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) थे। उन्होंने 2012 में एक्विटास की स्थापना की थी। इससे पहले उन्होंने निप्‍पॉन इंडिया म्‍यूचुअल फंड में लगभग सात साल फंड मैनेजर के तौर पर काम किया था। उनके सहकर्मी और साथी उन्हें एक बहुत ही विश्लेषणात्मक और विपरीत सोच रखने वाला निवेशक बताते थे। वह वैल्यू डिसिप्लिन को ग्रोथ-ओरिएंटेड स्टॉक चुनने के साथ मिलाते थे।

सिद्धार्थ भैया की निवेश फिलॉसफी का मुख्य आधार डीप बॉटम-अप रिसर्च, मजबूत बैलेंस शीट वाली कंपनियां, स्केलेबल बिजनेस मॉडल और धैर्यपूर्वक पूंजी का आवंटन था। भैया छोटी अवधि के बाजार के शोर को नजरअंदाज करने और विजेता वाले निवेश को कई बाजार साइकिलों तक बनाए रखने के लिए जाने जाते थे।

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