UPI MDR Charges Update: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने UPI भुगतान पर स्पष्टीकरण दिया है। 2000 रुपये से अधिक लेनदेन पर प्रस्तावित शुल्क को लेकर चल रहे भ्रम को दूर किया गया है। उन्होंने साफ कहा कि यह कोई सरकारी टैक्स नहीं है और सरकार के खाते में नहीं जाएगा। MDR शुल्क का पूरा खर्च व्यापारी उठाएंगे और ग्राहकों पर कोई बोझ नहीं पड़ेगा।
UPI भुगतान पर MDR शुल्क को लेकर वित्त मंत्री ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि यह शुल्क कोई टैक्स, सेस या सरचार्ज नहीं है। इससे मिलने वाला पैसा भारत सरकार के समेकित कोष में नहीं जमा होता। यह व्यवस्था NPCI, बैंक और पेमेंट एग्रीगेटर के बीच काम करती है।
निर्मला सीतारमण ने बताया कि 2000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर MDR लगेगा। इस शुल्क का भुगतान केवल व्यापारी या दुकानदार ही करेंगे। उपभोक्ताओं को इसके लिए कोई अतिरिक्त पैसा नहीं देना होगा। व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P लेनदेन पूरी तरह मुफ्त बने रहेंगे।
नए ढांचे के तहत पर्सन टू मर्चेंट लेनदेन पर शुल्क प्रस्तावित है। 2000 रुपये से अधिक राशि पर 0.40 प्रतिशत तक MDR तय किया गया है। सरकार ने इस MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये निर्धारित की है। यह नियम 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने की संभावना जताई गई है।
व्यापारी क्रेडिट कार्ड की तरह ही इस शुल्क का प्रबंध करेंगे। दुकानदार ग्राहकों को अलग-अलग ऑफर के जरिए छूट दे सकते हैं। आम उपभोक्ताओं को इस व्यवस्था से चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। डिजिटल भुगतान प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है।
2000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर GST पर फैसला होना बाकी है। MDR पर 18 प्रतिशत GST लगाने के प्रस्ताव पर चर्चा होगी। GST परिषद की अगली बैठक 7 अक्टूबर को प्रस्तावित की गई है। इस बैठक में मुख्य ध्यान प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर केंद्रित रहेगा।
कारोबारी MDR पर चुकाए गए GST का इनपुट टैक्स क्रेडिट ले सकेंगे। इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलने से व्यापारियों पर कर का कुल बोझ कम होगा। बीमा प्रीमियम की तर्ज पर ही इस व्यवस्था को लागू करने की योजना है। परिषद उपभोक्ताओं के व्यापक हितों को ध्यान में रखकर फैसला लेगी।
निर्मला सीतारमण ने इस मुद्दे पर राजनीति करने के लिए विपक्ष को घेरा। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास सरकार पर हमला करने के सही मुद्दे नहीं हैं। यह NPCI और बैंकों के बीच का पूरी तरह से व्यावसायिक निर्णय है। विपक्ष भ्रम फैला रहा है कि यह फैसला सरकार ने दबाव में लिया है।
वित्त मंत्री ने कहा कि महामारी और युद्ध का मुकाबला करने वाली सरकार दबाव में नहीं आती। भारत वैश्विक मंचों और ग्लोबल साउथ के लिए मजबूती से आवाज उठाता रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार देश की संप्रभुता और आर्थिक हितों की रक्षा करती है। MDR को टैक्स बताकर जनता को गुमराह करने का प्रयास पूरी तरह गलत है।