थीमैटिक फंड्स। इमेज-एआई 
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FD से ज्यादा रिटर्न दे रहा थीमैटिक फंड्स, न रिस्क-न कोई टेंशन

Thematic Funds: आप कम जोखिम लेकर निवेश करना चाहते हैं तो आपके लिए फंड आए है, जो बिना चिंता के शानदार और बंपर रिटर्न दे सकता है।

रंजन कुमार

Thematic Funds Details: आप भी निवेश को लेकर संशय में रहते और चाहते हैं कि आपका पैसा अच्छे रिटर्न्स के साथ सुरक्षित रहे तो थीमैटिक म्यूचुअल फंड अच्छा विकल्प हो सकता है। इन फंड की सबसे बड़ी खासियत है कि ये किसी खास ट्रेंड या थीम के अनुसार कंपनियों में निवेश करते हैं। इससे न सिर्फ रिटर्न बढ़ता है, बल्कि जोखिम कम रहता है।

थीमैटिक फंड्स उन कंपनियों में पैसा लगाते हैं, जो खास ट्रेंड या थीम (जैसे-एफएमसीजी, ऑटो सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग) से जुड़ी होती हैं। ये केवल एक इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रहते, बल्कि चुनी गई थीम से जुड़ी अलग-अलग सेक्टर की कंपनियों में निवेश कर आपके पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करते हैं। यही वजह है कि निवेश का रिस्क बंट जाता है।

बंपर रिटर्न

विशेषज्ञ बताते हैं कि थीमैटिक इन्वेस्टमेंट में सबसे जरूरी सही समय पर इंट्री और एग्जिट की रणनीति बनाना है। उदाहरण के लिए ICICI प्रूडेंशियल थीमैटिक एडवांटेज फंड (FOF) ने 30 जुलाई 2025 तक पिछले एक साल में 8.23% का रिटर्न दिया है। वहीं, तीन साल में 20.68% और पांच साल में 26.08% की कंपाउंड वार्षिक वृद्धि (CAGR) दर्ज की है।

क्यों करें निवेश?

ट्रेंडिंग सेक्टरों में डायरेक्ट हिस्सा। पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन का फायदा। प्रोफेशनल और अनुशासित फंड मैनेजमेंट। बेहतर लॉन्ग टर्म रिटर्न की संभावना।

रणनीति के साथ कर सकते हैं निवेश

इस निवेशक को जोखिम होता है, लेकिन अन्य फंड की अपेक्षा कम होता है। दरअसल, निवेश कई कंपनियों में बंटा रहता है। आप भी कोई नया-नया निवेश विकल्प तलाश रहे हैं तो बाजार के ट्रेंड को समझते हुए थीमैटिक म्यूचुअल फंड में एक रणनीति के साथ निवेश कर सकते हैं। इससे आपके पैसे को लॉन्ग टर्म ग्रोथ के साथ सुरक्षा का भी भरोसा मिलेगा।

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12 महीने में कैसा प्रदर्शन रहा?

म्यूचुअल फंड हाउस तरह-तरह की स्कीमें लॉन्च लाते रहते हैं। इनमें से एक थीमैटिक फंड भी है। म्यूचुअल फंड हाउस नए-नए थीमैटिक फंड्स लॉन्च कर रहे हैं, लेकिन निवेशकों में इसके प्रति रुचि अच्छी बढ़ रही है। हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार अक्टूबर 2025 तक 12 महीनों की अवधि में थीमैटिक न्यू फंड ऑफर्स (NFOs) से जुटाई गई पूंजी में पिछले वर्ष की तुलना में 52% की गिरावट आई, जो लगभग 33,712 करोड़ रुपये थी।

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