Tata Sons Board Meeting: टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन फरवरी 20, 2027 को कार्यकाल पूरा होने पर पद छोड़ देंगे। उन्होंने 12 अगस्त को सूचित कर दिया था कि वे दोबारा सेवा विस्तार नहीं चाहते हैं। उनके इस फैसले से देश के बड़े व्यापारिक घराने में उत्तराधिकार की कड़ी प्रक्रिया शुरू हो गई है।
चंद्रशेखरन की पुनः नियुक्ति पर बोर्ड में कड़ा मतभेद दिखा है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा उनके कार्यकाल विस्तार का बिल्कुल समर्थन नहीं कर रहे हैं। इस कारण चंद्रशेखरन ने अपनी ओर से दोबारा पद पर बने रहने की कूटनीतिक इच्छा नहीं जताई, जिससे अब समूह के भीतर नए नेतृत्व की तलाश काफी तेज हो गई है।
टाटा संस की आज होने वाली वार्षिक आम बैठक (AGM) के स्थगित होने की पूरी संभावना बनी हुई है। इसका मुख्य कारण एक प्रमुख शेयरधारक सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) पर लगा कड़ा रेगुलेटरी बैन है। नियमों के मुताबिक बैठक के कोरम में इस ट्रस्ट के प्रतिनिधि की उपस्थिति अनिवार्य है, जिसके बिना यह बैठक स्थगित हो जाएगी।
कंपनी के नियमों के तहत दोनों मुख्य ट्रस्टों का एक संयुक्त प्रतिनिधि AGM में होना आवश्यक है। रेगुलेटरी फ्रीज के कारण एसआरटीटी प्रतिनिधि नियुक्त नहीं कर पा रहा है। इसलिए कोरम पूरा न होने की स्थिति में इस AGM को कंपनी कानून के तहत आगामी दिसंबर तक के लिए आगे स्थगित किया जा सकता है।
बोर्ड की अगली महत्वपूर्ण बैठक सितंबर के मध्य में होने की उम्मीद है। इस बैठक में निदेशक मंडल चंद्रशेखरन के अगले कार्यकाल की अनिच्छा के फैसले को औपचारिक रूप से दर्ज करेगा। इसके साथ ही नए चेयरमैन को खोजने के लिए एक पांच सदस्यीय विशेष चयन समिति के गठन की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
हालांकि चयन समिति का काम भी तब तक औपचारिक रूप से आगे नहीं बढ़ पाएगा जब तक एसआरटीटी पर लगा प्रतिबंध नहीं हटता है। नियमों के अनुसार इस पांच सदस्यीय समिति में कम से कम तीन सदस्यों को दोनों प्रमुख ट्रस्टों द्वारा संयुक्त रूप से चुना जाना अनिवार्य है, जो अभी कूटनीतिक रूप से बिल्कुल संभव नहीं है।
चंद्रशेखरन का चेयरमैन पद वैसे तो फरवरी 2027 तक है, लेकिन उनका बने रहना AGM में निदेशक के रूप में पुनर्नियुक्ति पर निर्भर करता है। अगर AGM में उनका कार्यकाल आगे नहीं बढ़ता, तो उनका कूटनीतिक चेयरमैन पद समय से पहले ही समाप्त हो जाएगा, जिससे टाटा समूह का यह संकट और अधिक कड़ा हो सकता है।