अश्विनी वैष्णव और सुदंर पिचाई, (सोर्स- सोशल मीडिया) 
बिज़नेस

सुंदर पिचाई और अश्विनी वैष्णव भी हुए मुरीद! आखिर क्या है भारत की 'GI कॉफी' का राज, जिसकी पूरी दुनिया में चर्चा

Bharat GI Coffee: गुरुवार को सुंदर पिचाई ने इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 के दौरान भारत जीआई कॉफी लाउंज में भारतीय GI कॉफी का स्वाद लिया। पिचाई ने एक सिप के बाद Wow जैसी प्रतिक्रिया दी।

मनोज आर्या

Indian GI Tag Coffee: दिल्ली में चल रहे एआई इंपैक्ट समिट 2026 में भारत जीआई कॉफी ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है. जहां वैश्विक तकनीकी मंच पर केंद्र के नेताओं और विश्व-स्तरीय उद्योग प्रमुखों ने इसका स्वाद चखा। GI कॉफी को देश की विशिष्ट भौगोलिक पहचान वाले उत्पादों में शामिल किया जाता है, जिनकी गुणवत्ता, मीठास और सुगंध का लिंक सीधे उनके उत्पत्ति क्षेत्र से जुड़ा होता है। कॉफी का आनंद सुंदर पिचाई ने भी लिया अब केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कॉफी पीते हुए अपना वीडियो शेयर किया है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इंस्टाग्राम पर एक रील में भारत GI पहल को प्रमोट करते हुए कॉफी पीते एक वीडियो शेयर किया, जिसमें वह अलग-अलग जगह की जीआई कॉफी को खरीदते हुए और यूपीआई पेमेंट करते हुए भी दिखाई दे रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने वीडियो शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा कि भारत जीआई, यूपीआई एंड एआई।

DPIIT ने लॉन्च की है ये कॉफी

इस GI पहल (Bharat GI) को डिपार्टमेंट फॉर प्रोमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) के तहत लॉन्च किया गया है और इसे A World Exclusive के रूप में पोजिशन किया गया है। जिसका उद्देश्य GI-टैग वाले उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान और प्रीमियम मार्केटिंग देना है।

सुंदर पिचाई ने भी पी कॉफी

गुरुवार को सुंदर पिचाई ने इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 के दौरान भारत जीआई कॉफी लाउंज में भारतीय GI कॉफी का स्वाद लिया। पिचाई ने एक सिप के बाद Wow जैसी प्रतिक्रिया दी और इसे सराहा। उनकी यह प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर वायरल भी हुई है। जिस पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने X पर एक वीडियो साझा कर लिखा कि जब सुंदर पिचाई एक घूंट लेने आते हैं, तो आप समझ सकते हैं कि यह कॉफी वास्तव में खास है।

Bharat GI Coffee की दुनिया में चर्चा

दुनिया आज Bharat GI Coffee के स्वाद के साथ भारत को भी उठा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार GI टैग एक उत्पाद की विशिष्टता और गुणवत्ता को मान्यता देता है, जो सिर्फ उस इलाके की मिट्टी, मौसम और पारंपरिक उत्पादन प्रक्रिया के कारण संभव होता है। GI-टैग वाली कॉफी में यही स्थानीय विशेषताएं इसे अलग बनाती हैं, जिसकी दुनिया भर में मांग और सराहना बढ़ रही है।

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