Paytm Payment Bank Removed: भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को Paytm पेमेंट्स बैंक लिमिटेड पर बड़ी कार्रवाई की है। उसे अपनी 'शेड्यूल्ड बैंकों' की लिस्ट से हटाने का ऐलान किया। यह कदम बैंक का लाइसेंस रद्द करने और दिल्ली हाई कोर्ट के बैंक को बंद करने के आदेश के कुछ महीनों बाद उठाया गया है।
जब RBI ने अप्रैल में पेटीएम पेमेंट्स बैंक का लाइसेंस रद्द किया था, तो उसने कहा था कि बैंक के पास बंद होने की प्रक्रिया के दौरान अपनी सभी जमा देनदारियों को चुकाने के लिए पर्याप्त है।
One97 कम्युनिकेशंस द्वारा संचालित Paytm ने अलग से साफ किया है कि PPBL के खिलाफ की गई कार्रवाई से उसकी सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ा है। उसकी UPI सेवाएं मल्टी-बैंक व्यवस्था के जरिए चलती हैं और कंपनी ने कहा है कि उसने मार्च 2024 में ही पेमेंट्स बैंक के साथ अपने मुख्य कारोबारी समझौते खत्म कर लिए थे।
केंद्रीय बैंक ने 7 अक्टूबर के अपने बयान में कहा कि PPBL को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट, 1934 की दूसरी अनुसूची से हटा दिया गया है।
यह ताजा घोषणा 24 अप्रैल को कामकाज के समय के बाद PPBL का बैंकिंग लाइसेंस रद्द किए जाने के बाद आई है। RBI ने कहा था कि बैंक का कामकाज इस तरह से चलाया जा रहा था जो बैंक और उसके जमाकर्ताओं के हितों के लिए नुकसानदेह था।
RBI अधिनियम की दूसरी अनुसूची में वो मान्यता-प्राप्त बैंक को शामिल किया जाता है जो केंद्रीय बैंक द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करता है। जिन्हें कुछ खास परिचालन की सुविधाएं मिलती हैं।
द सिटी को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (मुंबई, महाराष्ट्र): RBI ने अपर्याप्त पूंजी और कमाई की संभावना न होने के कारण जून 2024 में इस बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया था
बनारस मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक: खराब वित्तीय स्थिति के कारण जुलाई 2024 में इसका भी बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया गया था।
रुपी को-ऑपरेटिव बैंक (पुणे): पर्याप्त पूंजी न होने और नियमों के पालन में कमी के चलते RBI ने इस बैंक का लाइसेंस भी रद्द किया था, जिस पर बाद में अदालती प्रक्रियाएं भी चलीं।
अन्य को-ऑपरेटिव बैंक: पिछले कुछ वर्षों में RBI ने मुधोल को-ऑपरेटिव बैंक, मिलाथ को-ऑपरेटिव बैंक, श्री आनंद को-ऑपरेटिव बैंक, डेक्कन अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक और सेवा विकास को-ऑपरेटिव बैंक सहित कई छोटे व शहरी सहकारी बैंकों के लाइसेंस रद्द किए हैं
PPBL को अपना बैंकिंग लाइसेंस रद्द होने से काफी पहले से ही बार-बार रेगुलेटरी पाबंदियों का सामना करना पड़ा था। 11 मार्च, 2022 को RBI ने सुपरवाइजरी चिंताओं का हवाला देते हुए बैंक को नए कस्टमर जोड़ने से रोक दिया था। साथ ही, RBI ने बैंक को अपने सिस्टम के व्यापक ऑडिट के लिए एक IT ऑडिट फर्म नियुक्त करने का भी निर्देश दिया था।
इसके बाद 31 जनवरी और 16 फरवरी, 2024 को बिजनेस पर और पाबंदियां लगाई गईं। इनमें ग्राहकों के अकाउंट, प्रीपेड इंस्ट्रूमेंट और वॉलेट में नए डिपॉजिट, क्रेडिट और टॉप-अप शामिल थे।
बाद में, रेगुलेटरी नियमों का पालन न करने की वजह से RBI ने लाइसेंस रद्द कर दिया। दिल्ली हाई कोर्ट ने बैंक को बंद करने का आदेश दिया, जिससे यह मामला औपचारिक लिक्विडेशन प्रोसेस में आ गया।