RBI MPC 7 Key Takeaways: सस्ते लोन की उम्मीद करना अब और मुश्किल हो गया है। आज, 7 अक्टूबर को भारती रिजर्व बैंक (RBI) ने 4 साल में पहली बार रेपो रेट बढ़ाया। यह अब 25 बेसिस पॉइंट बढ़कर 5.50% हो गया है। रेपो रेट वह रेट है जिस पर RBI बैंकों को पैसा उधार देता है।
एक बेसिस पॉइंट एक प्रतिशत पॉइंट का सौवां हिस्सा होता है, इसलिए उनमें से 25 एक प्रतिशत का चौथाई हिस्सा बनते हैं। फरवरी 2023 के बाद यह पहली बढ़ोतरी है।
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस फैसले की घोषणा की। ब्याज दर तयर करने वाला पैनल एमपीसी के सभी सदस्यों ने बढ़ोतरी के पक्ष में वोट दिया। कमेटी ने अपना रुख भी बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' कर लिया, जो कि पहले 'न्यूट्रल' रखा था। यहां सात खास बातें हैं जिन पर निवेशकों को अभी ध्यान देने की जरूरत है-
मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने एकमत होकर रेपो रेट को 25 बेसिस प्वाइट्स (bps) बढ़ाकर 5.50% करने के पक्ष में वोट किया। पॉलिसी का रुख भी 4-2 की मेजॉरिटी के साथ 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' में बदल गया।
भारतीय रिजर्व बैंक ने संकेत दिया है कि आगे के पॉलिसी विकल्प काफी हद तक एक और दर बढ़ोतरी और एक स्थिर के बीच हैं। क्रूड ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी, खाने की चीजों की कीमतों और ग्लोबल अनिश्चितताओं के कारण महंगाई का रिस्क बढ़ गया है। पश्चिम एशिया संघर्ष ने रिस्क की एक और लेयर जोड़ दी है।
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने यह भी चेतावनी दी कि ग्लोबल महंगाई तेजी से बढ़ सकती है और सभी अर्थव्यवस्था में सख्त मौद्रिक नीति शुरू हो सकती है। उन्होंने आगे कहा कि RBI की अक्टूबर की बढ़ोतरी यह मानती है कि साइक्लिकल महंगाई का रिस्क अब नुकसानदायक नहीं है।
रेट में बढ़ोतरी के बावजूद, आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए अपने रियल ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) ग्रोथ के अनुमान को पहले के 6.7 फीसदी से बढ़ाकर 7.1 फीसदी कर दिया है।
दूसरी तिमाही के ग्रोथ अनुमान को 6.4% से बढ़ाकर 7.2% कर दिया गया, जबकि तीसरी तिमाही के अनुमान को 6.5% से बढ़ाकर 6.9% कर दिया गया। चौथी तिमाही का अनुमान 6.8% पर बना हुआ है। हालांकि, वित्त वर्ष-28 की पहली तिमाही के अनुमान को 7.3% से घटाकर 7.1% कर दिया गया।
भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष- 27 के लिए अपने कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) महंगाई के अनुमान को पहले के 5% से बढ़ाकर 5.2% कर दिया है। अब दूसरी तिमाही में महंगाई 4.9%, तीसरी तिमाही में 6% और चौथी तिमाही में 5.7% रहने का अनुमान है।
कोर महंगाई, जिसमें खाने और ईंधन शामिल नहीं हैं, लगभग 4.4% रहने का अनुमान है। अगस्त में खुदरा महंगाई जुलाई के 4.5% से बढ़कर 4.8% हो गई। आरबीआई ने कहा कि खाने और ईंधन की कीमतों का इसमें बड़ा योगदान था, जबकि कोर महंगाई में भी बढ़ोतरी के संकेत दिखे।
आरबीआई ने जियोपॉलिटिकल टेंशन, इंटरनेशनल कमोडिटी की बढ़ी हुई कीमतों, ट्रेड में टकराव और मुश्किल वैश्विक वित्तीय हालात की ओर इशारा किया है। भारत के लिए कच्चा तेल खास तौर पर जरूरी है क्योंकि तेल की ज्यादा कीमतों से ट्रांसपोर्ट और इनपुट लागत बढ़ सकती है, साथ ही महंगाई और रुपये पर भी दबाव पड़ सकता है।
संजय मल्होत्रा ने आगे कहा कि केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष-28 की दूसरी तिमाही के लिए महंगाई 4.9%, दिसंबर तिमाही के लिए 6%, चौते तिमाही के लिए 5.7% और जून तिमाही के लिए 5.6% रहने का भी अनुमान लगाया है, जिसमें रिस्क बराबर संतुलित हैं। उन्होंने यह भी बताया कि आगे चलकर US यील्ड का बढ़ना एक मुख्य फैक्टर है जिस पर नजर रखनी होगी।
भारतीय रिजर्व बैंक का मानना है कि ग्लोबल मुश्किलों के बावजूद घरेलू आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी रह सकती हैं। इसके साथ ही, वह कुछ समय के लिए कीमतों पर पड़ने वाले दबाव को लगातार बने रहने से रोकना चाहता है।
इस नीति में फाइनेंशियल सिस्टम के आस-पास के डेवलपमेंट भी शामिल थे, जिसमें नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) एग्रीगेटर की इंटरऑपरेबिलिटी भी शामिल है। RBI ने नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी अकाउंट एग्रीगेटर (NBFC-AAs) के बीच इंटरऑपरेबिलिटी को इनेबल किया है, जिससे एक अकाउंट एग्रीगेटर के साथ रजिस्टर्ड कस्टमर दूसरे अकाउंट एग्रीगेटर के जरिए रेगुलेटेड एंटिटी के साथ अपनी वित्तीय जानकारी सुरक्षित रूप से साझा कर सकते हैं।