विजयपत सिंघानिया(Image- Social Media) 
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रेमंड के पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया का 87 वर्ष की आयु में निधन, आज होगा अंतिम संस्कार

Vijaypat Singhania Passes Away: रेमंड के पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया का शनिवार शाम निधन हो गया। वे 87 साल के थे। उनके बेटे गौतम सिंघानिया ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर यह जानकारी दी।

अर्पित शुक्ला

Raymond Group Chairman Passes Away: रेमंड के पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया का शनिवार शाम निधन हो गया। वह 87 वर्ष के थे। उनके बेटे और रेमंड ग्रुप के मौजूदा चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर गौतम सिंघानिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह जानकारी साझा की। कंपनी के प्रवक्ता के अनुसार, विजयपत सिंघानिया का मुंबई में निधन हुआ और उनका अंतिम संस्कार रविवार को किया जाएगा।

पद्म भूषण से सम्मानित विजयपत सिंघानिया को एविएशन का खास शौक था। उन्होंने हॉट एयर बैलून के जरिए सबसे अधिक ऊंचाई तक पहुंचने का विश्व रिकॉर्ड भी बनाया था। करीब दो दशकों तक, वर्ष 2000 तक, उन्होंने रेमंड कंपनी का नेतृत्व किया। इसके बाद उन्होंने कंपनी की जिम्मेदारी अपने बेटे गौतम को सौंप दी और अपनी 37% हिस्सेदारी भी उनके नाम कर दी। कुछ साल पहले विजयपत सिंघानिया और उनके बेटे के बीच कानूनी विवाद भी सामने आया था, हालांकि बाद में दोनों ने आपसी सहमति से मामले को सुलझा लिया था।

कैसे हुई शुरुआत?

रेमंड की शुरुआत महाराष्ट्र के ठाणे में एक ऊनी मिल के रूप में हुई थी, जिसका नाम वाडिया मिल था। यह मिल सेना के जवानों के लिए वर्दी तैयार करती थी। शुरुआती समय में सब कुछ ठीक चला, लेकिन कुछ वर्षों बाद मिल बंद करनी पड़ी। इसी दौरान सिंघानिया परिवार को पता चला कि इस मिल को बेचने की योजना बनाई जा रही है। हालांकि, यह सौदा पहले ही एक अन्य व्यवसायी के साथ हो चुका था। बाद में, साल 1940 में कैलाशपत सिंघानिया ने उस व्यवसायी से वाडिया मिल खरीद ली और इसका नाम रेमंड मिल रख दिया। बेहतर व्यापारिक अवसरों की तलाश में यह कदम उठाया गया। उन्होंने कानपुर में जेके कॉटन स्पिनिंग एंड वीविंग मिल्स कंपनी की भी स्थापना की, जिसका उद्देश्य ब्रिटेन से आने वाले कपड़ों को चुनौती देना था।

एक मिल से ब्रांड बनने तक

कैलाशपत सिंघानिया पहले से ही कॉटन कपड़ों के कारोबार में सक्रिय थे। रेमंड को खरीदने के बाद उन्होंने सस्ते ऊनी कपड़े बनाना भी शुरू किया। कंपनी को आगे बढ़ाने के लिए 1958 में मुंबई में पहला रेमंड शोरूम खोला गया। 1960 तक रेमंड देश की एकमात्र मिल बन गई थी, जहां कपड़ा निर्माण के लिए विदेशी मशीनों का उपयोग किया जाता था। धीरे-धीरे रेमंड एक लोकप्रिय ब्रांड बन गया और इसके सूट व पैंट लोगों की पहली पसंद बनने लगे।

बाद में कंपनी को एहसास हुआ कि उसके उत्पाद केवल अमीर वर्ग तक सीमित हैं। इसके बाद उन्होंने आम लोगों तक पहुंचने का फैसला किया और किफायती दामों पर शर्ट, पैंट और सूटिंग फैब्रिक बनाना शुरू किया। यह रणनीति बेहद सफल साबित हुई और जल्द ही रेमंड आम जनता के बीच भी लोकप्रिय हो गया। देशभर में इसके शोरूम तेजी से बढ़ने लगे।

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