रतन टाटा (सौजन्य : सोशल मीडिया) 
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देश के अनमोल 'रतन' की कितनी थी दौलत, जानें कितने रुपये करते थे दान

7 अक्टूबर के दिन उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं की जांच का हवाला देने वाले रतन टाटा ने कल मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अपनी आखिरी सांस ली। रतन टाटा ने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, ग्रामीण विकास और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में अहम भूमिका निभायी है।

अपूर्वा नायक

नई दिल्ली : मां भारती के अनमोल रतन और देश के सबसे बड़े बिजनेसमैन में से एक रतन टाटा ने बुधवार की रात को आखिरी सांस ली। कुछ सूत्रों के अनुसार पता चला है कि वे लो ब्लड प्रेशर के कारण होने वाले हाइपोटेंशन से ग्रसित थे। यही कारण था कि उनके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। रतन टाटा ने 86 साल की उम्र में दुनिया से विदाई ली।

आपको बता दें कि 7 अक्टूबर के दिन ही उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जिसके बाद उन्होंने आधिकारिक रुप से इस बात की पुष्टि की थी कि उनका स्वास्थ्य बिल्कुल सही है। उन्होंने सोमवार को कहा था कि उनके हेल्थ को लेकर कोई चिंता की बात नहीं है और साथ ही उन्होंने ये भी कहा था कि वे केवल उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं की जांच करवा रहे हैं। आइए आपको बताते है कि रतन टाटा की नेटवर्थ कितनी थी?

रतन टाटा की नेटवर्थ

रतन टाटा ने टाटा ट्रस्ट के जरिए कई क्षेत्रों में अपना योगदान दिया है। बताया जाता है कि रतन टाटा ने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, ग्रामीण विकास और आपदा राहत जैसे कामों में बढ़ चढ़कर योगदान दिया है। साल 1991 में उन्होंने इस बिजनेस ग्रुप को अपने हाथों में लिया था। साल 2012 तक उन्होंने अपनी काबिलियत से इस ग्रुप को चेयरमैन बनकर संभाला था। अगर टाटा ग्रुप के कारोबार की बात की जाए, तो ऐसा कोई सेक्टर नहीं है, जिसमें उनका कारोबार फैला हुआ ना हो। घर की रसोई से लेकर आसमान में हवाई जहाज तक सभी क्षेत्रों में टाटा का योगदान रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार जानकारी मिली है कि साल 2022 में रतन टाटा की टोटल नेटवर्थ 3800 करोड़ रुपये दर्ज हुई थी। अगर IIFL Wealth Hurun Indian Rich List देखे तो इसमें वे 421 वें पायदान पर काबिज थे।

इतना रुपये करते थे दान

इस बिजनेस ग्रुप की 100 से ज्यादा लिस्टेड और अनलिस्टेड कंपनियां हैं, जिसका टोटल कारोबार करीब 300 अरब डॉलर का है। आपको बता दें कि इतनी कमाई होने के बावजूद रतन टाटा अपनी कमाई का ज्यादा से ज्यादा हिस्सा दान कर देते थे। रतन टाटा ने टाटा ग्रुप का प्रतिनिधित्व करके ना सिर्फ इस देश में बल्कि विदेश भी में नाम कमाया है।

टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने बयान दिया है कि रतन टाटा ना केवल उनके दोस्त थे बल्कि सबसे अच्छे मार्गदर्शक भी थे। उन्होंने आगे ये भी कहा है कि ," हम बेहद भारी दिल के साथ रतन नवल टाटा को विदाई दे रहे है, वो वाकई में एक असाधारण नेतृत्वकर्ता थे, उनके योगदान से ना केवल टाटा ग्रुप बल्कि पूरे देश को प्रेरणा मिली है।

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