Sri Lanka Petrol Diesel Price Cut: वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बड़ी हलचल देखने को मिल रही है, जिसका सीधा असर दक्षिण एशियाई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी कमी के बाद अब पड़ोसी देशों ने अपने नागरिकों को ईंधन की कीमतों में राहत देना शुरू कर दिया है।
पाकिस्तान द्वारा हाल ही में की गई कटौती के बाद, अब श्रीलंका ने भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में महत्वपूर्ण कमी करने का ऐलान किया है।
तेल की कीमतों में इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण भू-राजनीतिक समीकरणों में आया बदलाव माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को खत्म करने के लिए एक शुरुआती समझौता (MoU) हो गया है। इस कूटनीतिक सफलता के बाद होर्मुज का रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता जहाजों की आवाजाही के लिए फिर से खुल गया है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ा और जो कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था, उसकी कीमत अब गिरकर 72 डॉलर के स्तर पर आ गई है।
न्यूज एजेंसी एएफपी के मुताबिक, श्रीलंका के सरकारी पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने मंगलवार को ईंधन की दरों में 6 प्रतिशत तक की कटौती की घोषणा की है। नई दरों के अनुसार, डीजल की कीमत में 25 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई है, जिसके बाद अब यह 382 रुपये प्रति लीटर मिलेगा। वहीं, पेट्रोल की कीमतों में 20 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई है और अब इसकी नई दर 414 रुपये प्रति लीटर हो गई है।
बता दें कि फरवरी 2026 में ईरान पर हुए हमलों के बाद श्रीलंका ने तेल की कीमतों में लगभग 50% की भारी बढ़ोतरी की थी, जिससे वहां की आर्थिक स्थिति काफी नाजुक हो गई थी। श्रीलंका अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह से आयातित तेल और कोयले पर निर्भर है।
पाकिस्तान ने भी 19 जून को ईंधन की कीमतों में भारी कटौती की थी, जिसमें पेट्रोल के दाम 74 रुपये और हाई-स्पीड डीजल के दाम 67 रुपये घटाए गए थे। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह राहत अभी भी युद्ध-पूर्व स्तरों के मुकाबले कम है। उदाहरण के तौर पर, संकट शुरू होने से पहले पाकिस्तान में पेट्रोल लगभग 267 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर था, जो कटौती के बावजूद अभी भी 300 रुपये के करीब बना हुआ है। इसी तरह डीजल भी युद्ध-पूर्व स्तर (280 रुपये) के मुकाबले 312 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है।
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श्रीलंका जैसी अर्थव्यवस्थाओं के लिए, जो अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के 2.9 बिलियन डॉलर के बेलआउट लोन पर टिकी हैं, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट एक संजीवनी की तरह है। श्रीलंका सरकार ने पहले ही चेतावनी दी थी कि ईंधन की ऊंची कीमतें उसकी आर्थिक रिकवरी की कोशिशों को बाधित कर सकती हैं।
अब अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते शांति प्रयासों से न केवल वैश्विक बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद है, बल्कि आने वाले समय में अन्य देशों में भी ईंधन सस्ता होने की संभावना बढ़ गई है।