Noel Tata Opposes N Chandrasekaran Reappointment Vote: टाटा समूह की प्रमुख कंपनी टाटा संस के निदेशक मंडल की बैठक गुरुवार को मुंबई स्थित बांबे हाउस में हुई। बैठक में एन चंद्रशेखरन को पांच साल के तीसरे कार्यकाल के लिए चेयरमैन नियुक्त करने का फैसला किया है। हालांकि, चंद्रशेखरन ने बोर्ड को बताया था कि वह अपना दूसरा कार्यकाल पूरा होने के बाद चेयरमैन पद पर आगे बने रहने के इच्छुक नहीं हैं।
अब टाटा ट्रस्ट के प्रमुख नोएल एन टाटा ने इस मामले पर बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि चेयरमैन पद से हटने का फैसला एन चंद्रशेखरन का खुद का था। लेकिन अब आगे बढ़ने का समय आ चुका है और शेयरधारकों ने चेयरमैन के इस फैसले को स्वीकार कर लिया है। टाटा संस में टाटा ट्रस्ट की करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है। जानकारी के मुताबिक, चंद्रशेखरन के कार्यकाल को बढ़ाने को लेकर हुए मतदान में नोएल टाटा विरोध में वोट डाला था।
टाटा ट्रस्ट की ओर से जारी नोएल टाटा के बयान के मुताबिक, 12 अगस्त 2026 को चेयरमैन ने बोर्ड को पत्र लिखकर सूचित किया था कि उनका मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होने के बाद वह अगले कार्यकाल के लिए अपना नाम आगे नहीं बढ़ाएंगे। बयान में कहा गया है कि यह फैसला चंद्रशेखरन ने अपनी इच्छा से लिया था और उन्होंने बोर्ड के सामने इसे स्पष्ट रूप से रखा था।
नोएल टाटा के मुताबिक, बोर्ड की ओर से उन्हें ऐसा फैसला लेने के लिए नहीं कहा गया था और न ही इस संबंध में बोर्ड में कोई प्रस्ताव पारित हुआ था। यह निर्णय किसी समीक्षा प्रक्रिया का परिणाम भी नहीं था। बयान में कहा गया कि इसके बाद एन चंद्रशेखरन का पत्र सार्वजनिक हो गया। इसे कंपनी के शेयरधारकों और खास तौर पर टाटा ट्रस्ट्स के साथ पहले चर्चा किए बिना सार्वजनिक किया गया था। टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस की करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है।
नोएल टाटा ने कहा कि वह इसे शिकायत के रूप में नहीं देख रहे हैं। उनके अनुसार, चेयरमैन को अपने इरादे के बारे में बताने का पूरा अधिकार है। लेकिन जब इस तरह की जानकारी सार्वजनिक हो जाती है तो उसके प्रभाव को बाद में बोर्ड वापस नहीं बदल सकता। समूह के कर्मचारियों, कर्जदाताओं, कारोबारी साझेदारों और बाजार ने इस फैसले को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई की है। बहुमत शेयरधारक ने भी इसी तरह कदम उठाया है। अब आगे बढ़ने का समय है और बहुमत शेयरधारकों ने इस फैसले को स्वीकार कर लिया है।
बयान के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स ने चेयरमैन के फैसले को स्वीकार कर लिया है। साथ ही कंपनी से उसके नियमों के मुताबिक नए चेयरमैन के चयन के लिए एक चयन समिति गठित करने को कहा गया है। यह स्वीकृति और अनुरोध आधिकारिक तौर पर दर्ज किए जा चुके हैं और कंपनी को इसकी औपचारिक जानकारी दी गई है।
नोएल टाटा ने कहा कि इससे पहले एक महत्वपूर्ण सवाल का जवाब मिलना जरूरी है। कंपनी के नियमों के अनुसार चेयरमैन वही व्यक्ति हो सकता है जो कंपनी का निदेशक हो। ऐसे में मौजूदा चेयरमैन के निदेशक पद की स्थिति भी पूरी तरह स्पष्ट होना जरूरी है। उन्होंने कहा जिस आम बैठक में इस मुद्दे पर फैसला होना था, वह कोरम पूरा नहीं होने के कारण आगे नहीं बढ़ सकी। ऐसे में जब तक निदेशक पद से जुड़ा सवाल स्पष्ट नहीं हो जाता, तब तक चेयरमैन पद पर फैसला लेना जल्दबाजी होगी।
उन्होंने एक व्यावहारिक और कानूनी चिंता का भी जिक्र किया। अगर अभी चेयरमैन पद पर फैसला किया जाता है और बाद में यह सामने आता है कि संबंधित व्यक्ति का निदेशक पद पूरी तरह स्पष्ट या वैध नहीं था, तो कोई भी शेयरधारक इस फैसले को अदालत में चुनौती दे सकता है। नोएल टाटा के मुताबिक, कंपनी को खुद को इस तरह की कानूनी चुनौती के जोखिम में नहीं डालना चाहिए, खासकर ऐसे समय में जब कंपनी के सामने नियामक संस्था से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मामले भी लंबित हैं। उन्होंने कहा कि इन दोनों सवालों को अलग-अलग तरीके से देखा जाना चाहिए।