केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, (सोर्स-सोशल मीडिया) 
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72 करोड़ लोगों बड़ी राहत! अब मिनिमम बैलेंस की टेंशन खत्म, वित्त मंत्री ने पेनाल्टी हटाने का किया बड़ा ऐलान

Nirmala Sitharamanसीतारमण ने कहा कि पिछले तीन वित्तीय वर्षों में वसूले गए 8,092.83 करोड़ रुपये सरकारी बैंकों की कुल आय का लगभग 0.23% ही है। इस तरह के शुल्क बैंकों की आय का बहुत छोटा हिस्सा हैं।

मनोज आर्या

No Minimum Balance Penalty: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि देश में करीब 72 करोड़ बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट (BSBDA) ऐसे हैं, जिनमें मिनिमम बैलेंस न रखने पर कोई पेनल्टी नहीं लगती। इन खातों में प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) के तहत खोले गए खाते भी शामिल हैं।

लोकसभा में एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि बैंकों द्वारा BSBDA खातों में जीरो बैलेंस सेविंग्स अकाउंट की सुविधा दी जाती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य देश के सभी लोगों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाना है।

मिनिमम बैलेंस की अनिवार्यता खत्म

वित्त मंत्री ने कहा कि खास तौर पर बैंकिंग सुविधाओं से दूर रहने वाले लोगों, कमजोर वर्गों और छोटे जमाकर्ताओं को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने के लिए यह पहल की गई है। इसके जरिए सरकार वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना चाहती है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था का लाभ उठा सकें। इन खातों में न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने की कोई अनिवार्यता नहीं होती। खाता धारकों को जमा, निकासी और एटीएम एक्सेस जैसी बुनियादी बैंकिंग सेवाएं बिना किसी शुल्क के दी जाती हैं और इसके लिए कोई पेनल्टी चार्ज भी नहीं लगाया जाता।

पेनल्टी के रूप में बैंकों ने वसूले ₹8,092 करोड़

अन्य खातों के मामले में बैंक मिनिमम मंथली एवरेज बैलेंस (MAB) बनाए न रखने पर शुल्क लगा सकते हैं। यह शुल्क बैंकों की बोर्ड द्वारा स्वीकृत नीतियों और आरबीआई के मौजूदा निर्देशों के अनुसार लगाया जाता है। आरबीआई के नियमों के मुताबिक ऐसे शुल्क उचित, पारदर्शी और सेवाएं उपलब्ध कराने की लागत के अनुरूप होने चाहिए। वित्त वर्ष 2022-23 से 2024-25 के दौरान सरकारी बैंकों (PSBs) ने करंट अकाउंट और सेविंग्स अकाउंट धारकों से मिनिमम एवरेज बैलेंस न रखने पर कुल 8,092.83 करोड़ रुपये वसूले हैं।

पेनल्टी वसूलने का असली मकसद

सीतारमण ने कहा कि पिछले तीन वित्तीय वर्षों में वसूले गए 8,092.83 करोड़ रुपये सरकारी बैंकों की कुल आय का लगभग 0.23 फीसदी ही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि इस तरह के शुल्क बैंकों की आय का बहुत छोटा हिस्सा हैं और इनका उद्देश्य दंड के जरिए रेवेन्यू बढ़ाना नहीं, बल्कि बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने की लागत को पूरा करना है।

SBI समेत इन बैंकों ने हटाए चार्ज

ग्राहकों को बेहतर सेवाएं देने के लिए सरकारी बैंकों ने अपने सर्विस चार्ज की समीक्षा की है। बोर्ड द्वारा तय नीतियों और व्यावसायिक जरूरतों के आधार पर SBI ने मार्च 2020 से सेविंग्स अकाउंट में मिनिमम एवरेज बैलेंस (MAB) न रखने पर लगने वाला चार्ज पूरी तरह खत्म कर दिए हैं। इसके अलावा 2025 में नौ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने भी ऐसे शुल्क पूरी तरह हटा दिए हैं। वहीं दो बैंकों ने मिनिमम बैलेंस से जुड़े चार्ज को कम या आसान बना दिया है।

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