पीएम मोदी, डोनाल्ड ट्रंप (Image- Social Media) 
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ज्‍वेलरी, कपड़े, कार…भारत और अमेर‍िका के बीच हुई ट्रेड डील से क्‍या-क्‍या होगा सस्‍ता? देखें लिस्ट

India US Trade Deal: विशेषज्ञों की मानें तो यह डील केवल व्यापार के बारे में नहीं है, बल्कि यह चीन के मुकाबले भारत को अमेरिका के सबसे भरोसेमंद आर्थिक पार्टनर के रूप में स्थापित करती है।

अर्पित शुक्ला

India US Trade Deal: सोमवार (2 फरवरी 2026) को भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच फोन पर हुई बातचीत के बाद इस मेगा समझौते की घोषणा की गई। यह डील पूरी तरह लेन-देन आधारित है, जिसमें दोनों देशों ने एक-दूसरे को बड़ी रियायतें दी हैं। आइए जानते हैं इस समझौते की प्रमुख शर्तें और इससे भारत के किन सेक्टर्स को सबसे अधिक फायदा मिलने की उम्मीद है।

क्या हैं डील की प्रमुख शर्तें?

  • टैरिफ में बड़ी कटौती- अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगाए गए जवाबी (Punitive/Reciprocal) टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले यह दर 50 प्रतिशत तक पहुंच गई थी।
  • रूस से तेल खरीद पर रोक- इस डील की सबसे अहम शर्त यह है कि भारत अब रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदेगा। इसके बदले भारत अपनी ऊर्जा जरूरतें अमेरिका और वेनेजुएला से पूरी करेगा।
  • जीरो टैरिफ की दिशा में कदम- भारत ने यह प्रतिबद्धता जताई है कि वह अमेरिकी उत्पादों पर लगने वाले सभी टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर्स को धीरे-धीरे शून्य करने की दिशा में काम करेगा।
  • 500 अरब डॉलर की खरीद- ‘Buy American’ नीति के तहत भारत अगले कुछ वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर से अधिक मूल्य की ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, कोयला और कृषि उत्पाद खरीदेगा।

किन सेक्टर्स को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?

अमेरिका द्वारा टैरिफ घटाए जाने से भारत के निर्यात को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। खास तौर पर इन पांच सेक्टर्स को सबसे ज्यादा लाभ होने की संभावना है:

  • टेक्सटाइल और परिधान- टैरिफ कम होने से भारतीय कपड़े अमेरिकी बाजार में सस्ते होंगे, जिससे ऑर्डर और निर्यात दोनों बढ़ेंगे।
  • आईटी सर्विसेज और टेक्नोलॉजी- अमेरिका से हाई-टेक उत्पादों की खरीद बढ़ने से भारतीय आईटी कंपनियों को बड़े प्रोजेक्ट्स और को-डेवलपमेंट के नए अवसर मिल सकते हैं।
  • फार्मा सेक्टर- दवाइयों के निर्यात पर टैक्स का बोझ कम होने से भारतीय जेनेरिक दवाओं की पकड़ अमेरिकी बाजार में और मजबूत होगी।
  • ऑटो कंपोनेंट्स- अमेरिका भारतीय ऑटो पार्ट्स कंपनियों के लिए एक बड़ा बाजार है। टैरिफ में करीब 7 प्रतिशत की कमी से कंपनियों के मुनाफे में इजाफा होगा।
  • ज्वेलरी और लेदर उद्योग- हाथ से बनी ज्वेलरी और लेदर उत्पादों पर ड्यूटी घटने से इन श्रम-प्रधान उद्योगों को बड़ी राहत मिलेगी।

डील का क्या होगा असर?

बाजार में तेजी- इस समझौते की खबर के बाद मंगलवार को GIFT Nifty में करीब 1000 अंकों की तेजी देखी गई। निवेशकों को उम्मीद है कि इससे भारत की जीडीपी ग्रोथ को नई रफ्तार मिलेगी।

वैश्विक स्तर पर मजबूती- ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के बाद अमेरिका के साथ इस तरह का व्यापक समझौता भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिका अपनी टैरिफ नीतियों को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह चीन के मुकाबले भारत को अमेरिका के सबसे भरोसेमंद आर्थिक साझेदार के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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