Highlights:
न्यूजीलैंड में भारतीय वस्तुओं को सभी टैरिफ लाइनों पर शून्य शुल्क की सुविधा मिलने की बात कही गई है।
समझौते के तहत न्यूजीलैंड भारत में 20 अरब डॉलर तक के निवेश को सुगम बनाएगा।
डेयरी और कुछ संवेदनशील कृषि क्षेत्रों को भारत ने संरक्षण दिया है।
Piyush Goyal FTA Statement: भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक, मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लागू होने से न्यूजीलैंड में भारतीय निर्यात को सभी टैरिफ लाइनों पर शून्य शुल्क की सुविधा मिल गई है।
इससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ने और निर्यातकों को नए अवसर मिलने की उम्मीद है। समझौते के तहत न्यूजीलैंड भारत में 20 अरब डॉलर तक के निवेश को सुगम बनाने की दिशा में भी काम करेगा। हालांकि, भारत ने डेयरी और कुछ संवेदनशील कृषि क्षेत्रों को संरक्षण दिया है।
पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता दोनों देशों के लिए अवसरों का नया अध्याय खोलेगा। उन्होंने बताया कि समझौते के लागू होने के बाद भारतीय वस्तुओं को न्यूजीलैंड में सभी टैरिफ लाइनों पर शून्य शुल्क के साथ प्रवेश मिलेगा।
इससे भारतीय उत्पादों की कीमतें न्यूजीलैंड के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकती हैं। निर्यातकों को शुल्क से मिलने वाली राहत का फायदा कारोबार बढ़ाने और नए खरीदारों तक पहुंच बनाने में मिल सकता है।
गोयल के मुताबिक, न्यूजीलैंड भारत में 20 अरब डॉलर तक के निवेश को सुगम बनाएगा। इससे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच यह समझौता केवल वस्तुओं के कारोबार तक सीमित नहीं है। इससे निवेश और पेशेवरों के लिए अवसर बढ़ाने की संभावनाएं भी जुड़ी हैं। उद्योग जगत को उम्मीद है कि बेहतर व्यापारिक पहुंच से दोनों देशों के आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे।
वाणिज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि समझौते में भारत के किसानों के हितों का ध्यान रखा गया है। उन्होंने कहा कि डेयरी, प्रमुख कृषि उत्पादों और पशु-आधारित उत्पादों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को संरक्षण दिया गया है।
सरकार के मुताबिक, व्यापार को बढ़ावा देने के साथ घरेलू कृषि क्षेत्र के हितों की रक्षा भी प्राथमिकता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य भारतीय कारोबारों को वैश्विक बाजारों तक पहुंच देना और संवेदनशील घरेलू क्षेत्रों पर संभावित दबाव को सीमित रखना है।
अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (कैट) के महासचिव और चांदनी चौक से सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने समझौते का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे भारत की विनिर्माण क्षमता और 'लोकल टू ग्लोबल', 'आत्मनिर्भर भारत' तथा ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।
खंडेलवाल के अनुसार, इस समझौते से कई भारतीय क्षेत्रों को निर्यात के नए अवसर मिल सकते हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
वस्त्र और परिधान
चमड़ा और फुटवियर
रत्न और आभूषण
इंजीनियरिंग सामान
ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स
फार्मास्यूटिकल्स और रसायन
कृषि उत्पाद और प्रोसेस्ड फूड
न्यूजीलैंड में शून्य शुल्क की सुविधा से भारतीय उत्पादों को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर बेचने में मदद मिल सकती है।
कैट का मानना है कि इस समझौते से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME), कारीगरों, किसानों, निर्माताओं, महिला उद्यमियों और निर्यातकों को लाभ मिल सकता है। छोटे कारोबारों के लिए विदेशी बाजार में पहुंच बढ़ना नए ग्राहकों और ऑर्डर हासिल करने का अवसर बन सकता है।
हालांकि, वास्तविक लाभ इस बात पर भी निर्भर करेगा कि कारोबार कितनी तेजी से नए बाजारों तक पहुंच बनाते हैं और न्यूजीलैंड में भारतीय उत्पादों की मांग कैसी रहती है।
भारत और न्यूजीलैंड ने वर्ष 2030 तक वस्तुओं और सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार को 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। उद्योग जगत को उम्मीद है कि मुक्त व्यापार समझौते से निर्यात, निवेश और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा।
प्रवीण खंडेलवाल ने भारतीय व्यापारियों, निर्माताओं और MSME से इस अवसर का लाभ उठाकर ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों की वैश्विक पहुंच बढ़ाने का आह्वान किया। उनके मुताबिक, यह समझौता घरेलू हितों की रक्षा के साथ भारतीय कारोबारों के लिए नए अंतरराष्ट्रीय बाजार खोलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।